मजबूरी जो न करा दें, जिन्हें कल दिल से लगाया, आज उन्हीं के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज करा दी

रांची से प्रकाशित विभिन्न अखबारों में समाचार छपे हैं। समाचार यह है कि एडीजी अनुराग गुप्ता और मुख्यमंत्री रघुवर दास के तत्कालीन राजनीतिक सलाहकार अब प्रेस सलाहकार अजय कुमार के खिलाफ रांची के जगन्नाथपुर थाने में प्राथमिकी दर्ज करा दी गई हैं। इनके खिलाफ गृह विभाग के अंडर सेक्रेटरी अविनाश ठाकुर के बयान पर भादवि की धारा 171बी, 171सी, 171ई, 171एफ के तहत मामला दर्ज किया गया है। प्राथमिकी कांड संख्या 154/18 हैं।

रांची से प्रकाशित विभिन्न अखबारों में समाचार छपे हैं। समाचार यह है कि एडीजी अनुराग गुप्ता और मुख्यमंत्री रघुवर दास के तत्कालीन राजनीतिक सलाहकार अब प्रेस सलाहकार अजय कुमार के खिलाफ रांची के जगन्नाथपुर थाने में प्राथमिकी दर्ज करा दी गई हैं। इनके खिलाफ गृह विभाग के अंडर सेक्रेटरी अविनाश ठाकुर के बयान पर भादवि की धारा 171बी, 171सी, 171ई, 171एफ के तहत मामला दर्ज किया गया है। प्राथमिकी कांड संख्या 154/18 हैं।

अब सवाल उठता है कि यह मामला 2016 का है, पिछले दो सालों से ये मामला झारखण्ड के मानस पटल पर है, पर सरकार के कानों पर जूं तक नहीं रेंगा। सरकार इन्हीं दोनों भलेमानस के वक्तव्यों के आधार पर बहुत सारे निर्णय करती और लेती रही, आज अचानक इन दोनों के खिलाफ प्राथमिकी कैसे दर्ज करवा दी? दरअसल ये सरकार तो कभी चाहती ही नहीं थी, कि इन दोनों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज हो, जो लोग सरकार को राज्यसभा की सीटे दिलाने के लिए एड़ी चोटी एक कर दें।

भला उसी के खिलाफ कोई पार्टी या सरकार कैसे जा सकती हैं? पर झारखण्ड में ऐसा हुआ है, और राज्य सरकार बड़ी बूझे मन से इन दोनों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज कराने का आदेश ही नहीं, बल्कि प्राथमिकी दर्ज भी करवा दिया, हालांकि सभी जानते हैं कि प्राथमिकी दर्ज कराने के बावजूद भी इन दोनो का कुछ भी बाल बांका नहीं होगा, जब तक राज्य में मुख्यमंत्री के रुप मे रघुवर दास हैं।

आखिर अचानक मुख्यमंत्री रघुवर दास ने इन दोनों एडीजी अनुराग गुप्ता और प्रेस सलाहकार अजय कुमार के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज क्यों करवाया? मामला स्पष्ट हैं, सूत्र बताते है कि मुख्यमंत्री  रघुवर दास को इस बात का अंदाजा लग गया था कि इस मामले में चुनाव आयोग गंभीर है और उसने स्वयं ही प्राथमिकी दर्ज कराने की सारी तैयारियां कर ली है, ऐसे में कही चुनाव आयोग ही अपने अधीनस्थ अधिकारियों से प्राथमिकी दर्ज न करवा दें तथा इससे राज्य सरकार की किरकिरी न हो जाये, इससे बचने के लिए आनन-फानन में प्राथमिकी दर्ज करवा दी गई।

अब सौभाग्य कहिये या दुर्भाग्य। मुख्यमंत्री के प्रेस सलाहकार अजय कुमार संभवतः राज्य के पहले व्यक्ति हुए, जो मुख्यमंत्री के प्रेस सलाहकार पद पर रहते हुए, उनके खिलाफ प्राथमिकी दर्ज हो गई। अब सवाल उठता है कि जैसे सामान्य लोगों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज  होते ही कारर्वाई प्रारंभ हो जाती हैं, इन महानुभावों के खिलाफ भी ऐसा कुछ दीखेगा, या कानून सिर्फ खास लोगों के लिए ही बना है।

Krishna Bihari Mishra

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