दिल से बोलने में ये हाल है, तो दिमाग से बोलियेगा तो क्या होगा? लोग ठीक ही कहते हैं कि PM पद पर नरेन्द्र मोदी को बने रहने के लिए विपक्ष में राहुल गांधी का होना भी उतना ही आवश्यक है

कभी संसद में अपनी भाषण की समाप्ति के बाद प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी को गले लगाते हैं, कभी संसद में अपनी भाषण की समाप्ति के बाद कनखी मारते हैं। कभी संसद में अपनी भाषण की समाप्ति के बाद फ्लाइंग किस मारते हैं। संसद में कभी ये कहते है कि वे आज दिमाग से नहीं, दिल से बोलेंगे। भारत माता की हत्या की बात करने लगते हैं। संसद में बयान देते है कि रावण सिर्फ मेघनाद और कुम्भकर्ण की ही बात सुनता था।

आखिर ये सारी हरकतें करने की, वो भी संसद में करने की ट्रेनिंग व रामायण की इतनी सुंदर जानकारी कौन महापुरुष राहुल गांधी को प्रदान करता है, मैं उस दिव्य पुरुष से मिलना चाहता हूं। राहुल गांधी के इन हरकतों से तो हमें आस-पास में रहनेवाले उन सामान्य लोगों की बात अनायास याद आ जाती है, जो कहते हैं कि अगर नरेन्द्र मोदी को जीवन भर प्रधानमंत्री बना रहना है तो राहुल गांधी का भी संसद में होना या विपक्ष में होना उतना ही नितांत आवश्यक हैं, क्योंकि अपनी हरकतों और दिव्य ज्ञानों से आम जनता के बीच अपनी योग्यता का बखान राहुल गांधी ही स्वयं कर सकते हैं। दूसरा कोई नहीं।

अब जरा देखिये न। जब-जब वे सदन में अच्छा बोलते हैं, वे अच्छा बोलने के बाद कुछ न कुछ ऐसी हरकत अवश्य कर देते हैं, जो उनकी सारी अच्छाई को गड्डमगड्ड कर देता है। जरा देखिये, जब राहुल गांधी ने संसद में पीएम मोदी को गले लगाया था, उस वक्त का राहुल का भाषण देखिये। जब उन्होंने कनखी मारी थी, उस वक्त का भी राहुल का भाषण देख लीजिये और आज फ्लाइंग किस के पहले जो राहुल ने भाषण दिया उसको देख लीजिये। हालांकि आज राहुल गांधी द्वारा दिया गया रामायण का प्रसंग तो किसी के गले से नहीं उतरेगा।

जो लोग लोकतंत्र में विश्वास रखते हैं, वे जानते हैं कि लोकतंत्र में विपक्ष की क्या भूमिका होती है, उनका रोल कितना अहम होता है? पर जब विपक्ष में राहुल गांधी जैसे दिव्य आत्मा हो तो यह भी स्पष्ट रुप से दिख जाता है कि जब भी देश में कभी भी लोकसभा के चुनाव होंगे तो आयेंगे मोदी ही, क्योंकि कोई भी देश की जनता ऐसे व्यक्ति के हाथ में तो सत्ता सौंपेंगी नहीं, जो जब मन करें किसी को भी कही भी गले लगा लें, कनखी मार दें, फ्लाइंग किस करें। अरे भाई लोकसभा है, कोई आपका घर तो नहीं, किसी का दलान नहीं, कोई आशिकी का अड्डा नहीं कि आप वहां कनखी मारें, फ्लाइंग किस करें।

क्या कांग्रेस के पूर्व के सम्मानित नेता आजादी के आंदोलन के दौरान या सत्ता प्राप्ति के बाद ऐसी ही हरकतें करते थे, जो आज संसद में राहुल गांधी कर रहे हैं? एक बात और, राहुल गांधी जी आपको रामायण कौन पढ़ाता है?, आपको क्यों नहीं मालूम कि अगर रावण कुम्भकर्ण की बातें मान लेता तो राम-रावण में युद्ध ही नहीं होता। जाकर किसी भी विद्वान से पूछ लीजिये, जब रावण कुम्भकर्ण को जगाता है, तो कुम्भकर्ण रावण को क्या कहता है?

वो तो साफ कहता है कि राम कोई साधारण पुरुष नहीं और न सीता कोई सामान्य नारी, पर कुम्भकर्ण की बातें रावण को अच्छी नहीं लगती, वो कुम्भकर्ण को युद्ध में भाग लेने का आदेश दे देता है। मेघनाद तो रावण का बेटा था, भला बेटा पिता को क्या आदेश देगा, बेटा का काम सिर्फ पिता का आदेश का पालन करना है, न कि उसे सलाह या आज्ञा देना। हो सकें तो फिर से रामायण पढ़िये।

और अंत में मणिपुर में जो भी हो रहा हैं, उसके लिए कौन दोषी हैं, अब देश की सारी जनता जान चुकी है। उसे आप उल्लू नहीं बना सकते और अंत में आपकी पार्टी का भी इतिहास लोग जानते हैं कि इंदिरा गांधी ने असम और पंजाब में क्या किया था? 1984 में राजीव गांधी के शासनकाल में पूरे देश में सिक्खों के साथ कैसा बर्ताव हुआ था? जम्मू-कश्मीर में कैसे पाकिस्तानी आतंकियों के हाथों वहां के हिन्दूओं का कत्लेआम हुआ, उन्हें कहां गया कि या तो तुम मुस्लिम बनो या मरने के लिए तैयार रहो?  इसलिए किसी ने ठीक ही कहा है कि जिनके दरवाजे शीशे के बने हो, उन्हें दूसरे पर पत्थर नहीं मारना चाहिए।

हां, थोड़ा अपने आपको बेहतर बनाइये, संसद में जाइये तो थोड़ी तैयारी करके जाइये, लेकिन आपके पास जो लोग हैं, वे कितने बुद्धिमान हैं, वो तो आपके भाषण देने से ही पता लग जाता है, क्योंकि आपका भाषण बता देता है कि उसे किसने तैयार किया हैं और उनकी बुद्धि किस तरह की हैं? हमें तो लगता है कि बड़ी ही सोच-समझकर आपके ही लोग आपको बर्बाद करने में दिमाग लगा रहे हैं, ताकि देश में नरेन्द्र मोदी जी सदा के लिए बने रहें।