ये है धनबाद पुलिस, इनके उपर ट्रैफिक नियम लागू नहीं होता और न ही इनका चलान ही कटता है

तस्वीरें झूठ नहीं बोलती। यह तस्वीर है धनबाद के अतिव्यस्ततम इलाके सरायढेला की। जहां एक पुलिसकर्मी बड़े ही शान से बुलेट की सवारी का मजा ले रहा है। आश्चर्य है कि वो बड़े ही शान से बुलेट चलाये जा रहा है, पर उसने अपने सिर पर हेलमेट नहीं पहन रखी है, अब ये हेलमेट उसने क्यों नहीं पहनी, ये वो जानें। पर कोई ये बता दें कि अगर सामान्य आदमी बिना हेलमेट के इस प्रकार की सवारी करें तो वर्तमान में इस कोरोना काल में झारखण्ड की पुलिस उसके साथ क्या कर रही है,

तस्वीरें झूठ नहीं बोलती। यह तस्वीर है धनबाद के अतिव्यस्ततम इलाके सरायढेला की। जहां एक पुलिसकर्मी बड़े ही शान से बुलेट की सवारी का मजा ले रहा है। आश्चर्य है कि वो बड़े ही शान से बुलेट चलाये जा रहा है, पर उसने अपने सिर पर हेलमेट नहीं पहन रखी है, अब ये हेलमेट उसने क्यों नहीं पहनी, ये वो जानें।

पर कोई ये बता दें कि अगर सामान्य आदमी बिना हेलमेट के इस प्रकार की सवारी करें तो वर्तमान में इस कोरोना काल में झारखण्ड की पुलिस उसके साथ क्या कर रही है, उसके गाड़ी का फोटो ले रही है, उसका चलान काट रही है, और उससे पैसे भी वसूल रही है, पर सवाल उठता है कि क्या ये सब केवल निरीह जनता के लिए हैं, या पुलिस के लिए भी है।

राजधानी रांची में कुछ महीने पहले स्थानीय पुलिस भी ट्रैफिक नियमों कि अवहेलना करते पकड़े जाने पर दंड भरते देखे गये, लेकिन यही बातें धनबाद में क्यों लागू नहीं होती, धनबाद में इसे कौन लागू करायेगा? क्या धनबाद की व्यवस्था अलग है, या धनबाद में पूरे राज्य में लागू होनेवाले कानून लागू नहीं होते।

राजधानी रांची में आप जिधर देखेंगे, उधर ही पुलिसकर्मी सिर पर हैलमेट लगाये अपनी ड्यूटी पूरी करते दिखेंगे, पर धनबाद में ऐसा नहीं हैं, उसका जीता जागता सबूत है, इस समाचार में दी गई तस्वीर। आश्चर्य यह भी है कि ऐसे लोगों पर कार्रवाई तक नहीं होती, अगर कार्रवाई होती तो निश्चय ही यह पुलिसकर्मी बिना हैलमेट के बुलेट नहीं चला पाता।

धनबाद का एक नागरिक इसकी इस हरकत पर जो कहा हैं, वो आपके सामने हैं, उसे भी पढ़िये… “ये महाशय आज दोपहर अपनी बुलेट गाड़ी पर सवार हो सरायढेला क्षेत्र की सैर करने निकले हैं। इन्हें देखिये जरा, वर्दी में हैं, यानि की ड्यूटी पर है, पर बीच बाजार में ये बिना हेलमेट के अपनी बुलेट गाड़ी ऐसे दौड़ा रहे हैं, मानो शहर के शहंशाह  निकले हैं।

खास बात यह कि जिनके कंधों पर यातायात कानून का अनुपालन कराने की जिम्मेदारी है, उनकी पूरी टोली वाहन के साथ खड़ी है, पर उन सब की आंखों पर तो मानो पट्टी बंधी थी, उन्हें ये दिखाई ही नहीं दिये, अगर एक आम नागरिक ऐसा करता है तो उनका कितने का चालान ये लोग बनाते? अब इनका चालान कौन बनायेंगे, एक बड़ा सवाल?” हम आपको बता दें कि ये तस्वीर आज यानि बुधवार की दोपहर 2.22 की ही हैं।

Krishna Bihari Mishra

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