गोमो जंक्शन के पास मालगाड़ियों से खूब हो रही कोयला चोरी, आरपीएफ ने चुप्पी साधी

नेताजी सुभाष चंद्र बोस जंक्शन गोमो से करीब डेढ़ किलोमीटर की दूरी पर, सीआइसी रेल फाटक के समीप कोयला चोरों का एकछत्र राज चलता है। कोयला लदी मालगाड़ी यहां जैसे ही रुकती है, कि कोयला चोरों का समूह इस पर कब्जा जमा लेता है। देखते ही देखते सैकड़ों की संख्या में कोयला चोर मालगाड़ी में लदी कोयला को उतारना शुरु कर देते हैं,

नेताजी सुभाष चंद्र बोस जंक्शन गोमो से करीब डेढ़ किलोमीटर की दूरी पर, सीआइसी रेल फाटक के समीप कोयला चोरों का एकछत्र राज चलता है। कोयला लदी मालगाड़ी यहां जैसे ही रुकती है, कि कोयला चोरों का समूह इस पर कब्जा जमा लेता है। देखते ही देखते सैकड़ों की संख्या में कोयला चोर मालगाड़ी में लदी कोयला को उतारना शुरु कर देते हैं, देखते ही देखते मिनटों में हजारों बोरा कोयला उतार लिया जाता हैं, इस कोयला चोरी में सर्वाधिक संख्या महिलाओं की होती हैं, ये महिलाएं दिन हो या रात, हर समय मौजूद रहती हैं, जैसे ही इन्हें कोयला से लदी मालगाड़ी दिखाई पड़ती है, ये उस पर टूट पड़ती हैं।

बताया जाता है कि यहीं पर एक टोला बसा हैजिस टोले के लोग इस प्रकार के काम में ज्यादा लगे हैं। रात के समय का दृश्य तो और अनोखा होता है, जैसे ही कोयला लदी मालगाड़ी रुकती है, आप देखेंगे कि यहां टॉर्च ही टार्च और उससे निकलती दूधिया लाइट आपको दिखाई पड़ेंगी, ये रात में टॉर्च की मदद लेकर कोयला उतारना शुरु कर देते हैं, जैसे ही रात मे कोयला, मालगाड़ी से उतारा जाता है, सुबह होते ही उसे टेम्पू या ट्रेक्टर से ठिकाने लगा दिया जाता हैबताया जाता है कि यहां एक दंबग व्यक्ति है, जिसके इशारों पर ये काम वर्षों से चलता रहा है।

कोयला चोरी के इस धंधे में आरपीएफ की भूमिका संदिग्ध है, लोग बताते हैं कि कुछ वर्ष पूर्व तक यह धंधा बंद था, पर इधर फिर इस धंधे ने जोर पकड़ी हैं, जिससे ग्रामीणों में आक्रोश व्याप्त हैं। ग्रामीण कोयला चोरी के इस खेल को बंद करनेकराने के लिए आरपीएफ के वरीय अधिकारियों से शिकायत करने का मन बना रहे हैं।

जानकार बताते हैं कि रेलवे के नियमों की माने तो स्टेशन परिसर मे कोयला चोरी होने पर स्टेशन मास्टर कंट्रोल को रिपोर्ट करेगा, वहीं स्टेशन परिसर के बाहर ट्रेन से कोयला चोरी होने पर ड्राइवर और गार्ड कंट्रोल को सूचित करेगा, पर इसके बावजूद यहां कोई रिपोर्ट किसी को नहीं करता, आखिर ऐसा क्यों हो रहा हैं, ये समझने की जरुरत है।

Krishna Bihari Mishra

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