बाबूलाल मरांडी को मिली जान से मारने की धमकी, पत्र में अमित शाह और रघुवर दास के नाम का उल्लेख

झारखण्ड विकास मोर्चा सुप्रीमो व कोडरमा से महागठबंधन प्रत्याशी बाबू लाल मरांडी को जान से मारने की धमकी दी गई है। आज पत्रकारों से बातचीत करने के क्रम में बाबू लाल मरांडी ने इस बात का खुलासा किया। उन्होंने संवाददाताओं को बताया कि पत्र में लिखा है कि जैसे कोडरमा जिलाध्यक्ष शंकर यादव को वाहन समेत उड़ा दिया गया था, ठीक उसी प्रकार उन्हें भी उड़ा दिया जायेगा।

झारखण्ड विकास मोर्चा सुप्रीमो व कोडरमा से महागठबंधन प्रत्याशी बाबू लाल मरांडी को जान से मारने की धमकी दी गई है। आज पत्रकारों से बातचीत करने के क्रम में बाबू लाल मरांडी ने इस बात का खुलासा किया। उन्होंने संवाददाताओं को बताया कि पत्र में लिखा है कि जैसे कोडरमा जिलाध्यक्ष शंकर यादव को वाहन समेत उड़ा दिया गया था, ठीक उसी प्रकार उन्हें भी उड़ा दिया जायेगा।

बाबू लाल मरांडी ने इस बात का भी उल्लेख किया कि ये धमकी भरा पत्र उन्हें कल ही मिला है, जिसे रांची से संप्रेषित किया गया है। वे जल्द ही इस पत्र को जिले के पुलिस पदाधिकारियों को सौंप देंगे। उन्होंने कहा कि इस पत्र में भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह और राज्य के मुख्यमंत्री रघुवर दास का भी नाम लिया गया है।

बाबू लाल मरांडी ने पत्रकारों को बताया कि इस पत्र में लिखा है कि देशस्तर पर भाजपा की भाकपा माओवादियों से डील हुई है, जिसमें भाजपा को साथ देने की बात कहीं गई है। बाबू लाल मरांडी ने कहा कि जब वे पहली बार राज्य के मुख्यमंत्री बने थे, तब पूरा राज्य उग्रवाद प्रभावित था और उस वक्त पीपुल्स वार ग्रुप जैसे नक्सलियों का यहां आतंक था, आज उस पीडब्लयूजी का दूसरे नक्सली ग्रुप में विलय हो गया है, जिस पीडब्लयूजी नक्सली के वेबसाइट में देश के तीन राज्यों के मुख्यमंत्री हिट-लिस्ट में थे, जिसमें आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री चंद्र बाबू नायडू, प. बंगाल के मुख्यमंत्री बुद्धदेव भट्टाचार्य और तीसरे में उनका नाम था।

उन्होंने कहा कि जैसे ही वे मुख्यमंत्री पद से हटे गिरिडीह में उनके साथ बहुत बड़ी घटना घटी, जब एक नक्सली घटना में 19 लोगों के साथ उनके परिवार के कई सदस्यों को भी मार डाला गया। बाद में उनके भाई पर भी कई नक्सली हमले हुए। चूंकि वे सरकार के हर गलत कार्यों का विरोध करते हैं, हाल ही में एक वरीय पुलिस अधिकारी अनुराग गुप्ता का भी विरोध किया, और आज स्थिति है कि उनसे जेड प्लस सुरक्षा हटा लिया गया।

ऐसे में उन्हें अपनी सुरक्षा की चिन्ता नहीं है, उन्हें राज्य की जनता की सुरक्षा का चिन्ता है, पर जिस प्रकार से घटनाएं घट रही हैं, और आज धमकी पत्र मिला तथा पत्र में जो कन्टेन्ट है, उससे साफ लगता है कि राज्य सरकार की मंशा ठीक नहीं है, गलत हैं, संदिग्ध हैं, क्योंकि पहले सुरक्षा हटाना और फिर पत्र का मिलना संदेह को जन्म देता है, उसके बावजूद भी वे चाहेंगे कि राज्य सरकार इस पत्र की बिना विलम्ब किये, सही-सही जांच करायें तथा दोषियों को सजा दिलाए।

Krishna Bihari Mishra

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जिन्होंने 1990 और 1995 के लालू प्रसाद और उनके शासनकाल के बिहार को देखा हैं, वे 2014 और 2019 के नरेन्द्र मोदी और उनके भारतीय शासनकाल को भी देख लें। कोई अंतर नहीं, लोकप्रियता वही है। कार्यकर्ताओं में भी समानता यानी उस वक्त लालू प्रसाद के खिलाफ कोई भी बिहार में उनका कार्यकर्ता एक भी शब्द सुनने को तैयार नहीं होता, आज मोदी के भी कार्यकर्ता उनके खिलाफ एक भी शब्द सुनने को तैयार नहीं हैं। समर्थक भी उसी प्रकार के, कोई अंतर नहीं।

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