सवाल उठता है कि किसी मंत्री को उनकी सुरक्षा के लिए 16 जवान और चार गाड़ियां क्यों? और जब उन्हें अपनी सुरक्षा की इतनी ही चिन्ता है, तो वे मंत्री पद को त्याग अपने घर पर विश्राम क्यों नहीं करते?
सवाल उठता है कि किसी मंत्री को उनकी सुरक्षा के लिए 16 जवान और चार गाड़ियां क्यों? और जब उन्हें उनकी अपनी सुरक्षा की इतनी ही चिन्ता है, तो वे मंत्री बने ही क्यों? मंत्री पद त्यागकर आराम से अपने घर में रहे, दूसरे को मौका दें और मंत्री भी ऐसा व्यक्ति बनें, जिसको अपनी सुरक्षा से ज्यादा जनता की सुरक्षा की चिन्ता हो। जो कहे, वो करें। न कि, अपनी सुरक्षा का रोना रोएं।
इसी राज्य में एक से एक विधायक और सांसद हुए, जिन्होंने अपनी सुरक्षा की कोई चिन्ता नहीं की। अरे सुरक्षा तो छोड़ दीजिये। अपने लिए वेतन और पेंशन तक नहीं ली। जबकि वे तीन-तीन बार विधायक और तीन-तीन बार सांसद रहे। आदर्श का वो कीर्तिमान बनाया, कि उस आदर्श के आगे-पीछे कोई आज का नेता नजर नहीं आता। चाहे वो किसी भी दल से क्यों न जुड़ा हो। उनका नाम आज भी आदर्श से लिया जाता है, भले ही वे दुनिया में आज नहीं हैं। नाम है उनका – ए के राय।
सच्चाई यह है कि आज जो भी व्यक्ति राजनीति में आ रहा है। वो इसलिए आ रहा है कि वो राजनीति में आकर अपने खानदान, अपने समाज, अपने इलाके को दिखाना चाहता है कि देखो उसके क्या ठाठ-बांट है। उसकी सुरक्षा में कितने जवान लगे हैं। उसके काफिले में कितनी गाड़ियां हैं। भले ही उसके काम ढाक के तीन पात ही क्यों न हो? भले ही मंत्रिमंडल में रहने के बावजूद उसकी बातों को अनसुना ही क्यों न कर दिया जाता हो।
जरा देखिये न। यही कांग्रेस के लोग विधानसभा चुनाव के पूर्व आम जनता से क्या वायदे किये थे। गैस सिलिण्डर कितने में देने का वायदा किया था। आज इनके शासन के दो साल पूरे होने जा रहे हैं। उनका यह वायदा हवा में तैर रहा है। इसके लिए ये कोई काम नहीं कर रहे। लेकिन अपनी सुरक्षा के लिए इन्हें गाड़ियों की संख्या बढ़ानी है। ये भी नहीं सोचा कि जब ये बात सोशल मीडिया के हाथ लगेगी तो क्या परिणाम आयेगा।
एक राज्यसभा की सीट तो जीतवा नहीं पाये और इन्हें अपनी सुरक्षा के लिए तीन गाड़ियां होने के बावजूद, एक और गाड़ी चाहिए और पुलिस विभाग भी एक तरह से ठीक ही किया कि इनकी एक गाड़ी और कम कर दी। कह दिया कि जो तीन गाड़ी है, उनमें से एक को लौटा दीजिये। बेचारे मंत्री जी को बर्दाश्त नहीं हुआ। उन्होंने डीजीपी को चिट्ठी लिख दी कि न तो उन्हें जवान चाहिए और न ही गाड़ियां। कमाल के ये मंत्री है और कमाल के है ये कांग्रेसी नेता।
