निरसा विधायक ने ढुलू के बेटे को कोयला चोर क्या कह दिया, ढुलू ने अरुप चटर्जी को कैरेक्टरलेस, टकला, कमीशनखोर, पगला, कछुआ छाप, लप्पड़-थप्पड़ खानेवाला और पत्रकारों को टुटपूंजिया बोलकर सम्मानित कर दिया
धनबाद में दो नेताओं के बीच वाक् युद्ध चल रहा है। इस वाक् युद्ध में कौन जीतेगा या कौन हारेगा? हम कह नहीं सकते। लेकिन इतना तो तय है कि अपनी-अपनी नेतागिरी चमकाने में दोनों नेताओं ने मर्यादा का इस प्रकार से हनन किया है कि मर्यादा भी शर्मा जाये। इन दोनों नेताओं में एक भाकपा माले से जुड़ा है तो दूसरा भारतीय जनता पार्टी से। एक समय था, जब ये दोनों पार्टियां वाकपटुता, विचारों की मर्यादा, विचारों के आदान-प्रदान के लिए जानी जाती थी। लेकिन आज ये दोनों पार्टियां मर्यादा के घोर पतन की गवाह बनकर, जनता की नजरों में कब की गिर चुकी है। शायद उन्हें पता नहीं।
सारी दुनिया जानती है कि धनबाद में अवैध खनन जमाने से चल रहा है। धनबाद में पत्रकारिता और राजनीति दोनों में अवैध खनन का जलवा दिखता है। बहुत कम ही पत्रकार है जो इस काली कोठरी में भी यहां से बेदाग निकले हैं, उसी प्रकार बहुत कम ही नेता यहां पर हुए, जिन्हें ये काजल की कोठरी छू नहीं सकी। लेकिन ज्यादातर ऐसे ही अब नेता/पत्रकार यहां दिख रहे हैं, जो अवैध खनन से प्राप्त होनेवाले कमीशन के बिना जी नहीं सकते। जब से यू-ट्यूबर्स का जमाना आया है, तब तो इसमें काली कमाई में हाथ धोनेवालों की एक तरह से बाढ़ सी आ गई है।
इसलिए अगर धनबाद का दंबग भाजपा सांसद ढुलू पत्रकारों के लिए अगर टुटपूंजिया शब्द का प्रयोग करता है, तो गलत नहीं कहता। जैसा कि उसने कल ही भरी प्रेस कांफ्रेस में पत्रकारों के सामने पत्रकार टूटपूंजिया होता है, कह डाला और वहां बैठा पत्रकारों का समूह उसका प्रतिकार नहीं कर सका। करेगा भी कैसे, प्रतिकार करने के लिए भी गैरत होने चाहिए। वहां बैठे पत्रकारों में किसके पास गैरत था। सभी तो ढुलू के कृपा पात्र ही थे और अगर कृपा पात्र नहीं भी थे, तो किस अखबार को ढुलू की कृपा नहीं चाहिए। अरे भाई, पन्द्रह अगस्त व छब्बीस जनवरी या किसी विशेष आयोजन पर जनाब से फुल जैकेट विज्ञापन लेना है कि नहीं।
अब बात करते हैं कि विचारों की शून्यता और मर्यादा हनन की। कुछ दिन पहले भाकपा माले के निरसा विधायक अरुप चटर्जी ने ढुलू महतो को रंगदार और कोयला चोर कह दिया। साथ ही यह भी कह डाला कि ज्यादातर मां-बाप अपने बेटे को आईएएस/आईपीएस बनाने पर जोर डालते हैं। लेकिन ढुलू महतो ने अपने बेटे को कोयला चोर बना दिया।
फिर क्या था। किसी के बेटे को आप कोयला चोर कहेंगे तो चाहे वो कोयला चोर हो या नहीं हो। वो तो आग बबूला होगा ही और जब बात दबंग ढुलू की हो तो वो तो सूद समेत इज्जत लूटेगा। क्योंकि वो इसी के लिए जाने जाते हैं। ढुलू महतो ने खूब जमकर निरसा विधायक अरुप चटर्जी की इज्जत उतार ली। अरुप चटर्जी को टकला, कछुआ छाप, कमीशनखोर, कैरेक्टरहीन, लप्पड़-थप्पड़ खानेवाला, पगला और पता नहीं क्या-क्या कह डाला।
ढुलू का बयान पूरे जोर-शोर से यू-ट्यूबर्स फैला रहे हैं और लोग उसे देख भी रहे हैं। क्योंकि आज कल की जनता इसी प्रकार की चीजें देखना पसंद करती है। यू-ट्यूबर्स भी खुश है, क्योंकि उनके व्यूअर्स बढ़ रहे हैं। ढुलू महतो ने प्रेस कांफ्रेस में कहा कि निरसा का माले विधायक टकला है, कछुआ छाप है। वो दायरे में रहे, दायरे से बाहर न जाये।
ढुलू ने कहा कि कोई विधायक रहते लप्पड़-थप्पड़ खाया है, वो दस बार पिटाया है। कछुआ छाप अरुप चटर्जी का जो अरबों-खरबों की सम्पति हैं, उसकी जांच होनी चाहिए, हमारे पास जो करोड़ों की सम्पति हैं, वो हमारे बाप-दादा की है, ढुलू के बाप-दादा के पास बीस एकड़ जमीन थी, उसके बाप-दादा के पास क्या था, फिर बोलेंगे तो कहेगा कि बोलता है, पुरुलिया से उसका बाप फटा कपड़ा पहनकर आया था, वो क्या लेकर आया था कि अरबों का मालिक बन गया।
ढुलू ने कहा कि जमुनिया में अवैध माइनिंग हो रहा है, निरसा में बालू, कोयला चोरी, लॉटरी का धंधा चरम सीमा पर है, अगर उस टकला में दम हैं, तो धरना देकर बंद कराए, उसमें हम भी साथ देंगे। राज्यसभा के दो-दो, तीन-तीन चुनाव में दस-दस करोड़ बीस-बीस करोड़ रुपये लिया। एमपीएल में कब्जा कर लिया, कोयला चोरी से। उससे बड़ा चोर इस धरती पर कोई है ही नहीं। पत्रकारों को इंगित करते हुए ढुलू ने कहा कि उस टकला को समझा दीजिये। वो विकास में बाधक नहीं बने। नहीं तो 2029 में जो भी उस कछुए के सिर पर बाल है, उसे साफ कर देंगे। ढुलू मेहनत करके आगे बढ़ा है, अरुप चटर्जी चोरी करके आगे बढ़ा है। वो जिसके घर में पला, उसको मार रहा है। दिमाग लगाते-लगाते उसके माथे का बाल उड़ गया। एगो बाल नहीं बचा है। गुस्सा से उसका बाल उड़ गया। ढुलू का बाल घना होता जा रहा है।
ढुलू ने कहा कि अरुप दायरे में रहे, दायरे से बाहर न जाये। एक बार वो रेड लाइट में भी पकड़ाया था, अगर ये बात गलत होगा तो राजनीति छोड़ देंगे। वो इतना कैरेक्टरहीन है। इसके पिता भी विधायक थे, ये भी विधायक है, बताये कि ये निरसा के लिए क्या किया? वो जाहिल है। टकला पगला गया है। आश्चर्य यह भी है कि जहां भाजपा के दबंग सांसद ढुलू प्रेस कांफ्रेस कर रहे थे। उनके आस-पास एक भी व्यक्ति ऐसा नहीं था, जो यह ढुलू को कहें कि सांसद महोदय जिस प्रकार की भाषा का प्रयोग आप कर रहे हैं, वो भाषा भाजपा के सांसद, विधायक या कार्यकर्ता प्रयोग में नहीं लाते। आप अपनी भाषा को संयंमित और मर्यादित रखें।
