पारा शिक्षकों और पत्रकारों पर हुए जुल्म के खिलाफ वामदलों ने राज्यपाल से गुहार लगाई

वामदलों के नेताओं का संयुक्त प्रतिनिधिमंडल आज राजभवन जाकर राज्यपाल द्रौपदी मुर्मू से मिला तथा एक मांगपत्र सौंपा। वाम नेताओं का कहना था कि झारखण्ड स्थापना दिवस के दिन मोराबादी मैदान में अपनी मांगों को लेकर आंदोलनरत पारा शिक्षकों पर पुलिसिया दमन और पत्रकारों पर हुए हमले के खिलाफ वामदलों ने राज्यव्यापी प्रतिवाद कर उनकी मांगों को हल करने की मांग की है।

वामदलों के नेताओं का संयुक्त प्रतिनिधिमंडल आज राजभवन जाकर राज्यपाल द्रौपदी मुर्मू से मिला तथा एक मांगपत्र सौंपा। वाम नेताओं का कहना था कि झारखण्ड स्थापना दिवस के दिन मोराबादी मैदान में अपनी मांगों को लेकर आंदोलनरत पारा शिक्षकों पर पुलिसिया दमन और पत्रकारों पर हुए हमले के खिलाफ वामदलों ने राज्यव्यापी प्रतिवाद कर उनकी मांगों को हल करने की मांग की है।

राज्य सरकार उनकी मांगों को हल करने के बदले अड़ियल रवैया अपनाये हुए है, यह न राज्य हित में है, और न जनहित में, इसलिए गुजारिश है कि राज्य में आंदोलनरत तबकों की मांगों का सकारात्मक हल करते हुए जनता के विकास की गारंटी की जाये। वामदलों के प्रतिनिधिमंडल में भाकपा माले के राज्य सचिव जनार्दन प्रसाद और भुवनेश्वर केवट, माकपा के राज्य सचिव गोपीकांत बख्शी और प्रकाश विप्लव, भाकपा के पूर्व राज्य सचिव के डी सिंह और अजय सिंह, मासस के मिथिलेश सिंह तथा एआइपीएफ के वशीर अहमद शामिल थे।

वामदलों द्वारा प्रस्तुत मांग पत्र पर राज्यपाल द्रौपदी मुर्मू ने हल करने के लिए राज्य सरकार से बातचीत कर अविलम्ब हस्तक्षेप करने का आश्वासन दिया। वामदलों की प्रमुख मांगे इस प्रकार थी। आंदोलनरत पारा शिक्षकों पर हमले के दोषी पुलिस अधिकारियों पर कार्रवाई की जाये, गिरफ्तार पारा शिक्षकों को रिहा करते हुए, पारा शिक्षकों को स्थाय़ी करने समेत उनकी तमाम मांगों को पूरा करने बावत उनके साथ वार्ता की जाये।

15 नवम्बर को मोराबादी में समाचार संकलन कर रहे पत्रकारों-छायाकारों पर हमले के दोषियों को गिरफ्तार करते हुए लोकंतत्र के इस चौथे स्तम्भ के लोकतांत्रिक अधिकारों की रक्षा व उनकी सुरक्षा की गारंटी की जाये। मिड डे मील की रसोइया पर दमन बंद करते हुए उनके मानदेय अविलम्ब बढ़ाते हुए उनकी सामाजिक सुरक्षा व सम्मानपूर्वक काम की गारंटी की जाये।

पंचायती राज के अधिकारों को बहाल करते हुए सरकार के द्वारा समानान्तर ग्राम विकास, आदिवासी विकास जैसे कागजी संगठनों को खत्म कर, पाचंवी अनुसूची के अधिकारों की रक्षा की जाये। आंदोलनरत पंचायत प्रतिनिधियों, रोजगार सेवकों की मांगों को अविलम्ब हल किया जाये।

Krishna Bihari Mishra

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