नेता वहीं जो चुनौतियों का सामना करें, जो चुनौतियों को देख पलायन कर जाये, वह नेता नहीं हो सकता

माफ करियेगा राहुल गांधी जी, हमें नहीं लगता कि आप इन्दिरा गांधी जैसी महान जीवट महिला नेतृ के परिवार से आते हैं, क्योंकि आपने जिस प्रकार चुनाव, भाजपा और विभिन्न संवैधानिक संस्थाओं पर चोट करते हुए अपनी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष पद से इस्तीफा दिया, वह यहीं कह रहा है। पूर्व प्रधानमंत्री श्रीमती इन्दिरा गांधी ने अनेक झंझावातों को सहा पर उन्होंने कभी भी संवैधानिक संस्थाओं पर न तो अंगुलियां उठाई और न ही अपने विरोधियों से हार मानी,

माफ करियेगा राहुल गांधी जी, हमें नहीं लगता कि आप इन्दिरा गांधी जैसी महान जीवट महिला नेतृ के परिवार से आते हैं, क्योंकि आपने जिस प्रकार चुनाव, भाजपा और विभिन्न संवैधानिक संस्थाओं पर चोट करते हुए अपनी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष पद से इस्तीफा दिया, वह यहीं कह रहा है। पूर्व प्रधानमंत्री श्रीमती इन्दिरा गांधी ने अनेक झंझावातों को सहा पर उन्होंने कभी भी संवैधानिक संस्थाओं पर न तो अंगुलियां उठाई और न ही अपने विरोधियों से हार मानी, उन्होंने हर चुनौतियों का सामना किया, और जीत हासिल की।

यहीं कारण रहा कि 1977 में भारी असफलता हाथ लगने के बावजूद, इंदिरा जी ने अपनी करिश्माओं से जनता पार्टी को 1980 की मध्यावधि चुनाव में धूल चटा दी, यहीं नहीं 1984 में जब उनकी हत्या हुई और उसके बाद जिस प्रकार से भारत की जनता ने इंदिराजी के सम्मानस्वरुप आपके पिता राजीव गांधी को अप्रत्याशित सीटें उपलब्ध करा दी, वो बताता है कि भारत की जनता इन्दिराजी से कितना प्यार करती थी, और कितना प्यार करती है।

जीत-हार से अगर कोई नेता प्रभावित हो जाये, तो मैं उसे नेता ही नहीं मानता, नेता तो वहीं है, जो हर मुसीबतों में मुस्कुराता रहे और अपने लोगों का मनोबल बढ़ाता हुआ, फिर से नये लक्ष्य की ओर बढ़ना शुरु कर दें, पर आपने तो भाजपा और नरेन्द्र मोदी के आगे हार मानते हुए, हथियार डाल दिये। अब आप कितना भी कहें कि आपने भाजपा और नरेन्द्र मोदी के चलते इस्तीफा नहीं दिया, पर लोग व राजनैतिक पंडित यहीं कहेंगे कि लोकसभा चुनाव 2019 ने राहुल गांधी के मन-मस्तिष्क को ऐसा प्रभावित किया, कि उन्होंने कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष पद से खुद को अलग ही कर लिया।

यह आपकी मनोवैज्ञानिक रुप से बड़ी हार हैं और नरेन्द्र मोदी की बहुत बड़ी जीत। हमें लगता है कि नरेन्द्र मोदी को 23 मई को उतना आनन्द नहीं आया होगा, जितना आनन्द आपके इस्तीफे देने के बाद आज हुई होगी, वो जो कांग्रेस मुक्त भारत का सपना देखते हैं, आज उसकी नींव पड़ गई।

आपने जिस प्रकार अपने प्रपत्र में चुनाव आयोग, प्रेस, न्यायपालिका को लेकर सवाल खड़े किये, वो आपके पलायन से उन समस्याओं का हल हो जायेगा क्या? अगर आपको लगता है कि देश के संस्थानों पर कब्जा करने का आरएसएस का सपना अब पूरा हो चुका है, देश का लोकतंत्र अब कमजोर हो रहा हैं, इससे देश को खतरा उत्पन्न हो रहा हैं, तो आपको उन खतरों से बचाने के लिए कौन रोक रहा हैं? आप स्वेच्छा से इस्तीफा देकर जाये, उसकी बात अलग है, पर दोषारोपण कर जायेंगे, तो इसका मैसेज भी गलत ही जायेगा।

आप याद रखिये, लोकतंत्र में किसी भी दल या नेता का शासन सदा के लिए जनता ने निबंधित नहीं किया, जनता अपने स्वभावानुसार निर्णय लेती रहती है, वो नेताओं और विभिन्न दलों के काम-काज को देखकर निर्णय करती है, आप स्वीकार करें कि आप के लोगों ने आपके छवि को सही ढंग से जनता के सामने पेश नहीं किया और न ही आपने स्वयं को जनता के बीच सही ढंग से रखने की कोशिश की, जनता को लगा कि राहुल गांधी से बेहतर नरेन्द्र मोदी हो सकते हैं, चुन लिया। कल जनता को लगेगा कि नरेन्द्र मोदी से बेहतर राहुल गांधी हैं, तो भला आपको कौन प्रधानमंत्री बनने से रोक सकता है?

शायद आपको नहीं पता कि इसी देश में मात्र 13 दिन के शासनकाल में पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी को उनके प्रतिद्वंदियों ने सत्ता से बाहर करने पर मजबूर कर दिया, पर अटल बिहारी वाजपेयी के उस दौरान संसद में दिये गये ऐतिहासिक भाषण ने आम जनता पर इतना बड़ा असर छोड़ा कि उनका गठबंधन लगातार तीन बार सत्ता में आया और जैसे ही 2004 में जनता को लगा कि प्रधानमंत्री के रुप में अटल बिहारी वाजपेयी ठीक साबित नहीं हो रहे, जनता ने उन्हें बाहर का रास्ता दिखा दिया, और आपकी पार्टी उसके बाद लगातार 2014 तक सत्ता में रही और भाजपा या अन्य संगठनों ने कभी आप या कभी आपकी पार्टी या संवैधानिक संस्थाओं पर अंगूलियां नहीं उठाई।

अगर कांग्रेस जैसी पार्टी का एक बड़ा नेता, संवैधानिक संस्थाओं पर अंगूलियां उठाता हैं तो उसके दुष्परिणाम देश को भुगतने पड़ सकते हैं, एक बहुत बड़ा संकट लोगों के पास उपस्थित हो सकता है, इसे समझने की जरुरत है, आप कहेंगे कि आपने इस्तीफा दिया, पर लोग यहीं कहेंगे कि पीएम नरेन्द्र मोदी ने ऐसी हालत कर दी कि राहुल गांधी के पास इस्तीफा देने के सिवा कोई विकल्प ही नहीं था, इसलिए वक्त को समझिये, वक्त के नजाकत को समझिये, थोड़ा चिन्तन करिये, पार्टी को संभालिये, और खुद को संभालिये, जनता पर विश्वास करना सीखिये।

जो लोग संवैधानिक संस्थाओं में हैं, उन पर भी विश्वास कीजिये, ये भी किसी के नहीं होते, वक्त के गुलाम होते हैं, जैसे ही वक्त आपका आयेगा, आप अपने मन की करेंगे, पर फिलहाल तो आप खुद को संभालिये, इससे ज्यादा मैं कुछ नहीं कह सकता, क्योंकि आपके पार्टी छोड़ने के बाद तो कांग्रेस सचमुच सदा के लिए समाप्त हो जायेगी, क्योंकि कांग्रेस बिना आपके परिवार के सहयोग के एक कदम चल नहीं सकती, क्योंकि ये कांग्रेस है, और वर्तमान में आपको छोड़कर, कांग्रेस में कोई ऐसा नेता नहीं, जो कांग्रेस को शीर्ष पर पहुंचा सकें, अगर फेंकने की बात हैं तो उसकी बात ही अलग है।

Krishna Bihari Mishra

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