CM रघुवर के आगे-पीछे करनेवाले कनफूंकवों व IAS/IPS के चेहरे से अभी से ही खुशियां गायब

कहा जाता है कि जब नाव डूब रहा होता है, तो सबसे पहले उस नाव पर सवार चूहे भाग खड़े होते हैं और जो बचते हैं, उनमें जो सफल तैराक होता हैं, वह बच निकलता हैं, और जो तैराकी नहीं जानते, उनकी क्या दशा होती हैं, जिन्होंने किसी नाव को डूबते हुए देखा हैं, उन्हें अच्छी तरह पता हैं, अब सवाल हैं कि क्या सीएम रघुवर दास की राजनीतिक नैया भी इस विधानसभा चुनाव रुपी नदीं के बीच मझधार में डूबने की स्थिति में हैं?

कहा जाता है कि जब नाव डूब रहा होता है, तो सबसे पहले उस नाव पर सवार चूहे भाग खड़े होते हैं और जो बचते हैं, उनमें जो सफल तैराक होता हैं, वह बच निकलता हैं, और जो तैराकी नहीं जानते, उनकी क्या दशा होती हैं, जिन्होंने किसी नाव को डूबते हुए देखा हैं, उन्हें अच्छी तरह पता हैं, अब सवाल हैं कि क्या सीएम रघुवर दास की राजनीतिक नैया भी इस विधानसभा चुनाव रुपी नदीं के बीच मझधार में डूबने की स्थिति में हैं?

राजनीतिक पंडित बताते है कि जब से झारखण्ड विधानसभा चुनाव की घोषणा हुई हैं, और जिस प्रकार से सोशल साइट में झारखण्ड के क्रुद्ध युवाओं का उद्गार भाजपा और सीएम रघुवर दास के सोशल साइट पर आने शुरु हुए हैं, यहीं नहीं जिस प्रकार भाजपा कार्यकर्ताओं का गुस्सा भी अब धीरे-धीरे मुख्यमंत्री रघुवर दास के खिलाफ फूट रहा हैं, उससे सीएम रघुवर के आगे-पीछे करनेवाले कनफूंकवों व आइएएस-आइपीएस लोगों के चेहरे से खुशियां गायब हैं।

राजनीतिक पंडित कहते है कि इन लोगों ने सीएम रघुवर के शासनकाल में खुब सत्तासुख का उपभोग किया, हाथी उड़ाएं, सीएम रघुवर को अपने ग्रिप में लेकर वह हर प्रकार का काम करवाया, जिससे सीएम रघुवर की बची-खुची इमेज जो थी, वह भी विधानसभा चुनाव की अधिसूचना जारी होते-होते सदा के लिए समाप्त हो गई।

राजनीतिक पंडित बताते है कि सीएम रघुवर दास के जन-आशीर्वाद यात्रा में जिस प्रकार से भीड़ जुटाने के लिए स्थानीय प्रशासन का सहयोग लिया गया, लोगों को सपने दिखाये गये, जब लोगों ने देखा कि उन्हें धोखा देकर, सपना दिखाकर भीड़ का हिस्सा बनाया गया, उन्होंने उसी समय वर्तमान सरकार को सबक सिखाने का प्रण कर लिया, और आज भी वैसे लोगों का गुस्सा कम नहीं हुआ हैं।

राजनीतिक पंडितों की मानें, जो लोग कहा करते थे कि सीएम रघुवर दास की सभा में भारी भीड़ इकट्ठी हो रही हैं, वे बताएं कि वह भीड़ अब कहां हैं, और किस स्थिति में हैं, कल तक जो उनके सोशल साइट पर जो थोड़ा-बहुत भी उनकी जय-जयकार हुआ करती थी, उसमें भारी गिरावट क्यों हैं, पर इसका जवाब किसी के पास नहीं हैं।

राजनीतिक पंडितों का यह भी कहना है कि जिस प्रकार झारखण्ड विधानसभा के नये भवन के उद्घाटन के समय राज्य के भारतीय प्रशासनिक सेवा में कार्यरत अधिकारियों का समूह जिस प्रकार से सीएम रघुवर दास को ट्विटर और फेसबुक के माध्यम से कैरेक्टर सर्टिफिकेट देने का काम किया, आज भी वे सीएम रघुवर दास के प्रति सेवा भाव नहीं रखेंगे, इस पर आम जनता कैसे विश्वास कर लें? भारत निर्वाचन आयोग को तो जनता को यह विश्वास दिलाना ही होगा, कि वे निर्भय रहें, उनके मताधिकार को कोई चुनौती नहीं देगा?

राजनीतिक पंडितों का कहना है कि जो आइएएस या आइपीएस पांच वर्षों तक सीएम रघुवर दास के प्रति कृतज्ञता ज्ञापित करते रहे हैं, वे विधानसभा चुनाव में उनके प्रति कृतज्ञता ज्ञापित नहीं करेंगे, ये संभव नहीं। उनका यह भी कहना है कि वे इसलिए भी करेंगे ताकि पुनः उनकी ही चले, इसके लिए सीएम रघुवर को सत्ता में लाने की कोशिश में वे जी-जान से जुटेंगे, पर जानकार बताते है कि जिस प्रकार से जनता और युवा की नाराजगी झलक रही हैं, उसमें ये कामयाब  होंगे ही, इसकी संभावना दूर- दूर तक नजर नहीं आ रही।

इसलिए वर्तमान में सीएम रघुवर दास के आगे-पीछे करनेवाले कनफूंकवों और उन आइएएस-आइपीएस लोगों को चेहरे लटके नजर आ रहे हैं, जो झारखण्ड की वर्तमान राजनीतिक स्थिति का अनुमान लगा चुके हैं, इधर झामुमो-कांग्रेस-राजद व वामदल के नेता इस बात को लेकर प्रसन्न हैं कि झारखण्ड की जनता को जो झारखण्ड के बारे में निर्णय लेना था, वह अब ले चुकी हैं, बस चुनाव की औपचारिकता बाकी हैं, आनेवाले समय में जनता के सपनों का झारखण्ड बनेगा, जिसमें न तो कनफूकंवों की चलेगी, और न उन आइएएस-आइपीएस की चलेगी, जिन्होंने वर्तमान में गड़बड़ियां की हैं। झामुमो तो साफ कह रहा हैं कि ऐसे लोग जनता का कोपभाजन बनने के लिए तैयार रहे।

Krishna Bihari Mishra

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