दशम फॉल मामलाः पहले जब आपके साथ कोई आपराधिक घटनाएं घटे, तो उसका जमकर ढोल पीटिये, वीडियो बनाकर वायरल करिये, झारखण्ड के इज्जत का धुआं-धुआं कर दीजिये और जब पुलिस FIR दर्ज करने को बोले तो पलट जाइये
रांची पुलिस ने जो कल रात दशम फॉल प्रकरण पर जो प्रेस विज्ञप्ति जारी की है। वो किसी भी संभ्रांत नागरिक को सोचने पर मजबूर कर रहा है। साथ ही कई प्रश्न भी लोगों के दिमाग में उठ रहे हैं, कि आखिर यह राज्य जा किधर रहा है, लोगों की सोच को क्या हो गया है। सभी एक दूसरे को यूज करने की क्यों सोच रहे हैं और खुद को सर्वाधिक चालाक होने का घमंड क्यों पाल रखा है? अगर यही सब होता रहा तो हौसले किसके बुलंद होंगे… रांची पुलिस द्वारा जारी प्रेस विज्ञप्ति के बाद लोगों के मन में ये सारे प्रश्न उमड़-घुमड़ रहे हैं, आखिर इन प्रश्नों का जवाब कौन देगा? प्रश्न इस प्रकार है…
- जब महिलाओं को प्राथमिकी ही नहीं करनी थी, उन लड़कों में उन्हें मासूमियत नजर आ रही थी, उनका भविष्य चौपट न हो, इसका ख्याल आ रहा था तो फिर उन महिलाओं ने ये वीडियो क्यों बनाया और उसे वायरल क्यों किया?
- प्रेस विज्ञप्ति में साफ लिखा है कि स्थानीय पुलिस ने महिलाओं से बार-बार अनुरोध किया कि वो प्राथमिकी दर्ज कराये और महिला का ये कहना कि उन्हें प्राथमिकी दर्ज कराने के लिए बाध्य नहीं किया जा सकता तो फिर सवाल उठता है कि आखिर रांची पुलिस और मामलों में किसी पीड़ित को बार-बार अनुरोध क्यों नहीं करती कि वो प्राथमिकी दर्ज कराये, स्थानीय पुलिस उसके साथ है। यहां तो कई प्रमाण है कि कई थाने के थाना प्रभारी ऐसे हैं जो बेवजह किसी के इशारे पर झूठी प्राथमिकी तक दर्ज करा लेते हैं और सवाल महिलाओं से आपको ये मालूम है कि कोई भी पुलिस आपको प्राथमिकी दर्ज कराने के लिए बाध्य नहीं कर सकती तो फिर आपने ये वीडियो क्यों वायरल किया?
- जब महिलाओं को अपने कैरियर और पीड़ित के कैरियर का इतना ही ख्याल था, तो फिर सवाल उनके द्वारा वायरल वीडियो से उनका कैरियर तबाह नहीं होगा या उनका जमीर उन्हें नहीं ललकारेगा कि जब गलत करनेवालों के खिलाफ कार्रवाई करने की बात आई तो वे सीधे मुकर गई, क्या इससे अपराध करनेवालों का मनोबल नहीं बढ़ेगा?
- इस प्रकरण पर नेता प्रतिपक्ष बाबूलाल मरांडी का भी बयान आया और उन्होंने अपने फेसबुक पर लिखा कि रांची के दशम फॉल क्षेत्र से लेकर हाईवे तक महिलाओं की गाड़ी का कई किलोमीटर तक पीछा कर उनके साथ बदसलूकी किए जाने की घटना बेहद भयावह और चिंताजनक है। सबसे गंभीर बात यह है कि महिलाओं द्वारा सूचना दिए जाने के बावजूद समय पर पुलिस सहायता के लिए नहीं पहुंची। मुख्यमंत्री हेमन्त सोरेन दिल्ली में निवेशकों को आमंत्रित करने में व्यस्त हैं, लेकिन सवाल यह है कि ऐसी कानून-व्यवस्था पर कोई निवेशक कैसे भरोसा करेगा? जिस राज्य में पुलिस वाहन से खींचकर युवक की हत्या कर दी जाए और महिलाओं की सुरक्षा भी सुनिश्चित न हो, वहां सुरक्षा का संदेश कैसे जाएगा? राज्य सरकार पर्यटन को बढ़ावा देने के बड़े-बड़े दावे करती है, लेकिन पर्यटन सीजन और मॉनसून के दौरान प्रमुख पर्यटन स्थलों पर भी पर्याप्त सुरक्षा व्यवस्था नहीं है। यह स्थिति पर्यटकों और स्थानीय लोगों, दोनों के लिए चिंता का विषय है।
- इसी प्रकार इस घटना से दुखी कई पत्रकारों व संभ्रांत नागरिकों ने रांची पुलिस और यहां की सरकार को जमकर कोसा और राज्य में चौपट होती विधि-व्यवस्था की दुहाई दी। कई राष्ट्रीय चैनल तो इस समाचार को लेकर झारखण्ड की ऐसी-तैसी कर दी। अब सवाल उठता है कि आप जो चाहे वो कर दे। झारखण्ड के सम्मान से खेल जाये। आपके लिए आम जनता आक्रोशित हो जाये और आप एक प्राथमिकी तक दर्ज न कराएं और पुलिस को ये कहे कि अपराधियों की उम्र कम है, इससे उनका भविष्य चौपट हो जायेगा, क्या 18 और 19 की उम्र कम है? अपराधियों पर इतनी दया और वीडियो बनाने वक्त दया नहीं आई, वीडियो वायरल करते दया नहीं आई, उनके कैरियर का ख्याल नहीं आया? मतलब आपने झारखण्ड की जनता को क्या समझ लिया कि आप जैसे पाये, वैसे उन्हें यूज कर लेंगी।
और अब आइये रांची पुलिस की प्रेस विज्ञप्ति पर नजर डालते हैं, कि कैसे इतने बड़े प्रकरण का पटाक्षेप हो गया और उसमें रांची पुलिस, महिलाओं और अपराध को अंजाम देनेवालों की क्या भूमिका रही और कैसे झारखण्ड के इज्जत को धुआं-धुआं कर दिया गया। कौन इसके लिए दोषी है? यह सवाल मैं आप पर छोड़ता हूं। सोचिये, चिन्तन करते रहिये। रांची पुलिस द्वारा जारी प्रेस विज्ञप्ति इस प्रकार है…
“दिनांक सात जुलाई को करीब 12.39 बजे डायल 112 के माध्यम से सूचना प्राप्त हुई कि रांची टाटा एनएच 33 रोड पर काले रंग के स्कार्पियों गाड़ी से एक डिजायर गाड़ी का पीछा किया जा रहा है। इस संबंध में थाना की गश्ती दल एवं मोटरसाइकिल दस्ता द्वारा शिकायतकर्ता के मोबाइल नं 9334007919 पर संपर्क करते हुए सूचना प्राप्ति के छः मिनट के अंदर मोटरसाइकिल दस्ता एवं दस मिनट के अंदर गश्ती दल एवं थाना प्रभारी दशम फॉल घटना स्थल पर पहुंच कर घटना के संबंध में जानकारी लिया गया तो डिजायर वाहन में बैठे हुए चालक रणवीर द्वारा बताया गया कि बुण्डू सूर्य मंदिर से निकलने के दौरान मेरी गाड़ी काले रंग के स्कार्पियों से सट गयी थी, जिस कारण वहां हल्का वाद विवाद हुआ था।

उसके पश्चात मैं वहां से अपनी गाड़ी को लेकर निकल गया। मेरी गाड़ी में सुमन प्रसाद, नीलू और प्रीति सभी जमशेदपुर के रहनेवाले बैठे हुए थे, फिर दशम फॉल थाना अंतर्गत तैमारा मोड़ के पास स्कार्पियो वाहन द्वारा हमारे गाड़ी को पीछा करते हुए साइड रुकवाकर मेरे गाड़ी का आगे का शीशा एवं आगे के दरवाजा का शीशा तोड़ दिया गया।
उक्त घटना में पीड़ित को मोटरसाइकिल दस्ता, गश्ती दल एवं थाना प्रभारी दशम फॉल के साथ दशम फॉल थाना लाया गया। उक्त घटना में स्कॉर्पियो वाहन चला रहे चालक राजकुमार महतो उम्र 19 वर्ष, पिता गुनोधर महतो और जोएब रजा, उम्र 18 वर्ष, पिता -अफताब आलम खान, दोनों का पता -आदर्शनगर, कुम्हार टोली, थाना- बुण्डू, जिला – रांची को थाना बुलाया गया एवं घटना के संबंध में पूछताछ की गई।
प्रारंभिक जांच के दौरान दोनों पक्षों द्वारा अपनी-अपनी बात रखी गई तथा आपसी सहमति से लिखित समझौता पत्र प्रस्तुत किया गया एवं बताया गया कि प्रथम पक्ष (महिला पक्ष) द्वारा किसी प्रकार का कोई कानूनी कार्रवाई नहीं करना चाहते हैं। प्रथम पक्ष (महिला पक्ष) से प्राथमिकी दर्ज कराने हेतु लिखित आवेदन देने हेतु दशम फॉल थाना प्रभारी एवं अन्य थाना पदाधिकारी द्वारा बार-बार अनुरोध किया गया।
लेकिन महिला पक्ष द्वारा बताया गया कि उक्त लड़के सभी कम उम्र के हैं। जिसके विरुद्ध हम किसी प्रकार का कोई कानूनी कार्रवाई नहीं करना चाहते हैं, क्योंकि इनका भविष्य खराब हो जायेगा एवं महिला द्वारा बताया गया कि मैं एक प्रतिष्ठित आर्टिस्ट हूं। इस तरह के काम से मेरा भी नाम खराब हो जायेगा एवं महिला पक्ष द्वारा कहा गया कि प्राथमिकी दर्ज कराने के लिए हमें बाध्य नहीं किया जा सकता है।
यह स्पष्ट किया जाता है कि घटना से संबंधित जो विडियो सोशल मीडिया में वायरल हो रहा है। उस समय प्रथम पक्ष द्वारा पुलिस को कार्रवाई करने हेतु लिखित आवेदन नहीं दिया गया तथा दोनों पक्ष आपस में समझौता कर मामले का निपटारा किया गया। रांची पुलिस किसी भी प्रकरण में निष्पक्ष एवं विधि सम्मत कार्रवाई के लिए प्रतिबद्ध है।”
