आरा हेड पोस्ट ऑफिस ने अपनी गलती स्वीकारी, एक महीने के बाद कैंसर पीड़ित महिला को डाक डिलीवर करनेवाली डाकिया हुई निलंबित
आखिरकार आरा हेड पोस्ट ऑफिस ने अपनी गलती स्वीकार ही ली और एक महीने के बाद कैंसर पीड़ित महिला को स्पीड पोस्ट डाक डिलीवर करनेवाली डाकिया को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर ही दिया। ज्ञातव्य है कि विद्रोही24 ने इस संबंध में गत मंगलवार यानी 22 सितम्बर को समाचार प्रकाशित किया था। जिसका हेडिंग था – ‘शर्मनाकः आरा हेड पोस्ट ऑफिस की बदमाशी, एक कैंसर पीड़ित महिला के स्पीड पोस्ट डाक को एक महीने से भी अधिक दिनों तक दबाए रखा और प्रेषक जवान को बार-बार झूठ बोलता रहा कि डाक की डिलीवरी कर दी गई’।
बताया जा रहा है कि जवान द्वारा जब पीजी पोर्टल पर इस संबंध में शिकायत की गई, तब जाकर डाक विभाग सक्रिय हुआ और इस पूरे मामले की जांच करानी शुरू की। शिकायत मिलते ही आरा डाक डिवीजन के डाक अधीक्षक नीरज कुमार ने जांच के लिए एक कमेटी बनाई और उस कमेटी ने सूक्ष्म तरीके से जांच करना प्रारंभ किया। जांच करने का जिम्मा ग्राहक संतुष्टि सेवा के प्रभारी उमा शंकर को दिया गया।
टीम उस गांव में भी गई, जहां कैंसर पीड़ित महिला रहती है। वहां जाकर सारी छानबीन करने के बाद, रिपोर्ट सम्मिट की गई और उसमें पाया गया कि दोषी वो डाकिया है, जिसने अपने कर्तव्यों का निर्वहण ठीक ढंग से नहीं किया और डाक देने में उसने एक महीने से भी ज्यादा विलम्ब कर दी। यही नहीं, डाक डिलीवरी की गलत सूचना भी उसके द्वारा संप्रेषित कर दी गई। इसके बाद डाकिया के खिलाफ निलंबन की कार्रवाई कर दी गई।
ज्ञातव्य है कि आरा हेड ऑफिस डाकघर में एक महीने से भी अधिक दिनों तक एक जवान की स्पीड पोस्ट पड़ी रही और इधर प्रेषक को झूठी सूचना दे दी कि उसकी डाक संबंधित व्यक्ति को डिलीवर कर दी गई। आश्चर्य यह भी है कि जब प्रेषक ने प्राप्तकर्ता को स्पीड पोस्ट डाक नहीं मिलने पर इंडिया पोस्ट के माध्यम से इसकी शिकायत दर्ज कराई तो तीन दिन के अंदर ही डाक विभाग ने प्रेषक को यह सूचना दे दी कि उसका डाक संबंधित प्राप्तकर्ता को दे दिया गया। जबकि ऐसा हुआ ही नहीं था।
जब प्रेषक ने गत् 22 सितम्बर 2026 को पुनः आरा डाक विभाग से संपर्क किया और इसकी शिकायत दर्ज कराई तो आरा में कार्यरत डाक विभाग के अधिकारियों व कर्मियों ने प्रेषक को सूचना दी कि उसका डाक संबंधित व्यक्ति को 23 सितम्बर को पहुंचा दिया जायेगा। लेकिन जब प्रेषक ने डाक विभाग के अधिकारियों से यह कहा कि स्पीड पोस्ट डाक में राखी और एटीएम है, जो कैंसर पीड़ित महिला के लिए अतिआवश्यक है। एटीएम नहीं उपलब्ध होने के कारण उसे संकट का सामना करना पड़ रहा है। तब जाकर वहां के डाक विभाग के अधिकारियों ने आनन-फानन में संबंधित व्यक्ति तक वो डाक 22 सितम्बर को पहुंचा दिया।
दरअसल यह समस्या, एक जवान और उसकी कैंसर पीड़ित पत्नी से जुड़ी थी। जवान ने 18 अगस्त 2026 को बीएसएफ मेरु कैम्प के पोस्ट आफिस से 18 अगस्त 2026 को करीब 11.55 बजे दोपहर में एक आर्टिकल बुक किया था। इस आर्टिकल में एटीएम कार्ड और दो राखियां थी। जिसे डाक विभाग द्वारा स्पीड पोस्ट ट्रेकिंग में बताया गया कि 21 अगस्त 2026 को अपराह्न 3.31 बजे प्राप्तकर्ता को डिलीवर कर दिया गया। जबकि ऐसा हुआ ही नहीं था।
लेकिन जब 28 अगस्त 2026 को जवान ने अपनी पत्नी से संपर्क किया, तो उसे पता चला कि उसे उसका भेजा हुआ डाक मिला ही नहीं हैं। जवान को यह जानकर झटका लगा। उसने तुरन्त डाक विभाग से संपर्क किया और इसकी शिकायत की कि जो आर्टिकल 18 अगस्त को भेजी थी, वो संबंधित व्यक्ति को क्यों नहीं मिला। जिसका कम्पलेन नं./ रेफरेंस आईडी 2751878030 था। डाक विभाग ने जवान को भरोसा दिया कि इसकी जांच कर, उसे तीन दिन के अंदर बता दिया जायेगा कि इसकी सच्चाई क्या है? इधर तीन दिन के अंदर ही डाक विभाग ने जवान को सूचना दी कि आर्टिकल की डिलीवरी हो चुकी है और डिलीवरी प्राप्त करनेवाली उसकी पत्नी ही है, जो प्राप्तकर्ता है।
पर सच्चाई क्या था कि आरा पोस्ट ऑफिस के डाक अधिकारियों और डाककर्मियों द्वारा जवान से इस संबंध में बार-बार झूठ बोला जा रहा था और डिलीवरी नहीं की गई थी, जब जवान ने 22 सितम्बर को आरा के डाक विभाग के अधिकारियों से संपर्क किया और जो उनसे जानकारी मिली, इससे उसके होश ही उड़ गये। डाक की अब तक डिलीवरी ही नहीं हुई थी। जवान के पिता और जवान ने डाक अधिकारियों को कहा कि वे इसे मजाक में न लें। सवाल एक कैंसर पीड़ित महिला से जुड़ा है। अगर आपने एक महीने से भी अधिक उक्त डाक को दबा कर रखा है, तो इसके लिए आप दोषी है और जितना जल्द हो सकें, उक्त डाक को डिलीवर करें। तब जाकर डाक अधिकारियों को अपनी जिम्मेदारी महसूस हुई और आनन-फानन में स्पीड पोस्ट डाक, जवान की पत्नी को 22 सितम्बर 2026 को एक महीने से भी अधिक दिनों के बाद पहुंचा दिया गया।
