लीजिये भाजपा सांसद निशिकांत दस वर्ष की आयु में ही मैट्रिक पास कर गये, झामुमो ने उठाए सवाल, EC को लिखा पत्र

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झारखण्ड मुक्ति मोर्चा के वरिष्ठ नेता सुप्रियो भट्टाचार्य ने गोड्डा लोकसभा से निर्वाचित भाजपा सांसद निशिकांत दूबे के खिलाफ भारत निर्वाचन आयोग को पत्र लिखा है, जिसमें उन्होंने कहा है कि निशिकांत दूबे द्वारा नामांकन के समय दिये गये शपथ पत्र में जो जानकारियां दी गई है, उसकी जांच होनी चाहिए। सुप्रियो भट्टाचार्य का कहना है कि गोड्डा लोकसभा से लगातार तीन बार के विजयी सांसद निशिकांत दूबे ने नामांकण के समय 2009 में अपना उम्र 37 वर्ष बताया था।

इस नामांकण पत्र में शैक्षणिक योग्यता के तौर पर उन्होंने यह जानकारी दी कि वे मैट्रिक की परीक्षा डीपीएम हाई स्कूल करहरिया से 1982 में पास की, तथा वे स्नात्तकोत्तर है तथा एमबीए दिल्ली विश्वविद्यालय से 1993 में पास किया है। सुप्रियो भट्टाचार्य का साफ कहना है कि जो व्यक्ति 2009 में 37 साल का होगा, वह 1982 में दस वर्ष की आयु में मैट्रिक कैसे पास कर जायेगा?

सुप्रियो भट्टाचार्य ने यह भी कहा कि वर्ष 2009 में 37 वर्ष की उम्रवाले निर्वाचित सांसद अपने कथनानुसार दस वर्ष की आयु में मैट्रिक पास कर जाते है, वही दूसरी ओर दिल्ली विश्वविद्यालय का पत्र संख्या info/OA/1977/2015  दिनांक 29/01/2016 एवं उसके अनुलग्नक डीन फैकल्टी ऑफ मैनेजमेन्ट स्टडी, दिल्ली विश्वविद्यालय का प्रमाण पत्र 05/01/2016 बताता है कि वर्ष 1993 में निशिकांत दूबे नाम का व्यक्ति न तो दाखिला लिया और न ही पास हुआ।

सुप्रियो भट्टाचार्य ने चुनाव आयोग से मांग की कि निशिकांत दूबे के नामांकण पत्र की 2009 से लेकर 2019 तक की गहन जांच होनी चाहिए, तथा इनकी सदस्यता की वैधता पर भी विचार होनी चाहिए, भला दस वर्ष में कोई मैट्रिक कैसे पास कर सकता है, चुनाव आयोग ऐसे गौरवमयी भाजपा सांसद की प्रतिभा से देश को अवगत कराए। सुप्रियो भट्टाचार्य ने इसकी एक प्रति लोकसभाध्यक्ष को भी संप्रेषित की है।

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