लीजिये CM रघुवर दास का एक और वायदा, 2021 में झारखण्ड में लागू हो जायेगा सरना कोड

मुख्यमंत्री रघुवर दास ने एक चुनावी सभा को संबोधित करते हुए कहा कि झारखण्ड में आप सभी ने सरना कोड की मांग की थी, इतनी सरकारें बनीं, लेकिन किसी ने इसे लागू करने की कोशिश तक नहीं की। उन्होंने चुनावी मंच से ऐलान किया कि वे 2021 में झारखण्ड में सरना कोड लागू कर देंगे। ज्ञातव्य है कि सरना धर्म कोड को लेकर आदिवासी समुदाय बराबर संघर्ष करता रहा है।

मुख्यमंत्री रघुवर दास ने एक चुनावी सभा को संबोधित करते हुए कहा कि झारखण्ड में आप सभी ने सरना कोड की मांग की थी, इतनी सरकारें बनीं, लेकिन किसी ने इसे लागू करने की कोशिश तक नहीं की। उन्होंने चुनावी मंच से ऐलान किया कि वे 2021 में झारखण्ड में सरना कोड लागू कर देंगे। ज्ञातव्य है कि सरना धर्म कोड को लेकर आदिवासी समुदाय बराबर संघर्ष करता रहा है।

इस चुनावी सभा में अपनी ही पार्टी की पूर्व की सरकार को वे इसके लिए कोसना भी नहीं भूलें कि पूर्व की सरकारों ने इसे लागू नहीं किया, जबकि इस राज्य में तीन-चार सालों को हटा दिया जाय, तो करीब पन्द्रह-सोलह सालों तक भाजपा गठबंधन की ही सरकार रही, जिसमें ये मंत्री पद पर भी विराजमान रहें, दरअसल मुख्यमंत्री रघुवर दास को लगता है कि राज्य में सर्वाधिक अगर कोई अक्लमंद मुख्यमंत्री हुआ तो सिर्फ वहीं, बाकी बाबू लाल मरांडी, अर्जुन मुंडा इनलोगों ने कुछ काम ही नहीं किया।

भाजपा के वे पहले और एक मात्र नेता है, जिन्होंने झारखण्ड में विकास की धारा बहा दी, जबकि यहां विकास की धारा कितनी बही है, वो राज्य की जनता ही जानती है, तभी तो विधानसभा के उपचुनावों में भाजपा को करारी हार का सामना करना पड़ा, अब चूंकि लोकसभा के चुनाव है, और महागठबंधन करारी टक्कर सभी सीटों पर दे रहा हैं, ऐसे में भाजपा 2014 यहां दुहरा पायेगी, कहना मुश्किल है, क्योंकि लोगों को लगता है कि इनकी सरकार झारखण्ड की अब तक की बनी सभी सरकारों से निम्नस्तर की है, जिसमें झूठ का ही बोलबाला है।

भ्रष्टाचार इस कदर है कि आम आदमी की जीना दूभर हो गया। सीएम खुद झूठ बोलने में उस्ताद है, क्योंकि यही सीएम रघुवर दास ने कभी कहा था कि 2018 तक अगर वे 24 घंटे बिजली नहीं दे पायें तो वे राज्य में वोट मांगने नहीं आयेंगे और अब 2019 के चार महीने बीतने को आये, बिजली की क्या स्थिति है, यहां के सभी लोगों को पता है, फिर भी मुख्यमंत्री बड़े ही शान से वोट मांगते नजर आ रहे हैं।

शायद उन्हें लगता होगा कि जनता तो बेवकूफ हैं, उसे क्या पता कि उन्होंने कभी कुछ बिजली के संबंध में वादा भी किया था और अब लीजिये एक और वादा यानी 2021 तक सरना कोड लागू, क्या आदिवासी समुदाय, रघुवर दास के इन बातों पर विश्वास या भरोसा करेगा या बिजली के वादे की तरह ही यह भी वादा केवल घोषणा बनकर रह जायेगा?

Krishna Bihari Mishra

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