नये वर्ष में योगदा भक्तों से स्वामी सदानन्द ने कहा – आप अपने शरीर को अपना सेवक बनाइये, न कि आप शरीर के ही सेवक बन जाये

नये वर्ष के प्रथम दिन योगदा सत्संग मठ में आयोजित रविवारीय सत्संग को संबोधित करते हुए स्वामी सदानन्द ने कहा कि आप अपने स्वास्थ्य व शरीर को लेकर जैसा मन में विचार लायेंगे, ठीक वैसा ही आपका शरीर और स्वास्थ्य हो जायेगा, इसलिए सर्वप्रथम आप अपने मन को पुष्ट करें, क्योंकि कोई दुबला है या मोटा वो उसके भोजन के प्रभाव के कारण नहीं, बल्कि दैवीय शक्ति के कारण होता हैं, जिसको लोग समझ नहीं पाते। उन्होंने इस संदर्भ में कई तर्क प्रस्तुत किये, जिसके बारे में स्वयं परमहंस योगानन्द जी ने अपनी पुस्तक योगी कथामृत में कई बार लिखी है।

उन्होंने कहा कि कभी परमहंस योगानन्द जी ने अचानक चार महीने में अपना वजन 18 किलोग्राम कम कर लिया था और उनकी शरीर में कोई परिवर्तन तक नहीं आया था। स्वामी सदानन्द ने कहा कि मोटापा या दुबलापन स्वाभाविक है। कभी परमहंस योगानन्द जी के समय में भारत में मोटा होना अच्छा माना जाता था, परमहंस योगानन्द जी कहते है कि मोटापा बढ़ाने के लिए खाने-पीने की वस्तुओं पर ज्यादा ध्यान देने की आवश्यकता नहीं, यह बिना दैवीय शक्ति की कृपा के बिना संभव ही नहीं।

स्वामी सदानन्द ने कहा कि खान-पान पर हर व्यक्ति को ध्यान देना चाहिए, कभी भी खान-पान के वक्त कोई भी तरल पदार्थ नहीं लेना चाहिए। अच्छा रहेगा कि भोजन करने के आधे घंटे पहले तथा दो घंटे बाद तक जल भी न लें। जंक फूड से हमेशा बचने की कोशिश करें। जल अथवा फलों के रस भोजन के साथ कभी न लें। अधिक स्टार्च वाली भोजन भी सेहत के लिए ठीक नहीं होती, क्योंकि यह मोटापा को बढ़ाते हैं।

नमकीन-मसालेदार वस्तुओं से भी दूर रहें, अच्छा रहेगा कि जब भी मन करें नमकीन खाने का, तो उसके जगह पर फलों या उनके रसों का सेवन करें। आर्टफिशियल प्रोटीन भी खतरनाक होती है। स्वामी सदानन्द ने योगदा भक्तों को कहा कि अच्छा रहेगा कि योगदा पाठमाला 19 में स्वास्थ्य संबंधी जो बातें लिखी हैं, उसें आत्मसात् करें।

उन्होंने कहा कि भोजन उतना ही लें, जितना आवश्यक हो, अधिक भोजन महिलाओं के कमर और पुरुषों में पेट के अग्र भाग में मुश्किलें खड़ी कर देती हैं। उन्होंने कहा कि हमेशा योगदा पाठमाला में बताये गये व्यायामों को नियमित रुप से करें। शक्ति संचार व्यायाम आपके स्वास्थ्य के लिए बेहतर साबित होगी। उन्होंने कहा कि जब भी स्वास्थ्य संबंधी बातों पर विचार करें तो ईश्वर और गुरु को उसमें अवश्य शामिल करें, क्योंकि जब आप इन्हें साथ लेकर चलेंगे तो ईश्वरीय कृपा बरसेंगी और आपका स्वास्थ्य भी बेहतर होगा।

स्वामी सदानन्द ने कहा कि ये कभी मत समझें कि आपकी वजन बहुत ज्यादा बढ़ गई हैं या कम हैं, ये आपके अनुसार नहीं होता, एक ही व्यक्ति का वजन मंगल ग्रह पर 36, चंद्रमा पर 16 और उसी पृथ्वी पर 100 किलोग्राम हो सकता है। मतलब साफ है कि आपकी वजन आपके कारण नहीं, ग्रहों-उपग्रहों के कारण है। स्वामी सदानन्द ने तैलंग स्वामी की चर्चा करते हुए कहा कि उनकी वजन 300 पौंड थी, पर वे तीन सौ वर्षों तक पूरी तरह स्वस्थ होते हुए बिताया, जब तक उनकी मृत्यु नहीं हो गई।

इसी प्रकार उन्होंने गिरि बाला जी के बारे में बताया कि वो 56 वर्षों तक कुछ भी खाया-पीया नहीं और पूरी तरह स्वस्थ रही। उन्होंने कहा कि बिना खाये-पीये भी कई लोग इस दुनिया में स्वस्थ रहकर जीये, गिरि बाला जी का उदाहरण उन्हीं में से एक है। स्वामी सदानन्द ने कहा कि गिरिबाला जी से जब परमहंस योगानन्द मिले तो गिरिबाला जी ने अपने बारे में खुलकर बताया कि वो कैसे निराहार रहकर जीवन बिताने लगी। गिरिबाला और परमहंस योगानन्द जी की यह वार्ता, योगी कथामृत नामक पुस्तक में स्वयं परमहंस योगानन्द जी ने विस्तार से लिखी है। गिरिबाला जी ने परमहंस योगानन्द जी को बताया कि उनके निराहार रहने में क्रिया के सिवा कुछ और है ही नहीं।

स्वामी सदानन्द ने कहा कि हमारे जीवन में दुख व गरीबी दरअसल जीवन की सच्चाई को जानने के लिए प्रेरित करते हैं। उन्होंने बार-बार कहा कि हमेशा ताजे फल व सब्जियां खाये, मांसपेशियों को सुरक्षित और बेहतर करने के लिए व्यायाम करें, आपको दुबले बनाने में मन ही आपका बेहतर चिकित्सक है। दुसरा कोई नहीं।

दुबला-पतला होने के लिए भोजन की ओर नहीं बल्कि अपनी प्रवृत्तियों पर ध्यान दें। जैसे भोजन करने वक्त या व्यायाम करने वक्त अपने मन में ये लाये कि जो हम भोजन कर रहे हैं या व्यायाम कर रहे हैं, ये हमें बेहतर स्थिति में लायेगा, आप स्वयं देखेंगे कि ठीक उसी प्रकार आपका स्वास्थय होता चला गया। मनोबल को बढ़ाने से समस्या का समाधान होता है।

स्वामी सदानन्द ने कहा कि आपका स्वास्थ्य संबंधी समस्या पिछले जन्म से भी जुड़ा होता है। अगर आपने पूर्व जन्म में नियमों का पालन करते हुए शरीर को स्वस्थ बनाने का प्रयास किया है, तो इस जन्म में भी आपको इसका फायदा मिलेगा। इसलिए आपका आनेवाला जन्म बेहतर स्थिति में रहे, इसके लिए आपको आज से ही प्रयास करना होगा, मतलब आपको योगदा सत्संग द्वारा बताये गये नियमों का पालन करना ही होगा। नहीं तो, जब आप नियमों की अवहेलना करेंगे तो आपको खामियाजा भी भुगतना पड़ेगा। इसलिए स्वयं को सुधारिये, क्योंकि यही सुधार आपको अगले जन्म में बेहतर स्थिति में लायेगी।

स्वामी सदानन्द ने कहा कि कुछ लोग भोजन के प्रति कट्टर होते हैं, मतलब भोजन के प्रति कट्टरता का होना सही नहीं है। जैसे किसी को जब विदेश जाना होता हैं तो उनकी सबसे पहली चिन्ता यहीं होती है कि वहां खायेंगे क्या? पर यही चिन्ता विदेशियों की भारत आने पर नहीं होती, वे आराम से अपना जीवन यहां व्यतीत करते हैं। स्वामी सदानन्द ने कहा याद रखिये आपके शरीर को आपका सेवक होना चाहिए, न कि आप शरीर के सेवक बन जाये, अपने विचारों व अपने मन को बेहतर करें, संतुलित भोजन करें, योगदा के बताये मार्गों पर चलें, निश्चय ही आप बेहतर स्थिति में होंगे।