सुप्रियो ने राज्यपाल को किया आगाह अपनी व्याकुलताएं सार्वजनिक मंचों से नहीं, बल्कि प्रक्रियागत ढंग से व्यक्त करें, नहीं तो समझा जायेगा कि उनका वक्तव्य राजनीति से प्रेरित व कठोर निन्दनीय है

झामुमो के केन्द्रीय महासचिव सुप्रियो भट्टाचार्य ने प्रेस रिलीज जारी कर राज्यपाल सीपी राधाकृष्णन द्वारा आज दिये गये बयान की तीखी आलोचना की हैं। उन्होंने राज्यपाल के वक्तव्य को अप्रत्याशित व अनावश्यक बताते हुए आगाह किया कि वो अपनी व्याकुलताएं सार्वजनिक मंचों पर नहीं, बल्कि प्रक्रियागत तरीके से व्यक्त करें, नहीं तो समझा जायेगा कि उनका वक्तव्य राजनीतिक उद्देश्यों से प्रेरित हैं, जो कठोर निन्दनीय है। झामुमो द्वारा जारी प्रेस विज्ञप्ति इस प्रकार है …

आज राष्ट्रीय मतदाता दिवस के दिन रांची विश्वविद्यालय के आर्यभट्ट सभागार में भारत निर्वाचन आयोग द्वारा आयोजित मतदाता दिवस के कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के तौर पर राज्यपाल सी.पी.राधाकृष्णन ने उपस्थित हो कर भारत सहित झारखण्ड के प्रबुद्ध मतदाताओं को भारतीय लोकतंत्र में मतदान के लिए उत्साहित किया।

भारतीय लोकतंत्र भारत के संविधान के अन्तर्भुक्त संघीय शासन व्यवस्था के तहत केन्द्रीय मंत्री मंडल तथा राज्यों की मंत्री मंडल की उपस्थिति को स्वीकारता है और संघ और राज्यों के अधिकार एवं अस्तित्व एवं सहयोग की व्याख्यान करता है। संघ में जहाँ भारत के राष्ट्रपति संवैधानिक प्रमुख होते हैं, उसी तरह राज्यों में राज्यपाल संवैधानिक प्रमुख होते हैं। संवैधानिक प्रमुख होने के नाते यह दोनो संस्थाएं राजनैतिक पहचान से अलग हट कर निष्पक्ष और स्वतंत्र होते हैं।

कार्यक्रम के पश्चात् राज्यपाल ने कार्यक्रम स्थल पर पत्रकारों को संबोधित करते हुए 20 तारीख को राज्य सरकार द्वारा सीआरपीएफ के खिलाफ की गई कार्रवाई को गलत बताया गया एवं इसे सरकार की गलती कहा। उन्होने झारखण्ड मुक्ति मोर्चा के विषय में भी अपनी बातें कही। राज्यपाल को यह ज्ञात हो कि 20 तारीख को ईडी के द्वारा जब मुख्यमंत्री के बयान दर्ज करने के क्रम में राज्य सरकार द्वारा प्रदत्त सुरक्षा कवच में ईडी के सात अधिकारी मुख्यमंत्री निवास अपराह्न 01 बजे पहुंचे और उनके द्वारा बयान दर्ज करने की प्रक्रिया शुरू की गई।

तत्पश्चात अचानक अपराहन 03 बजे के लगभग आठ बसों में सीआरपीएफ के लगभग 500 महिला-पुरूष सशस्त्र जवान, सीआरपीएफ कमांडेन्ट तथा आईजी के नेतृत्व में अचानक मुख्यमंत्री आवास की ओर आए तथा उसके पश्चिम, दक्षिण औेर पूर्व दिशा को अपने कब्जे में लेने की कोशिश की। तब रांची पुलिस ने उनके बिना सूचना एवं बुलावे के वहां उपस्थिति के विषय में पूछा। लगभग 30-40 मिनट के बाद जबरन आए सीआरपीएफ के जवान अपने बैरक में लौट गए।

  1. राज्यपाल को संवैधानिक प्रमुख होने के साथ-साथ कार्यपालिका की भी पूरी जानकारी है, क्योंकि उनके साथ राज्य सरकार के दर्जा प्राप्त प्रधान सचिव उनके साथ नियुक्त रहते हैं।
  2. कार्यपालिका में यह स्पष्ट है कि किसी भी राज्य में प्राकृतिक आपदाएं, आपातकालीन स्थिति या कानून व्यवस्था के बिगड़ने पर स्थानीय जिला के जिला दण्डाधिकारी द्वारा भारत सरकार के अर्द्धसैनिक बल, सैन्य बल तथा एनडीआरएफ की मांग की जाती है तथा स्पष्टतः संख्या बल भी बताया जाता है, जिसमें यूनिट, कम्पनी एवं बटालियन की मांग होती है।
  3. क्या राज्यपाल महोदय को यह नहीं पता कि रांची जिला दण्डाधिकारी ने ऐसी किसी तरह की मांग न तो भारत के गृह मंत्रालय से की थी और न ही किसी अर्द्धसैनिक बल से की थी?
  4. राज्यपाल को यह भी ज्ञात है कि झारखण्ड मुक्ति मोर्चा द्वारा किसी भी तरह का सार्वजनिक आहवान नहीं था कि कार्यकर्ताओं को रांची के मुख्यमंत्री निवास के समीप आना है। झामुमो के कार्यकर्ता अपने पार्टी और अपने पार्टी के नेतृत्व के प्रति सम्पूर्ण तरह से समर्पित हैं और उद्वेग वश वे स्वतःस्फूर्त होकर मुख्यमंत्री आवास की तरफ अपने-अपने घरों से निकल कर आ गए थे। जिन्हें रांची जिला बल ने आवास से दूर रोक लिया एवं सम्पूर्ण निवास स्थान को प्रतिबन्धित क्षेत्र की तरह सीमित कर दिया।
  5. राज्यपाल को यह भी ज्ञात है कि राजनैतिक दल का कार्यकर्ता न तो गुंगा होता है और न ही बहरा होता है और न ही अंधा होता है और न ही नासमझ होता है। राजनैतिक दल का कार्यकर्ता अनुशासित होता है।
  6. राज्यपाल को यह भी ज्ञात है कि इस राज्य के एक विशेष राजनैतिक दल के कार्यकर्ता समाज विरोधी, सम्प्रदाय विरोधी एवं अपराधिक प्रवृति के लोग होते हैं, जिनकी पहचान समाज को होता है और इसलिए वह मतदान के समय उसे शासन से दूर रखता है।
  7. राज्यपाल को यह भी ज्ञात हो कि राज्य की भारतीय जनता पार्टी के अध्यक्ष द्वारा सीआरपीएफ के 20 तारीख की उपस्थिति के संबंध में जो आधिकारिक एवं सार्वजनिक बयान दिये गए, उन्हीं शब्दों का उपयोग हिन्दी भाषा के जगह अंग्रेजी भाषा में राज्यपाल द्वारा आज कहे गए। एक राजनैतिक कार्यकर्ता होने के नाते मुझे यह सहज-समझ है कि राजनैतिक दल का बयान संवैधानिक प्रमुख के द्वारा उच्चारित होता हो तो उसका निर्देशन एवं सम्प्रेषन किस तरह का होता है।
  8. राज्यपाल को यह भी ज्ञात है कि आपने चार दिवसीय दिल्ली प्रवास के पश्चात रांची पहुंचने पर हवाई अड्डा पर पत्रकारों को एक प्रश्न के संदर्भ में कहा था कि कानून से बड़ा कोई भी व्यक्ति नहीं होता है चाहे वह सीएम हो या पीएम हो, क्योंकि पीएम ने भी केन्द्रीय एजेन्सियों के समक्ष उपस्थित होकर जाँच में सहयोग किया था, जैसे इस राज्य के सीएम ने भी केन्द्रीय एजेन्सी के बुलावे पर उनके कार्यालय में उपस्थित हो कर उनके जाँच में सहयोग किया था। इसलिए किसी भी तरह का कानून व्यवस्था का बिगड़ने की कोई बात नहीं होती है।
  9. राज्यपाल को यह भी ज्ञात होगा की एक समाचार एजेन्सी से बात करते हुए 19 जनवरी 2024 को उनके द्वारा कहा गया कि राज्य में कानून व्यवस्था की स्थिति क्यों बिगड़ेगी? यहां यह भी बताना चाहिए आज क्या राज्य में राज्यपाल महोदय को यहां के कानून व्यवस्था के प्रति कोई संदेह है?
  10. राज्यपाल कल 75वें गणतंत्र दिवस के मुख्य राजकीय समारोह में ध्वजारोहन करेंगे तथा भारत के संविधान को सलामी देते हुए संवैधानिक प्रावधानों के प्रति अपने संकल्प व्यक्त करेंगे तथा सशस्त्र बल की सलामी ले कर राज्यवासियों में यह संदेश देंगे कि हमारा देश सार्वभौम है, देश सुरक्षित है एवं राज्य कानून के प्रति प्रतिबद्ध हो कर राजकीय कार्य सम्पादित कर रहा है।

राज्यपाल द्वारा आज प्रेषित वक्तव्य को हमारी पार्टी अप्रत्याशित एवं अनावश्यक समझती है। राज्यपाल को जो व्याकुलताएं हैं, वो सार्वजनिक मंच पर नहीं, प्रक्रियागत व्यक्त करें। नहीं तो यह समझा जाएगा कि यह बयान राजनैतिक उद्देश्य प्रेरित है, जो कठोर निन्दनीय है।