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सुप्रियो ने कहा विपक्ष ने भाजपा की सारी चालाकी पकड़ ली, तभी तो देश के गृह मंत्री को आंखें नीची करके लज्जा से हंसना पड़ गया

झारखण्ड मुक्ति मोर्चा के केन्द्रीय महासचिव व प्रवक्ता सुप्रियो भट्टाचार्य ने आज संवाददाता सम्मेलन में कहा कि महिलाओं के नाम पर, महिलाओं को ढाल बनाकर केन्द्र ने 131 वां संविधान संशोधन विधेयक लाकर संविधान व संघीय ढांचा को नकारते हुए एक छद्म लोकतंत्र द्वारा हमेशा-हमेशा के लिए लोगों से मताधिकार रोकने का जो प्रयास किया है, वो आज खुलकर सामने आ गया।

सुप्रियो ने कहा कि जो कानून 2023 में बना। जो भारत सरकार के गजट में आया। संविधान की धारा 344 में एक उपधारा भी जोड़ा गया। उसका तीस महीनों तक इम्पलीमेंट नहीं कर, फिर से उसमें संशोधन की बात करना सिद्ध कर दिया कि इस सरकार को अंततः परिसीमन ही करना था। उन्होंने कहा कि इनकी चालाकी देखिये। इन्होंने बड़ी ही चालाकी से लोकसभा और विधानसभा की सीटें बढ़ा दी। लेकिन इनकी चोरी कैसे पकड़ी गई, इन्होंने विधानसभा की सीटें तो बढ़ाई, पर राज्यसभा की सीटें नहीं बढ़ाई। वो 245 की, 245 ही रखी गई।

सुप्रियो ने कहा कि कोई कितना भी चालाक या चतुर क्यों न हो, कोई कालाबाजारी करें या षडयंत्र करें या घपला करें या चोरी करें, वो कहीं न कहीं कोई सबूत छोड़ ही देता है, जो आगे चलकर उसकी गले का फांस तक पहुंच जाता है। जैसे भाजपा द्वारा लोकतंत्र को चोरी करने का प्रयास किया गया है, वो सबूत के साथ आज पकड़ ली गई है।

सुप्रियो ने कहा कि कल लोकसभा की कार्यवाही देख रहे थे। कैसा दृश्य उस समय रहा होगा, जब देश के गृह मंत्री को आंखें नीची करके लज्जा से हंसना पड़ गया। जब विपक्ष ने उनके करतूतों को पकड़ लिया। उन्होंने कहा कि झामुमो तो पहले से ही महिला आरक्षण के पक्ष में हैं। 2023 वाली महिला आरक्षण के समर्थन में हैं। हम उसके पक्षधर है। आज अमित शाह ने कहा कि घरों की गणना शुरु हो गई। जातीय जनगणना होगी। लेकिन देखिये, सरकार कैसे भाग रही है?

सुप्रियो ने कहा कि जब सरकार सर्वसम्मत थी, तब कानून लागू नहीं किया गया। आज सरकार साधारण बहुमत में हैं तो उसने इस संविधान संशोधन विधेयक को घुमाकर लाने का प्रयास किया। ये लोग सोच रहे थे कि इसी बहाने विपक्ष को महिला विरोधी करार दे दिया जाय। उन्होंने कहा कि संसदीय परम्परा रही है कि नेता प्रतिपक्ष जब किसी विधेयक पर बोल दिया रहता है, तो उसके बाद जो पक्षकार होता है, जो विधेयक पेश किया होता है, उसका जवाब आता है और फिर उसके बाद मत-विभाजन होता है। लेकिन यहां? उन्होंने कहा कि जनगणना के बगैर परिसीमन नहीं होगा, जनगणना में ओबीसी को लाना होगा, आदिवासियों के आदिधर्म सरना को जोड़ना होगा, तभी ये जनगणना होगा। ये अन्यायपूर्ण विधेयक पास नहीं हो, ये हमारी कामना है, ताकि यहां का लोकतंत्र अक्षुण्ण रहे।

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