सुदेश महतो को हुआ दिव्य ज्ञान, CM रघुवर को पत्र लिखकर पांच बिदुओं पर ध्यान आकृष्ट कराया

जैसा कि विद्रोही 24.कॉम ने पहले ही भविष्यवाणी कर दी थी, कि आजसू सुप्रीमो सुदेश महतो विधानसभा का उपचुनाव जीते या हारे, दोनों ही स्थितियों में ये राज्य सरकार के नाक में दम कर देंगे, जिसकी शुरुआत आज से प्रारम्भ भी हो गई। आजसू सुप्रीमो सुदेश महतो को आज दिव्य ज्ञान प्राप्त हुआ है। वे इस दिव्य ज्ञान से प्रभावित होकर राज्य के मुख्यमंत्री रघुवर दास को पत्र लिखकर पांच गंभीर ज्वलंत मुद्दों की ओर सरकार का ध्यान आकृष्ट कराया है,

जैसा कि विद्रोही 24.कॉम ने पहले ही भविष्यवाणी कर दी थी, कि आजसू सुप्रीमो सुदेश महतो विधानसभा का उपचुनाव जीते या हारे, दोनों ही स्थितियों में ये राज्य सरकार के नाक में दम कर देंगे, जिसकी शुरुआत आज से प्रारम्भ भी हो गई। आजसू सुप्रीमो सुदेश महतो को आज दिव्य ज्ञान प्राप्त हुआ है। वे इस दिव्य ज्ञान से प्रभावित होकर राज्य के मुख्यमंत्री रघुवर दास को पत्र लिखकर पांच गंभीर ज्वलंत मुद्दों की ओर सरकार का ध्यान आकृष्ट कराया है, चूंकि डायरेक्ट ये सरकार को चुनौती नहीं दे पा रहे हैं, ऐसा करने से उन्हें अपने सम्मान खोने का भी खतरा दीख रहा है, उन्हें पार्टी के टूटने का भी खतरा सता रहा है, इसलिए उन्होंने पत्र का सहारा लिया है।

सुदेश महतो द्वारा लिखित यह पत्र बता रहा है कि आजसू और भाजपा में खटपट प्रारम्भ हो गई है, अब इसकी पूर्णाहुति कब होगी, इसकी तिथि मुकर्रर होना बाकी है। अब जरा देखिये, कि आखिर सुदेश महतो ने अपने पत्र में किन-किन बिंदुओं को सीएम रघुवर दास के समक्ष उठाया है। सुदेश महतो के अनुसार राज्य के ज्वलंत मुद्दे इस प्रकार है, मुख्यमंत्री इस पर विचार करें –

  • स्थानीय/नियोजन नीति में ऐसा प्रावधान/संशोधन किया जाय कि राज्य/जिला के तृतीय एवं चतुर्थ श्रेणी की नियुक्तियों में शत प्रतिशत नियुक्ति वैसे लोगों का हो, जिनका राज्य/जिला के अंदर अपने या अपने पूर्वजों के नाम जमीन, बासगीत आदि का उल्लेख पिछले सर्वे रिकार्ड आफ राइटस में दर्ज हो।
  • झारखण्ड कर्मचारी चयन आयोग द्वारा पूर्व में आयोजित स्नातक प्रशिक्षित शिक्षक प्रतियोगिता परीक्षा सहित सभी वैसे संपन्न परीक्षाएं जिनका परिणाम नहीं निकला है, उन्हें रद्द किया जाये, साथ ही स्थानीय/नियोजन नीति में संशोधन करने के बाद ही पुनः नियुक्ति हेतु प्रतियोगिता परीक्षाएं आयोजित की जाये।
  • राज्य सरकार के अधीन संविदा में हो रहे नियुक्ति में भी स्थानीय नीति के प्रावधानों को लागू किया जाय।
  • संकल्प संख्या स्थानीयता नीति 14.04.2018 का. 3854/रांची दिनांक 01.06.2018 में सुधार करते हुए तृतीय एवं चतुर्थ वर्ग के नौकरी को दस वर्ष के स्थान पर दस नियुक्ति वर्ष के लिए स्थानीय निवासियों हेतु आरक्षित किया जाय, चूंकि नियुक्ति परीक्षाएं अपने नियत समय पर नहीं हो पाती है।
  • राज्य के कतिपय राजनेताओं तथा पदाधिकारियों द्वारा सीएनटी/एसपीटी एक्ट का उल्लंघन किया गया है। एसआइटी द्वारा इन मामलों की जांच भी हो चुकी है। इस जांच रिपोर्ट को सार्वजनिक किया जाय, साथ ही दोषियों पर अविलम्ब कार्रवाई सुनिश्चित करें, ताकि कोई भी राज्य के आदिवासी/मूलवासी के सुरक्षा के लिए बनाये गये कवच, सीएनटी/एसपीटी एक्ट से खिलवाड़ की हिमाकत न करें।

पत्र में सुदेश महतो ने इशारा किया है कि ये केवल राजनीतिक और सरकार का विषय नहीं है बल्कि राज्य गठन के उद्देश्य से जुड़े संवेदनशील मामले हैं, तथा मुख्यमंत्री इस पर गंभीरता से विचार करें और राज्य के आदिवासियों/मूलवासियों के हित में निर्णय लें।

Krishna Bihari Mishra

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