ऐसी है झारखण्ड पुलिस, जिसका दारोगा दुष्कर्म पीड़िता के परिजनों से बतौर 50 हजार घूस मांगता है

चुल्लू भर पानी में डूब मरना चाहिए ऐसे दारोगा को जो दुष्कर्म पीड़िता के परिजनों से 50 हजार रुपये रिश्वत मांगता हो। ये निलंबन क्या होता है? इस प्रकार के निलंबन से उस दारोगा को क्या हो जायेगा, जो दुष्कर्म पीड़िता के परिजनों से पचास हजार रुपये की रिश्वत मांगता है, ऐसे दारोगा को तो खुद ब खुद चुल्लू भर पानी के डूब के मर जाना चाहिए, ऐसे दारोगा ही समाज के लिए कोढ़ हैं,

चुल्लू भर पानी में डूब मरना चाहिए ऐसे दारोगा को जो दुष्कर्म पीड़िता के परिजनों से 50 हजार रुपये रिश्वत मांगता हो। ये निलंबन क्या होता है? इस प्रकार के निलंबन से उस दारोगा को क्या हो जायेगा, जो दुष्कर्म पीड़िता के परिजनों से पचास हजार रुपये की रिश्वत मांगता है, ऐसे दारोगा को तो खुद ब खुद चुल्लू भर पानी के डूब के मर जाना चाहिए, ऐसे दारोगा ही समाज के लिए कोढ़ हैं, जो दुष्कर्म पीड़िता के परिजनों को न्याय दिलाने के बजाय दुष्कर्मियों को बचाने में लगे रहते हैं।

ये शर्मनाक घटना घटी है, साहिबगंज में जहां कुछ दिन पहले अताउल्लाह और अब्दुल्ला दोनो सगे भाइयों ने दो अन्य दुष्कर्मियों के साथ एक नाबालिग लड़की के साथ दुष्कर्म किया और उसके पीड़िता के पिता के साथ मार-पीट भी की, ऐसे दुष्कर्मियों को बचाने के लिए जो इस कांड का आइओ बना है, वह दारोगा दुष्कर्म पीड़िता के परिजनों को कहता है कि कुछ ले-देकर मामला सलटा लो, अगर ऐसा नहीं करना है तो पचास हजार रुपये दो, तब हम तुम्हारे पक्ष में डायरी लिख देंगे, ऐसा है साहेबगंज का दारोगा, ऐसी है झारखण्ड पुलिस।

जैसे ही दारोगा ने उक्त बातें पीड़िता के परिजनों से कही, पीड़िता के परिजनों ने यह जानकारी स्थानीय लोगों को दी, फिर क्या था, आस-पास के लोग जुट गये और उस दारोगा वीरेन्द्र कुमार सिंह को घेर लिया, और उसकी मोबाइल छीन ली। घबराया दारोगा वीरेन्द्र कुमार सिंह माहौल बिगड़ता देख भाग खड़ा हुआ। सूत्र बताते है कि जैसे ही इस मामले की जानकारी एसडीपीओ नवल शर्मा को मिली, वे नगर इंस्पेक्टर सुनील टोप्पनो के साथ वहां पहुंचे, मामले की जानकारी ली।

लोगों ने दारोगा वीरेन्द्र कुमार सिंह से छीनी गई मोबाइल एसडीपीओ को सौंप दिया तथा पूरे मामले की लिखित जानकारी पुलिस अधीक्षक को दी गई। पुलिस अधीक्षक ने लिखित शिकायत मिलने के बाद दारोगा वीरेन्द्र कुमार सिंह को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया, तथा पूरे मामले की जांच नगर इंस्पेक्टर सुनील टोप्पनो को सौंप दी।

साहिबगंज में दारोगा वीरेन्द्र कुमार सिंह की यह करतूत बताता है कि राज्य में कानून-व्यवस्था की क्या हालात है? और यहां असामाजिक तत्वों तथा दुष्कर्मियों के हौसले क्यों बुलंद है, शायद ये असामाजिक तत्व और दुष्कर्मी भी अच्छी तरह जानते है कि आप कुछ भी अपराध कर लो और पैसे छींट दो, आपसे संबंधित मामले को स्थानीय पुलिस खुद ही दबाने के लिए, आपके विरोधियों पर दबाव डालना शुरु कर देगी।

ताजा मामला उसका प्रत्यक्ष उदाहरण है। ऐसे इस घटना ने झारखण्ड पुलिस के चेहरे पर चढ़ी नकाब को भी उतार दिया है, साथ ही यह भी बता दिया है कि झारखण्ड पुलिस पर भरोसा करना मूर्खता को सिद्ध करना है, क्योंकि यहां की पुलिस की प्राथमिकता होती है अच्छे लोगों को फंसाना, उन्हें उलटा लटकाना तथा भ्रष्ट एवं दुष्कर्मियों को बचाने के लिए एड़ी-चोटी एक कर देना और उसके बदले उनसे मोटी रकम वसूलना ताकि उनका सात पुश्त आराम से बिना हाथ-पांव डूलाएं, आराम से जिंदगी बसर कर सकें, और मुख्यमंत्री रघुवर दास को देखिये इतनी गंदी हरकत होने के बावजूद राज्य में विधि-व्यवस्था को लेकर, वे अपना खुद पीठ थपथपना नहीं भूलते।

Krishna Bihari Mishra

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सचमुच झारखण्ड बहुत तेजी से तरक्की कर रहा है, मुख्यमंत्री रघुवर दास के नेतृत्व में उनके अधिकारी इस प्रकार से खुद को काम में बिजी रखे हुए है कि वे किसी को सहयोग करने के बजाय, फोन काटने में ज्यादा रुचि दिखा रहे है, भला इससे बड़ा तरक्की और क्या हो सकता है। जरा देखिये, सोशल साइट पर फेसबुक पर अंकित राजगढ़िया ने क्या लिखा है? आपको पता लग जायेगा कि राज्य में अधिकारियों ने जनता को क्या समझ रखा है

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