पुलवामा में शहीद विजय के पिता ने CM रघुवर द्वारा घोषित दस लाख की राशि लेने से किया इनकार

आखिर वहीं हुआ, जिसका डर था, कश्मीर के पुलवामा में शहीद हुए गुमला के विजय सोरेंग के पिता पूर्व सैनिक वृज सोरेंग ने राज्य सरकार द्वारा घोषित दस लाख रुपये की घोषणा को लेने से इनकार कर दिया हैं। उनका कहना है कि जैसे अन्य राज्यों की सरकारों ने अपने-अपने राज्यों के वीर शहीदों के लिए दिल खोलकर राशियां देने की घोषणा की, ठीक उसी प्रकार यहां की भी रघुवर सरकार शहीदों को सम्मान करना सीखें और राशि बढ़ाएं।

आखिर वहीं हुआ, जिसका डर था, कश्मीर के पुलवामा में शहीद हुए गुमला के विजय सोरेंग के पिता पूर्व सैनिक वृज सोरेंग ने राज्य सरकार द्वारा घोषित दस लाख रुपये की घोषणा को लेने से इनकार कर दिया हैं। उनका कहना है कि जैसे अन्य राज्यों की सरकारों ने अपनेअपने राज्यों के वीर शहीदों के लिए दिल खोलकर राशियां देने की घोषणा की, ठीक उसी प्रकार यहां की भी रघुवर सरकार शहीदों को सम्मान करना सीखें और राशि बढ़ाएं।

उनका यह भी कहना था कि राज्य सरकार उनके बेटे के नाम पर उक्त गांव के एक पथ का नाम विजय पथ रखे तथा फरसामा गांव को एक आदर्श ग्राम बनाने की कोशिश करें ताकि लगे, कि एक वीर शहीद को सही में सम्मान देने की कोशिश यहां की सरकार ने की है।

कल ही विद्रोही 24.कॉम ने जैसे ही रघुवर सरकार द्वारा इस बात की घोषणा की गई कि शहीद विजय सोरेंग के परिजनों को दस लाख रुपये दी जायेगी, इस पर कड़ी प्रतिक्रिया देते हुए एक समाचार को प्रकाशित किया था, जिसका शीर्षक था वाह सीएम साहेब, जो देश के लिए मरे उसे सिर्फ दस लाख, और जो देश को चोट पहुंचाएं उसे 15 लाख, जिसे कई पाठकों ने समर्थन किया तथा राज्य सरकार के इस वक्तव्य और घोषणा की कड़ी आलोचना भी की थी

साथ ही सरकार से इस पर अपना थोड़ा दिल और बड़ा करने का अनुरोध भी किया था, पर हमारे होनहार मुख्यमंत्री के उपर इसका कोई असर नहीं पड़ा। अब जबकि शहीद के पिता ने ही राज्य सरकार के इस घोषणा के बाद दस लाख की राशि लेने की बात कर दी, तो क्या अब भी राज्य सरकार अपने किये गये घोषणा पर पुनर्विचार करेगी या अपने अड़ियल रवैये के लिए विख्यात सीएम रघुवर दास यहां भी अड़ियल रवैया अपनायेंगे। इधर नेता प्रतिपक्ष हेमन्त सोरेन ने भी इसे मुद्दा बनाया है तथा राज्य सरकार की कड़ी आलोचना करते हुए, शहीदों के परिजनों को सम्मान के साथ, उन्हें राशि बढ़ाकर देने की मांग कर डाली है।

Krishna Bihari Mishra

Next Post

पटना को मेट्रो रेल और इधर रांची की जनता को न मेट्रो- न मोनो, सिर्फ हाथ आया ठन-ठन गोपाल

Sun Feb 17 , 2019
याद करिये अपने होनहार सीएम रघुवर दास की हवाबाजी, दिसम्बर 2014 के अंतिम सप्ताह में नये-नये मुख्यमंत्री बने थे, और जनवरी 2015 आते-आते इन्होंने रांची में मोनो रेल प्रोजेक्ट को मंजूरी दे दी। इसके लिए आइडीएफसी को परामर्शी नियुक्त किया गया। शहर में जल्दी ही मोनो रेल चलाने के प्रस्ताव को पथ निर्माण विभाग की मंजूरी भी मिल गई। विधि विभाग का सहमति भी प्राप्त हो गया।

Breaking News