वरिष्ठ अधिवक्ता अभय मिश्रा को मिली फिर सफलता, महेश तेवारी द्वारा दोष सिद्धि पर रोक लगाने हेतु दायर आवेदन को न्यायालय ने किया खारिज
कल यानी शनिवार को महेश तेवारी (अपीलार्थी) बनाम ऋतु कुमार (सूचक) वाद में, महेश तेवारी द्वारा दोषसिद्धि (Conviction) पर रोक लगाने हेतु दायर आवेदन को न्याय आयुक्त के न्यायालय ने खारिज कर दिया। यह उनके द्वारा इसी प्रकरण में दायर किया गया 25वाँ मामला था, जो आज निरस्त हुआ। एक ही मुकदमे में उन्होंने विभिन्न प्रकार के लगभग 25 आवेदन एवं वाद दायर किए।
इन सभी मामलों में झारखण्ड हाई कोर्ट के वरिष्ठ अधिवक्ता अभय मिश्रा का कहना है कि उन्हें सूचक पक्ष की ओर से बहस करने का अवसर मिला। प्रारंभ में महेश तेवारी स्वयं बहस करते थे, बाद में उन्होंने उच्चतम न्यायालय के अधिवक्ता भी नियुक्त किए। अभय मिश्रा का कहना है कि एक मामले में वे उपस्थित नहीं हो पाये थे, जिसके कारण उच्च न्यायालय से उन्हें अंतरिम राहत प्राप्त हो गई थी। अब संभवतः वे पुनः उच्च न्यायालय का दरवाज़ा खटखटाएँगे, और तब मामलों की संख्या 26 हो जाएगी। आगे उच्च न्यायालय में क्या परिणाम होगा, यह भविष्य के गर्भ में है, किंतु वे (अभय मिश्रा) पुनः सूचक पक्ष की ओर से अपनी बात मजबूती से रखेंगे।
अभय मिश्रा कहते है कि उनका केवल इतना मानना है कि व्यक्ति को कभी अहंकारी नहीं होना चाहिए। संघर्ष करना उन्हें स्वभावतः पसंद नहीं, किंतु जीवन और परिस्थितियों का अपना नियम होता है। यदि वे ( अभय मिश्रा) अपने पक्ष की रक्षा के लिए खड़ा नहीं होंगे, तो सामने वाला भी उन्हें सहजता से नहीं छोड़ेगा। जैसा कि श्रीमद्भगवद्गीता में कहा गया है— कर्मक्षेत्र और युद्धक्षेत्र में व्यक्ति को अपने कर्तव्य का पालन करना चाहिए; वहाँ मोह और संबंधों से ऊपर उठकर धर्म और सत्य के लिए खड़ा होना पड़ता है।
