रांची रेलवे स्टेशन दुर्गा पूजा समिति यानी मुनचुन राय और उनकी टीम ने रांचीवासियों को इस नवरात्र में दक्षिण भारत के छोटे से राज्य केरल में होने का कराया एहसास
रांची रेलवे स्टेशन दुर्गा पूजा समिति यानी मुनचुन राय और उनकी टीम ने रांचीवासियों को इस बार नवरात्र में दक्षिण के प्रांत केरल में होने का ऐहसास करा दिया है, अगर आप इस बार के नवरात्र में रांची में रहे हैं और आप रांची रेलवे स्टेशन दुर्गा पूजा समिति के रांची जंक्शन स्थित दुर्गा पंडाल में नहीं पहुंचे हैं, तो आपके पास एक दिन का और मौका है, जितना जल्द हो सके, प्रतिमा विसर्जन होने के पूर्व वहां जाकर अपनी उपस्थिति दर्ज कराये।
पंडाल व वहां प्राण-प्रतिष्ठित मां दुर्गा और उनके परिवार का भव्यावलोकन करें, परमानन्द में खो जाये, आध्यात्मिकता के सागर में डूबकी लगा लें, अन्यथा जब कोई आपके समक्ष पूजा समाप्त होने के बाद चर्चा करेगा, तो आपको पछताने के सिवा कुछ नहीं मिलेगा। इस बार रांची रेलवे स्टेशन दुर्गा पूजा समिति ने केरल के प्रसिद्ध पर्व ओणम और उससे जुड़ी उन सारी चीजों को रांचीवासियों के समक्ष रख दिया। जिसे रांचीवासी लंबे समय तक याद रखेंगे।
हालांकि इस बार रांची में दो जगहों पर दक्षिण भारत दिखा है। एक बकरी बाजार और दूसरा रांची जंक्शन के पास। लेकिन बाजी इस बार रांची जंक्शन ने मार ली। आप जैसे ही इस पंडाल में पहुंचेंगे। मस्त गजराज आपको सुड़ हिलाते दिखाई पड़ेंगे और आप उन्हें देखते रह जायेंगे, कहेंगे कि यह सब कैसे संभव है। लेकिन विज्ञान ने सब संभव कर दिखाया है, रांची रेलवे स्टेशन दुर्गा पूजा समिति ने उसके प्रभाव का जमकर इस्तेमाल किया और इसे धर्म के मूल स्वरूप से जोड़ दिया।
केरल का प्रमुख त्योहार ओणम है। ओणम की कथा में महाराजा बली और भगवान विष्णु के अवतार वामन की कथा है। यहां पर दिखाया गया है कि कैसे वामन ने अपने छोटे से पग से मात्र दो पग में ही तीनों लोकों को नाप लिया और जब एक पग बचा रह गया तो महाबली ने उन्हें अपना तीसरा पग अपने सिर पर रखवा कर अपने दान के संकल्प को परिपूर्ण कर दिया। कैसे महाबली की भक्ति और दानशीलता से प्रभावित होकर भगवान विष्णु ने उन्हें वर्ष में एक बार अपनी प्रजा से मिलने के लिए पृथ्वी पर आने का वरदान दिया।
यहां के पंडालों में केरल में होनेवाले पुक्कलम और स्नेक बोट रेस को भी दिखाया गया है। जो लोग केरल को जानते है, वे ये भी जानते है कि वहां पंबा नदी जैसी नदियों में विशाल नौकाओं का दौड़ आयोजित होता है, जिसे देखने के लिए लोग दूर-दूर से आते हैं। यहां केरल के सांस्कृतिक नृत्य को भी दिखाया गया है। साथ ही पंडाल के मुख्य द्वार पर भगवान विष्णु के समस्त अवतारों से भक्तों का मार्गदर्शन किया गया है।
आप जैसे ही इन महावतारों का दर्शन करते आगे बढ़ते हैं। मुख्य पंडाल में मां दुर्गा अपने परिवार के साथ विराजमान है। रांची रेलवे स्टेशन दुर्गा पूजा समिति की ओर से बनी यह प्रतिमा भव्यता को लिये हुए हैं। मां की आंखों में दिव्य चमक और उनकी मनमोहक छवि देखते हुए आप चाहकर भी आगे नहीं बढ़ सकते। आपके पांव वहां चिपकते हुए प्रतीत होंगे। यहीं पर एक ओर मां दुर्गा की भव्य प्रतिमा और दूसरी ओर भगवान विष्णु की शयन मुद्रा में बनाई गई छवि मनोहारि है।
यह प्रतिमा केरल के अतिप्रसिद्ध तिरुवन्नतपुरम शहर में स्थित स्वामी पद्मनाभ मंदिर में स्थित भगवान विष्णु की शयन मुद्रा की याद दिलाती है। मतलब कुल मिलाकर देखें, तो रांची रेलवे स्टेशन दुर्गा पूजा समिति तो हर बार अपने प्रतिमा और पंडालों के लिए चर्चा में तो रहती ही है। इस बार इसने रिकार्ड बना दिया।
श्रद्धालुओं ने इस प्रतिमा की इतनी चर्चा ही कर दी है कि यहां श्रद्धालुओं का तांता बराबर लगा हुआ है। आप चाहेंगे कि यहां थोड़ी भीड़ कम हो जायेगी, तब जायेंगे तो आप मुगालते में हैं। देर मत करिये। यहां जाइये और मां की भव्य प्रतिमा तथा भगवान विष्णु की शयन मुद्रा को आंखों में बसाते हुए घर आइये तथा आध्यात्मिकता की सागर में खुद को डूबो दीजिये, ताकि यह शारदीय नवरात्र आपके जीवन को आनन्दित कर सकें, महका सकें।
