रांची यानी हनुमान मंदिरों का शहर, पूरे रांची की सुरक्षा हनुमान जी के हाथों में…

ऐसे तो हनुमान जी की जय-जय यत्र-तत्र-सर्वत्र होती रहती है, पर बहुत कम को पता है कि रांची हनुमान मंदिरों का शहर है। आप देखेंगे कि हनुमान मंदिर यहां चप्पे-चप्पे पर बने पड़े हैं और इन सारे के सारे मंदिरों में विधिवत पूजा अर्चना चल रही होती हैं, बाकी जगहों पर तो मंदिर बन जाते हैं, पर पूजा अर्चना करनेवालों की संख्या नदारद रहती हैं, पर रांची में ऐसा नहीं हैं,

ऐसे तो हनुमान जी की जय-जय यत्र-तत्र-सर्वत्र होती रहती है, पर बहुत कम को पता है कि रांची हनुमान मंदिरों का शहर है। आप देखेंगे कि हनुमान मंदिर यहां चप्पे-चप्पे पर बने पड़े हैं और इन सारे के सारे मंदिरों में विधिवत पूजा अर्चना चल रही होती हैं, बाकी जगहों पर तो मंदिर बन जाते हैं, पर पूजा अर्चना करनेवालों की संख्या नदारद रहती हैं, पर रांची में ऐसा नहीं हैं, यहां हनुमान जी का मंदिर छोटा हो या बड़ा, कोई फर्क नहीं पड़ता, इतनी बड़ी संख्या में हनुमान जी के मंदिरों का होना, ऐसा लगता है जैसे यह शहर हनुमान जी के मंदिरों का शहर हो और पूरे रांची की सुरक्षा व्यवस्था हनुमान जी ने संभाल लिया हो।

रांची के लोग धर्मप्राण ज्यादा होते हैं, यहां के युवाओं का मानना है कि कलियुग में हनुमान जी साक्षात् जीवित देवता है, उन्हें पुकारा नहीं कि लीजिये गदा लेकर सामने खड़ा और जो आपको त्रास दे रहा है, उस पर गदा से ऐसा प्रहार करते हैं, कि गलत करनेवाला धूल चाटने लगता है, ऐसे में भला हनुमान जी को हम युवा क्यों नहीं याद करें।

लीजिये कल की ही बात थी, कल रामनवमी थी, और राम जी का जयकारा कम पर हनुमान जी का जयकारा कुछ ज्यादा ही लग रहा था, रांची के लोग अपने बच्चों को रामजी की भूमिका में कम, पर हनुमान की भूमिका में ज्यादा लेकर सड़कों पर उतरे थे, बच्चे भी हनुमान की मुद्रा में गदा लेकर जब सड़कों पर उछल-कूद कर रहे थे, तो बाल हनुमान के इस रुप को देखकर सारे के सारे लोग आह्लादित हो जाया करते।

और अब रांची हनुमान जी के मंदिरो का शहर क्यों हैं? जरा इस पर ध्यान दीजिये। आप अगर बाहर के रहनेवाले है, और ट्रेन से सफर कर रहे हैं तो आप जान लीजिये कि जैसे ही आप रांची जंक्शन से बाहर निकलेंगे, आपको उत्तर की ओर संकटमोचन हनुमान मंदिर दीखेगा, जिसे यहां के टेम्पूचालकों, रिक्शाचालकों और स्थानीय लोगों ने स्थापित किया है। रांची जंक्शन के सौंदर्यीकरण के नाम पर कई बार इस मंदिर को स्थानांतरित करने का प्रयास किया गया, पर मजाल है कि कोई हनुमान जी के इस मंदिर की एक ईट को घसका कर दिखा दें, इनके भक्त हमेशा से ऐसा करनेवालों का धुआं छुडाने के लिए तैयार बैठे रहते हैं। अगर रांची जंक्शन के दूसरी ओर नजर दौड़ायेंगे तब पायेंगे कि दक्षिण-पूर्व और दक्षिण-पश्चिम दिशाओं की और भी हनुमान जी आराम से वीरासन में बैठकर शायद ये बता रहे हो कि रांची जंक्शन की सुरक्षा वे अपने गदा लेकर बिना किसी शुल्क के आम यात्रियों को दिये जा रहे हैं।

रांची जंक्शन से निकलकर जैसे ही आप पश्चिम दिशा की ओर बढ़ेंगे तो पटेल चौक आयेगा, वहां भी आपको हनुमान जी दिखाई पड़ेंगे, यहां विराज रहे हनुमान जी इस प्रकार दिखाई पड़ते हैं, जैसे इन्होंने रांची-पटना मुख्यमार्ग, सरकारी बस स्टैंड, रांची-लोहरदगा रेलवे लाइन तथा इसके आस-पास बनी कई लग्जरियस होटल की सुरक्षा का भार उन्होंने ले रखा हो।

और इसके ठीक आगे बढ़ेंगे तो आपको मिलेगा, ओभर ब्रिज जहां आपको हनुमान जी करताल बजाते मिलेंगे। इनकी ये मुद्रा अनोखी है, शांत भाव से हनुमान जी का यहां करताल बजाना, स्पष्ट रुप से बताता है कि रांची में सब कुछ शांति ही शांति है, टेंशन लेकर जीने की कोई जरुरत नहीं, सारे अशांति फैलानेवालों को उन्होंने ठीक करके रख दिया है, इसलिए वे करताल बजाते यहां दीख जाते है, यहां बड़ी संख्या में शाम को लोग हनुमान की आरती और उनकी सेवा में लगे दिखाई पड़ेंगे।

इससे थोड़ा और पश्चिम की ओर बढ़ेंगे तो कडरु पूल मिलेगा, वहां कडरुपुल के ठीक नीचे तथा कडरु पुल के ठीक आगे, अरगोड़ा रेलवे स्टेशन की ओर जानेवाली रास्ते में आपको हनुमान जी का मंदिर मिलेगा।

जब आप ओभरव्रिज से फिरायालाल चौक की ओर बढ़ेंगे तो आयेगा सुजाता चौक, वहां भी आपको चौक पर ही हनुमान जी का मंदिर दिखाई पड़ेगा, आगे चलकर फिरायालाल चौक की ओर बढ़ने पर आयेगा मल्लाह टोली, यहां पर भी हनुमान जी वीरासन पर बैठकर, यहां चल रहे कई बैंकों, गुरुद्वारों, व्यापारिक प्रतिष्ठानों की सुरक्षा में लगे दिखाई पड़ जायेंगे और इसके ठीक बाद डेली मार्केट के पास अहिरावण को अपने पांवों से दबाये तथा राम और लक्ष्मण को अपने कंधे पर उठाये हनुमान जी दिखाई पड़ जायेंगे।

संकटमोचन मंदिर के नाम से विख्यात इस मंदिर में मंगलवार और शनिवार को भारी भीड़ दिखाई पड़ती है। इसके ठीक आगे फिरायालाल चौक के पूर्वी छोड़ पर हनुमान जी आपको दिखाई पड़ेंगे और आगे जाकर लालपुर चौक पर हनुमान जी की छोटी मंदिर पर लगी रामभक्तों की भीड़ आपको सहज अपनी ओर आकर्षित कर लेगी। यहीं नहीं अपने हनुमान जी तो मुख्यमंत्री आवास में भी विराजते है, जब से हनुमान जी का वहां प्रार्दुभाव हुआ है, ऐसा लगता है कि सीएम आवास का काया ही पलट गया।

पूर्व मुख्यमंत्री अर्जुन मुंडा ने विधिवत् हनुमान जी की स्थापना मुख्यमंत्री आवास में करवाया था, राम नवमी के दिन, हनुमानजी की यहां विशेष पूजा-अर्चना स्वयं मुख्यमंत्री किया करते है, ताकि उनके पद की सुरक्षा हनुमान जी अपने बल द्वारा करते रहे। हनुमान जी का मंदिर एसएसपी आवास के पास भी है। रातू रोड चौक पर भी हनुमानजी विराजमान है, यहां बैठकर वे इधर से गुजरनेवाले सारे भीभीआइपी की सुरक्षा का भार ये उठाये हुए हैं, हम आपको बता दें कि इसी प्रमुख मार्ग से राज्यपाल, मुख्यमंत्री, नेता प्रतिपक्ष, मुख्य सचिव, वरीय अधिकारियों का आवागमन होता रहता है, जिसकी सुरक्षा का भार हनुमान जी स्वयं उठाये हुए है, और यहां के पुलिसकर्मियों पर अपना वरदहस्त रखे हुए है।

पहाड़ी मंदिर हो या किशोरगंज या हरमू सभी जगह हनुमान ही हनुमान नजर आयेंगे। यहां तक की रांची के हवाई अड्डे की सुरक्षा का भार हनुमान जी हिनू चौक पर रहकर कर रहे हैं और सभी पर अपना कृपा लूटा रहे है, और रही बात निवारणपुर तपोवन मंदिर तो वहां पर भी हनुमान जी अपने प्रभुश्रीराम के साथ तो विराजे हैं ही, अलग से भी उपस्थित हैं, जहां सारे रांचीवासी महावीरी पताका लाकर अपनी श्रद्धा निवेदित करते है, श्रीरामनवमी के दिन यहां की स्थिति बेहद ही रोचक, अद्भुत व अविस्मरणीय होती है। यानी पूर्व हो या पश्चिम, उत्तर हो या दक्षिण रांची के कण-कण में विराजते हैं, हनुमान और उनके मंदिर और भक्त, तभी तो लोग कहते है कि अपना रांची हनुमान मंदिरों का शहर है।

Krishna Bihari Mishra

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