नमो देव्यै महादेव्यै शिवायै सततं नमः के मंत्रोच्चारण से गूंजी रांची, पूरा शहर दुर्गामय, पूरी रात मां के भक्तों के हृदय में बहती रही भक्ति की अविरल रसधारा

लगातार महासप्तमी, महाष्टमी व महानवमी इन तीन दिनों तक पूरी रांची में मां के भक्तों के हृदय में भक्ति की अविरल रसधारा बहती रही। सभी मां को मनाने में जुटे रहे। कोई मां की तीनों चरित्रों का स्तवन कर माता को मनाता रहा तो कोई समयाभाव के कारण एक ही चरित्र से मां का ध्यान कर स्वयं को मां के चरणों में समर्पित करता रहा। ऐसे भी शारदीय नवरात्र के इस महानतम तीन दिनों को कोई कैसे जाया होने देना चाहेगा।

कल महानवमी के दिन तो रांची की सड़कों पर ऐसा लगा कि पूरा रांची ही सड़कों पर उतर आया हो। हमें लगता है कि शायद ही कोई परिवार होगा जो कल के दिन घरों में होगा। सभी सड़कों पर उतर आये थे और सभी के पांव मां के पंडालों की ओर बढ़ते चले जा रहे थे। हो भी क्यों न। कल मां के अंतिम रुप का पूजार्चना का दिन था। सिद्धिदात्री का दिन था।

छोटे-छोटे बच्चे अपने माता-पिता के गोद में अतिशोभायमान हो रहे थे। कई बच्चे अपने दादा-दादी, माता-पिता की अंगूलियों को पकड़ अपने छोटे-छोटे पांवों से माता के पंडालों की दूरी नाप रहे थे। उनके पंडाल तक जाने की इस दौड़ और उनके चेहरे का भाव देखनेलायक था। सड़कों पर लगे मेले और वहां बिक रहे खिलौनों पर इनका ध्यान कम और पंडालों को निहारने तथा मां के भव्य रुप को अपने मन में बिठाने पर इनका ध्यान ज्यादा था।

ड्यूटी पर तैनात पुलिसकर्मी भी इस दौरान अपने ड्यूटी पर अनुशासित व ईमानदार दिखे। कई चारपहिये वाहन पर बैठे अपने परिवार के साथ निकले दबंगों की हेकड़ी भी उन पर चल नहीं पा रही थी। बड़ी ही विनम्रता व कभी-कभी कठोर बनते भी भी ये पुलिसकर्मी दिखे तथा सभी से प्रशासन के नियमों का पालन कराने को आतुर भी दिखे। सर्वाधिक प्रशंसनीय ड्यूटी उस आदिवासी जवान की हमें दिखी जो चुटिया थाना चौक पर तैनात था। उसने किसी को भी अनुशासन तोड़ने नहीं दी।

सड़कों पर विद्युत सज्जा को लेकर इस बार भी रातू रोड के आरआर स्पोर्टिंग क्लब व बिहार क्लब ने अपनी पकड़ बनाये रखी। उनके द्वारा सड़कों पर की गई विद्युत सज्जा देखनेलायक थी। बच्चों व उनके परिवारों को ये विद्युत सज्जा अपनी ओर खूब आकर्षित कर रहे थे। काजू से बनी राजस्थान मित्र मंडल के पंडाल या बकरी बाजार का भारतीय नवयुवक संघ का पंडाल यहां भी भीड़ हमेशा की तरह दिखी।

रांची रेलवे स्टेशन दुर्गा पूजा समिति पर बने पंडाल व प्रतिमा में हर दिन भीड़ उतनी ही थी, जितनी पहले दिन थी। यहां आयोजकों को कड़ी मेहनत करनी पड़ रही थी। लोग शांति के साथ बिना किसी परेशानी के मां का दर्शन कर सकें, यहां इसका अच्छा इंतजाम देखने को मिला। बेटी बचाओ और बेटी को अपनी संस्कृति के बारे में इसका भान कराओ के मूल मंत्र पर बनी यह पंडाल पूरे रांची में चर्चा का केन्द्र रहा।

इस बार मौसम ने भी रांचीवासियों का खुब साथ दिया। न अधिक ठंड न अधिक गर्मी। शानदार मौसम का लाभ यहां के लोगों ने खुब उठाया। जमकर आनन्द लिया। महानवमी के दिन तो रांची के आस-पास गांव के लोग भी शहरों में खुब जुटे। बसों-ट्रेनों व अपने ऑटों से गांव से आये इन ग्रामीणों ने सड़कों पर या विभिन्न पंडालों में लगे फूट स्टॉलों की खुब बिक्री बढ़ाई। जिससे स्टॉल लगाये लोगों के चेहरे पर खुब खुशी दिखाई दी।

कुल मिलाकर देखें तो दुर्गापूजा के आयोजन में लगी पूजा समितियां, इस महोत्सव को ठीकठाक संपन्न कराने में लगी जिला व पुलिस प्रशासन, इस पूजा में अच्छी व्यवसाय को लेकर विभिन्न सड़कों व पूजा पंडालों के आस-पास फूड स्टॉल लगानेवाले व्यवसायियों व मां का दर्शन करने आये मां के भक्तों के बीच एक अच्छा संबंध बनते दिखा। जिसमें सारे पक्षों की भूमिका सराहनीय थी।

हम कह सकते हैं कि सभी के सहयोग व आनन्द लेने-देने की बलवती भावना ने इस बार दुर्गा पूजा के आनन्द व उमंग को चार गुणा बढ़ा दिया। सभी प्रेम व उत्साह के बीच दुर्गा पूजा के आनन्द में डूबे रहे। आज भी सुबह से कई पंडालों में भारी भीड़ दिखाई दे रही हैं। खासकर अलबर्ट एक्का चौक स्थित दुर्गा बाड़ी में कुछ विशेष ही दृश्य दिख रहा है।

ऐसे भी अगर पूजा की बात करें या जिनकी मां की पूजा में विशेष दिलचस्पी रहती हैं, वे दुर्गा बाड़ी की ओर ही प्रस्थान करते हैं, क्योंकि यहां ऐसी पूजा रांची में कही भी देखने को नहीं मिलती और न ही यहां जैसे सुंदर भाव। आप जैसे ही दुर्गा बाड़ी पहुंचेंगे तो यहां पारंपरिक तरीके से बनी मां और उनके परिवार की प्रतिमा और पारंपरिक तरीके से होनेवाली पूजा आपके हृदय को भावविभोर कर देती हैं। जिसके कारण, आप यहां विशेष ध्यान कर मनोवांछित प्राप्त भी कर सकते हैं।