जो लोग लालू को मिटाने और उनसे बदला लेने की बात कर रहे हैं, वे मुगालते में हैं

जो लोग लालू को मिटाने और उनसे बदला लेने की बात कर रहे हैं, वे मुगालते में हैं, दस जन्म भी लेंगे वे लालू को नहीं मिटा सकते और न ही लालू से बदला ले सकते हैं। लालू कोई चूं-चूं का मुरब्बा नहीं, वह नीतीश कुमार नहीं, कि भाजपा के गोद में जाकर बैठ जायेगा, वह अकेला शख्स है, जो भाजपा को उसकी औकात बताने के लिए किसी भी हद तक जा सकता है और यहीं लोकतंत्र की खुबसूरती है, नहीं झूकेंगे, नहीं रुकेंगे, जब तक हैं, संघर्ष करेंगे।

जो लोग लालू को मिटाने और उनसे बदला लेने की बात कर रहे हैं, वे मुगालते में हैं, दस जन्म भी लेंगे वे लालू को नहीं मिटा सकते और न ही लालू से बदला ले सकते हैं। लालू कोई चूं-चूं का मुरब्बा नहीं, वह नीतीश कुमार नहीं, कि भाजपा के गोद में जाकर बैठ जायेगा, वह अकेला शख्स है, जो भाजपा को उसकी औकात बताने के लिए किसी भी हद तक जा सकता है और यहीं लोकतंत्र की खुबसूरती है, नहीं झूकेंगे, नहीं रुकेंगे, जब तक हैं, संघर्ष करेंगे।

चलनी दूसे सूप के, जिन्हें बहत्तर छेद

जो लोग लालू को भ्रष्टाचारी कहते हैं, जो लोग लालू को परिवारवाद का समर्थक बताते हैं, जरा वे स्वयं अपने गिरेबां में झांक कर देख लें, स्वयं आकंठ भ्रष्टाचार के रसगुल्ले के रस से सराबोर है, स्वयं परिवारवाद की चाशनी में डूबे है, यानी चलनी दूसे सूप के, जिन्हें बहत्तर छेद। पहले बहत्तर छेदवाले अपने छेद बंद करें, तब वे लालू को दूसे, नहीं तो अच्छा रहेगा कि वे चुप रहे।

आज कोई भारत का नेता यह नहीं कह सकता कि वह दूध का धूला है, सभी अपनी बीवी, बेटे, बेटी, बहू, यहां तक की छः सात की संख्या में गुप्त तरीके से रखनेवाले प्रेमिकाओं का भी ख्याल रख रहे हैं और उन्हीं के लिये जी रहे है, सच्चा देशभक्त तो ढिबरी खोजने से भी नहीं मिल रहा, और जिनका काम है उन्हें ढूंढना वे नीतीश की महिमा गाकर राज्यसभा पहुंचते है। यकीन मानिये, जो सच्चा नेता होता है, वह आज भूखों मरता है, जो सच्चा पत्रकार होता है, वह घर में बैठकर दिन गुजारता है, भूखों मर जाता है, पर इसका भी एक अपना अलग आनन्द है। मैंने तो अपनी जिंदगी में एक ही नेता देखा, जिनका नाम है – ए के राय। स्वयं जिस पार्टी में ए के राय है, उन्हीं की पार्टी में ए के राय जैसा सच्चा नेता नहीं हैं, क्योंकि जनता को भी ऐसे नेता नहीं चाहिए, उन्हें तो बेशर्म नेता चाहिए, जो उनकी हर प्रकार की उचित-अनुचित बातों को पूरा करने में लग जाये।

एक अधिकारी की आरती उतारने के चक्कर में लालू को धौंस

जरा देखिये, कल झारखण्ड के मुख्यमंत्री रघुवर दास ने लालू प्रसाद पर क्या टिप्पणी की है? उन्होंने कहा है कि लालू से बदला ले रहा है झारखण्ड। वे कल बंदगांव प्रखण्ड के हुड़ांगदा गांव में सरकार आपके द्वार कार्यक्रम के अंतर्गत एक जनसभा को संबोधित कर रहे थे। वे विकास आयुक्त अमित खरे की आरती उतार रहे थे, बता रहे थे कि इसी पश्चिमी सिंहभूम के तत्कालीन उपायुक्त और वर्तमान विकास आयुक्त अमित खरे ने चारा घोटाला को उजागर किया था, जिसमें लालू प्रसाद शामिल थे। वे लालू के खिलाफ अनाप-शनाप बक रहे थे। रघुवर दास ने यह भी कहा कि जैसी करनी वैसी भरनी, लालू जी इसकी मिसाल है, खूब पटना रांची की दौड़ लगा रहे है। संयुक्त बिहार के दौरान झारखण्ड को इन नेताओं ने लूट लिया, इसका खामियाजा आज भी झारखण्ड उठा रहा है।

और अब सवाल रघुवर दास से, कि आपने…

  • 17 साल में क्या किया? आपकी ही पार्टी की तो सरकार, ज्यादा वर्षों तक यहां चली है, जिसमें आप मंत्री रहे, उप मुख्यमंत्री रहे और आज तो आप मुख्यमंत्री है, क्या किया है आपने, जनता जाननी चाहती है।
  • कल की ही बात है, एक रुपये की दवा के अभाव में गुमला का आठ साल का बच्चा संजय दम तोड़ दिया, उसे दवा तो आपने उपलब्ध कराया ही नहीं, एंबुलेस भी नहीं दिला सके और पांच साल में झारखण्ड की तस्वीर बदलने की बात करते है।
  • आपकी ही पुलिस की बदसलुकी के कारण पांच दिन पहले शिव सरोज नामक धनबाद का युवक रांची के भीड़-भाड़ वाले अस्पताल सेवा सदन के समक्ष फांसी लगाकर झूल जाता है, वह आपको, आपके अधिकारियों को फांसी लगाने के पहले मेल करता है और आप उस युवक को बचा नहीं पाते, आपके वरीय पुलिस अधिकारी तो फांसी लगानेवाले युवक को ही कटघरे में रखकर, अपने पुलिसकर्मियों को बचाने में लग गये और विकास की बात करते है?
  • पिछले साल खुब हल्ला किये, खेत का पानी खेत में, गांव का पानी गांव में और शहर का पानी शहर में, जरा देखिये आपके शहर का हाल, क्या स्थिति है? जाइये गांव में देखकर आइये कितना डोभा बना और जो बना उसका क्या हाल है?
  • गरीबी मिटायेंगे, अरे जो हाल है, गरीब ही मिट जायेंगे, क्योंकि आपने भी इसकी तैयारी बहुत अच्छे ढंग से की है, जो महिलाएं स्वयं सहायता समूह के माध्यम से दाल भात योजना केन्द्र चला रही थी, उस मुख्यमंत्री दाल भात योजना केन्द्र को आपने मनोनयन के आधार पर बाहर छतीसगढ़ की कंपनी टच स्टोन को दे दिया और आप कहते है – गरीबी मिटायेंगे?
  • स्वयं जातीयता में इतने आकंठ डूब गये कि आपको अपनी जाति के विकास में ही सब का विकास दिखाई पड़ रहा है? किसी की आप सुन नहीं रहे, कनफूंकवों पर ही आपका ध्यान है, और विकास की बात करते है?
  • चुनाव आयोग आपके प्रेस एडवाइजर पर कार्रवाई करने की बात करता है, आप झारखण्ड के लोगों की आंखों में धूल झोंकने के लिए कार्रवाई की अनुशंसा करते है और विभाग उसे दबा कर बैठ जाता है, क्या आप जनता को बेवकूफ समझते है, क्या जनता नही जानती कि वह विभाग किसके अंतर्गत काम कर रहा है?
  • और मुद्रा योजना के अंतर्गत याद है, सीधी बात में। एक दुमका का भुक्तभोगी गुहार लगाया था कि मुद्रा योजना के अंतर्गत उसे टेंपू मिला था, जो चीनी मॉडल था, एक महीने में ही वह टेंपू टें बोल गया, अब क्या करें वह? और उसी सीधी बात में मुख्यमंत्री रघुवर दास जी, आपकी और अमित खरे की बोलती बंद हो गयी थी? आप दोनों, उस व्यक्ति के सवाल का जवाब नहीं दे पाये थे?  उस वक्त मैं आप दोनों का चेहरा देखकर हैरान था कि विकास के नाम पर किसका भला हो रहा है?
  • राज्य में बेहतर राजकोषीय प्रबंधन नहीं होने के कारण 2014-15 में जो झारखण्ड का राजकोषीय घाटा 65.6 अरब रुपये था, वह बढ़कर 2015 -16 में 112.9 अरब रुपये हो गया, इसे भी नहीं भूलना चाहिए।

हमें लगता है कि इतना प्वाइंट काफी है, आपको आइना दिखाने के लिए, पर आपको दिख पायेगा, हमें नहीं लगता। आप जनता की आंखों में धूल झोंकते रहिये, लालू की औकात बताते रहिये, हालांकि ये औकात कौन किसको बता रहा हैं, ये तो प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और फिलहाल उनके मातहत काम कर रहे सीबीआई यानी तोता को ही मालूम पड़ रहा होगा।

Krishna Bihari Mishra

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जब नेता और पुलिस की जोड़ी बने तो धाराएं भूंजे की तरह डेट के साथ बदले

Tue Aug 8 , 2017
भाई झारखण्ड पुलिस का भी जवाब नहीं है, कभी वह बताती है कि प्राथमिकी 20 मई को दर्ज की गई है और ढाई महीने के बाद बताती है कि प्राथमिकी 22 मई को दर्ज की गई है। 20 मई को बताती है 66(i) के तहत प्राथमिकी दर्ज हुआ और ढाई महीने के बाद बताती है कि 65 और 68 आइटी एक्ट के तहत मामला दर्ज हुआ। जिसके खिलाफ प्राथमिकी दर्ज होती है, उसे थाने में बुलाती है और नोटिस थमा देती है कि आप अपना पक्ष रखे, और जो गलत प्राथमिकी दर्ज कराता है, उसके खिलाफ वह कार्रवाई करने से थर्राता है,

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