जब नेता और पुलिस की जोड़ी बने तो धाराएं भूंजे की तरह डेट के साथ बदले

भाई झारखण्ड पुलिस का भी जवाब नहीं है, कभी वह बताती है कि प्राथमिकी 20 मई को दर्ज की गई है और ढाई महीने के बाद बताती है कि प्राथमिकी 22 मई को दर्ज की गई है। 20 मई को बताती है 66(i) के तहत प्राथमिकी दर्ज हुआ और ढाई महीने के बाद बताती है कि 65 और 68 आइटी एक्ट के तहत मामला दर्ज हुआ। जिसके खिलाफ प्राथमिकी दर्ज होती है, उसे थाने में बुलाती है और नोटिस थमा देती है कि आप अपना पक्ष रखे, और जो गलत प्राथमिकी दर्ज कराता है, उसके खिलाफ वह कार्रवाई करने से थर्राता है,

भाई झारखण्ड पुलिस का भी जवाब नहीं है, कभी वह बताती है कि प्राथमिकी 20 मई को दर्ज की गई है और ढाई महीने के बाद बताती है कि प्राथमिकी 22 मई को दर्ज की गई है। 20 मई को बताती है 66(i) के तहत प्राथमिकी दर्ज हुआ और ढाई महीने के बाद बताती है कि 65 और 68 आइटी एक्ट के तहत मामला दर्ज हुआ। जिसके खिलाफ प्राथमिकी दर्ज होती है, उसे थाने में बुलाती है और नोटिस थमा देती है कि आप अपना पक्ष रखे, और जो गलत प्राथमिकी दर्ज कराता है, उसके खिलाफ वह कार्रवाई करने से थर्राता है, कमाल है, 20 मई को प्राथमिकी दर्ज हुई और धुर्वा थाना के सब इंस्पेक्टर डी के महली को इसकी जिम्मेवारी सौंपी जाती है, पर ये डी के महली कहां है, किसी को पता नही हैं, अंत में धुर्वा थाना प्रभारी, जिसके खिलाफ प्राथमिकी दर्ज हुई है, उन्हें मोबाइल से आज दस बजे फोन कर धुर्वा थाना बुलाते है, वह व्यक्ति दो घंटे से भी ज्यादा प्रतीक्षारत है, धुर्वा थाना प्रभारी आते है तो बताते है कि आप अपना पक्ष रखे, वह अपना पक्ष रखता है। जिसके साथ ये घटना घट रही है, वह और कोई नहीं है, स्वयं मैं हूं, बताइये मैं क्या करूं…

 

तब मैंने सोचा कि झारखण्ड के महानुभावों को भी ये जानकारी दे दूं, मैंने उन्हें भी मेल द्वारा जानकारी उपलब्ध करा दी है और अब आप जनता को, भी मैं यह जानकारी दे देना आवश्यक समझता हूं, दरअसल कुछ भाजपा नेता है, जिन्हें कुछ ज्यादा ही उलझने में आनन्द आ रहा है। फिलहाल सत्ता के घमंड ने भी उन्हें सातवें आसमान पर पहुंचा दिया है, वे कनफूंकवें के इशारे पर फिलहाल उछल रहे हैं, और धाराओं में उलट-फेर किये जा रहे है, अभी तो 66(i) से 65, 68 पहुंचा है, पता नहीं और ये कौन-कौन सी धारा लगायेंगे, जब उन्हें याद आयेगा, हालांकि मैं उनके द्वारा लगाये जा रहे सभी धाराओं का स्वागत करने के लिए तैयार हूं।

और ये रहा प्रपत्र जो मैंने मेल के द्वारा राज्य के मुख्यमंत्री के प्रधान सचिव, पुलिस महानिदेशक, और वरीय पुलिस अधीक्षक को भेजा है, पता नहीं ये लोग मेल देखते है भी या नहीं, क्योंकि अगर ये लोग मेल देखते तो कम से कम धनबाद के शिव सरोज को बचाया ही जा सकता था…

सेवा में,

मुख्यमंत्री के प्रधान सचिव,

पुलिस महानिदेशक,

वरीय पुलिस अधीक्षक, रांची

महाशय,

गत 20 मई को रांची के धुर्वा थाना में मेरे खिलाफ 66(i) आईटी एक्ट 2000 के तहत धुर्वा थाना कांड संख्या 122/17 एक प्राथमिकी दर्ज की गई थी, जिसकी जांच करने की जिम्मेवारी धुर्वा थाना प्रभारी ने सब इंस्पेक्टर डी के महली को दी थी। आज उसी प्राथमिकी के तहत हमें सूचित किया गया कि मेरे विरुद्ध धुर्वा थाना कांड संख्या 122/17, दिनांक 22 मई 2017 धारा 65/68 आइटी एक्ट पंजीकृत किया गया है। इस संबंध में, मैं अपना पक्ष रखूं। मैंने अपना लिखित पक्ष धुर्वा थाना प्रभारी को दे दी है और वहीं पक्ष मैं आप महानुभावों के समक्ष रख रहा हूं, इस आशा के साथ कि आप न्याय करेंगे, क्योंकि देर होने से न्याय की महत्ता घट जाती है, और गलत करनेवाले आसानी से बच जाते है…

मेरा पक्ष इस प्रकार है।

जिस पक्ष ने मेरे खिलाफ धुर्वा थाना में प्राथमिकी दर्ज करायी है, जिसका कांड संख्या 122/17 हैं, जो 20 मई को 66(i) आइटी एक्ट 2000 के तहत दर्ज किया गया था, जो आज के डेट में प्राथमिकी संख्या तो वहीं है, धारा बदलकर 65 और 68 कर दिया गया है। मेरा कहना है कि मेरे उपर लगाये गये सारे आरोप भ्रामक एवं बेबुनियाद है, मैंने ऐसी कोई गलती नहीं कि, जिससे किसी की धार्मिक भावना को ठेस या कोई व्यक्ति आहत हो सकता है, हां, जिस पोस्ट के बारे में उल्लेख किया गया है, वह मुझे किसी भाजपा के एक बड़े नेता ने मुझे प्रेषित किया था, जिसे मैंने अपने पोस्ट पर डाला, बाद में थोड़ी देर के बाद स्वविवेक के अनुसार उसे हटा दिया और इस प्रकार मैंने अपने पत्रकारिता धर्म का निर्वहण किया। आप देखेंगे कि उस पोस्ट में जो हमने विचार दिये है, उस विचार से भी पता लग जायेगा कि मेरी भावनाएं क्या थी?

फिर भी शिकायतकर्ता, प्राथमिकीदर्जकर्ता द्वारा बेवजह इसे मुद्दा बनाया जा रहा है, तो ऐसे हालात में मेरा स्पष्ट कहना है कि शिकायतकर्ता और प्राथमिकीदर्जकर्ता की गतिविधियों और उसकी संलिप्तता, संदिग्धता की भी जांच करायी जाये, तभी पता चलेगा कि शिकायतकर्ता और प्राथमिकीदर्जकर्ता चाहते क्या है?

मेरा सवाल है कि जिस पोस्टर को लेकर प्राथमिकीदर्जकर्ता ने हम पर आरोप लगाया है, वह पोस्टर बना कहां था? किसने बनाया था? किसके द्वारा वायरल किया गया? किसके द्वारा हम तक पहुंचा?  पोस्टर बनानेवाला का उद्देश्य क्या था? इन प्रश्नों की भी जांच हो, ताकि दूध का दूध और पानी का पानी हो जाय, क्योंकि हमें लगता है कि प्राथमिकीदर्जकर्ता चालाक है, वह जानता है कि वह पकड़ में आ जायेगा तब उसकी सारी राजनीतिक दुकान बंद हो जायेगी। इसलिए उसने स्वयं को बचाने के लिए ऐसा कार्य किया है, मेरे खिलाफ प्राथमिकीदर्ज करायी है।

आपसे अनुरोध है कि पूरी ईमानदारी से इसकी जांच करवायें, क्योंकि उक्त व्यक्ति ने मेरी ईमानदारी, मेरी कर्तव्यनिष्ठता, मेरे आजीवन सच्चरित्रता पर अंगूली उठा दी है, आशा है, आप हमें न्याय दिलायेंगे, मुझे पूरी आशा है।

भवदीय,

कृष्ण बिहारी मिश्र

स्वतंत्र पत्रकार

रोड न. 7

कृष्णापुरी, रांची – 834011

Krishna Bihari Mishra

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