रघुवर सरकार पर संकट के बादल

रघुवर सरकार पर संकट के बादल मंडराने शुरु हो गये है। ये संकट के बादल राज्य की विपक्षी पार्टियों ने नहीं मंडराये है, बल्कि राज्य के मुख्यमंत्री रघुवर दास ने यह संकट स्वयं अपने लिए उपस्थित करवाया है।

रघुवर सरकार पर संकट के बादल मंडराने शुरु हो गये है। ये संकट के बादल राज्य की विपक्षी पार्टियों ने नहीं मंडराये है, बल्कि राज्य के मुख्यमंत्री रघुवर दास ने यह संकट स्वयं अपने लिए उपस्थित करवाया है। सूत्र बताते है कि संघ के स्वयंसेवक और भाजपा कार्यकर्ता मुख्यमंत्री रघुवर दास को एक मिनट भी बर्दाश्त करने को तैयार नहीं है। उसकी झलक झारखण्ड में ही दो स्थानों पर मिली है, एक जब मोदी फेस्ट में शामिल होने के लिए रांची केन्द्रीय मंत्री नितिन गडकरी आये थे तब, और दूसरी बार भाजपा के राष्ट्रीय महामंत्री राम माधव आये तब।

रघुवर को भाजपा कार्यकर्ताओं ने बैठक में आने से रोका

सूत्र बताते है कि जब भाजपा के राष्ट्रीय महामंत्री राम माधव पिछले दिनों पार्टी विधायकों और भाजपा कार्यकर्ताओं की राय जानने के लिए झारखण्ड के तीन दिवसीय दौरे पर थे, तब उन्होंने सरायकेला-खरसावां में एक बैठक की। इस बैठक में सरायकेला-खरसावां के भाजपा कार्यकर्ताओं ने मुख्यमंत्री रघुवर दास की कार्यशैली पर प्रश्नचिह्न लगाते हुए कहा कि स्थिति ऐसी हो गयी कि वे अपने ही इलाके में बेगाने हो गये है, जनता उनकी सुननी तो दूर, बात करने से इनकार कर रही है, सीएनटी-एसपीटी एक्ट में कराये जा रहे संशोधन पर राज्य का आदिवासी और मूलवासी समुदाय पूर्णतः भाजपा से स्वयं को अलग कर दिया है।

ऐसे में भाजपा की शर्मनाक हार आनेवाले लोकसभा चुनाव में तय है। भाजपा कार्यकर्ताओं की भारी नाराजगी का ही आलम था कि सरायकेला-खरसावां की इस बैठक में मुख्यमंत्री रघुवर दास को भी आना था, पर ऐन मौके पर भाजपा कार्यकर्ताओं की भारी नाराजगी को देखते हुए, कही बैठक हंगामेदार न हो जाय, राम माधव ने मुख्यमंत्री रघुवर दास को जमशेदपुर में ही रोक दिया, जबकि मुख्यमंत्री की सुरक्षा में लगे अधिकारियों का दल पहले ही सरायकेला खरसावां पहुंच चुका था।

सूत्र यह भी बताते है कि पहली बार ऐसा हुआ  है कि भाजपा का इतना बड़ा अधिकारी झारखण्ड की तीन दिनों की यात्रा पर रहा और मुख्यमंत्री रघुवर दास से नहीं मिला और सीधे भाजपा कार्यकर्ताओं और संघ के वरिष्ठ अधिकारियों से मुलाकात करने के बाद दिल्ली लौट गया।

संघ के स्वयंसेवकों ने जब नितिन के सामने ही मुख्यमंत्री को फटकार लगायी

सूत्र यह भी बताते है कि जब मोदी फेस्ट में शामिल होने के लिए केन्द्रीय मंत्री नितिन गडकरी पिछले दिनों 8 जून को रांची आये थे, तब वे मुख्यमंत्री रघुवर दास को लेकर, निवारणपुर स्थित संघ कार्यालय पहुंचे, जहां संघ के स्वयंसेवकों ने नितिन गडकरी से ही यह सवाल कर दिया कि आप रघुवर दास को अपने साथ संघ कार्यालय क्यों ले आये? यहीं नहीं नितिन गडकरी के सामने ही, स्वयंसेवकों ने मुख्यमंत्री रघुवर दास की क्लास ली और उनके द्वारा की जा रही गलत कार्यों और उससे राज्य में उत्पातियों की बढ़ रही हरकतों का पूरा चिट्ठा खोलकर कर रख दिया, जिसका जवाब मुख्यमंत्री रघुवर दास के पास नहीं था। स्थिति ऐसी है कि न तो भाजपा कार्यकर्ता और न ही संघ के स्वयंसेवक ही, मुख्यमंत्री रघुवर दास के क्रियाकलापों से संतुष्ट है।

सरयु राय और अर्जुन मुंडा साथ आये

इधर रघुवर दास की घटती लोकप्रियता के बीच अर्जुन मुंडा और सरयु राय ने अपनी घनिष्ठता बढ़ायी है, बताया जाता है कि सरयु राय भी रघुवर दास से खफा है, और जब भी मौका मिलता है, अपनी नाराजगी प्रकट कर देते है, हाल ही में मोमेंटम झारखण्ड की कथित सफलता को लेकर एक कार्यक्रम रांची में आयोजित किया गया था, जिस कार्यक्रम में शामिल होने के बाद सरयु राय, कार्यक्रम के बीच में ही उठकर चल दिये।

अर्जुन मुंडा भाजपा कार्यकर्ताओं में खासा लोकप्रिय

इधर रघुवर दास की अलोकप्रियता के बीच अर्जुन मुंडा ने अपनी साख और मजबूत कर ली है। कुछ महीने पूर्व प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी से हुई उनकी मुलाकात और केन्द्रीय नेताओं के बीच उनकी प्रगाढ़ता ने, उनकी स्थिति और मजबूत कर दी है, रघुवर दास को हटाने के बाद, अर्जुन मुंडा सीएम बनेंगे या फिर कोई नया चेहरा यहां आयेगा, इस पर भी चर्चा होना शुरु हो चुका है।

क्या कहते है, बुद्धिजीवी?

बुद्धिजीवियों का कहना है कि राज्य के लोगों को लग ही नहीं रहा कि यहां मुख्यमंत्री रघुवर दास का शासन चल रहा है, जिस तरह से सत्ता संभालने के बाद, मुख्यमंत्री ने ठोस निर्णय लिये थे और राज्य को लगा कि विकास के नये आयाम स्थापित होंगे, वो पिछले पांच-छः महीने में काफूर हो गये, अगर स्थिति नहीं सुधरी तो लगता है कि भाजपा यहां कभी भी सत्ता में नहीं आयेगी, क्योंकि संघ के स्वयंसेवकों और भाजपा कार्यकर्ताओं की नाराजगी भाजपा के लिए भारी पड़ जायेगी, अभी भी वक्त है, अगर सुधर जाये तो ठीक है, नहीं तो केन्द्रीय नेतृत्व को निर्णय लेना पड़ेगा, क्योंकि वे भी जान चुके है कि भाजपा और संघ, रघुवर दास को और झेलने के लिए तैयार नहीं है और स्थिति ऐसी है कि इस हालात में झारखण्ड की सभी 14 लोकसभा सीटों पर फिलहाल भाजपा का जीतना नामुमकिन है।

 

Krishna Bihari Mishra

2 thoughts on “रघुवर सरकार पर संकट के बादल

  1. इनके राज में भ्रष्टाचार चरम पर है अधिकारि किसी की बात नहीं सुनते जनता दरबार से लोगों का ऐसा विश्वास टुटा कि दो माह
    पुरव सरकार के जनता दरबार में एक भी जनता नहीं पहुँची यदि समय रहते भारतीय जनता पार्टी नहीं क़दम उठाई और झारखंड में नेतरितव परिवर्तन नहीं की तो 14 लोकसभा में एक भी भा ज पा को नहीं मिलने वाली है सरकार में वापसी तो दिन के तारे तोड़ने की बात होगी।

  2. Raghuvar sarkar sabse pehle to jharkhand ke navyuvak ke jindagi ke sath khilwad kr rhe hai aur in swaym sewak ka bharti karwaye aur bolte hai jinhe rahna hai wo rahe aur jinhe jana hai chale jaye aapko job nhi janta ka seva krne ke liye chuna gaya hai aap seva kre, wo bhi bina salary ke, to sir aapse anurodh hai ki in garib nav yuvak ke jagah pe khada hoke dekhiye aur tb jara sochiye aap kitna khel rahe hai nav yuvak ke jindagi ke sath

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