रांची प्रेस क्लब से PTI संवाददाता इंदुकांत एक साल के लिए निलंबित, एजीएम की मीटिंग में घोषणा

रांची प्रेस क्लब से पीटीआई संवाददाता इंदुकांत दीक्षित को एक साल के लिए निलंबित कर दिया गया, जैसे ही इस बात की घोषणा हुई, एजीएम मीटिंग में शामिल हुए करीब-करीब सभी सदस्यों ने इस घोषणा का हर्ष एवं उल्लास के साथ हाथ उठाकर स्वागत किया। पीटीआई संवाददाता इंदुकांत दीक्षित पर आरोप था कि उन्होंने 15 नवम्बर को पत्रकारों-छायाकारों के साथ प्रशासनिक दुर्व्यवहार के विरोध में चल रहे आंदोलन का साथ नहीं दिया।

रांची प्रेस क्लब से पीटीआई संवाददाता इंदुकांत दीक्षित को एक साल के लिए निलंबित कर दिया गया, जैसे ही इस बात की घोषणा हुई, एजीएम मीटिंग में शामिल हुए करीब-करीब सभी सदस्यों ने इस घोषणा का हर्ष एवं उल्लास के साथ हाथ उठाकर स्वागत किया। पीटीआई संवाददाता इंदुकांत दीक्षित पर आरोप था कि उन्होंने 15 नवम्बर को पत्रकारों-छायाकारों के साथ प्रशासनिक दुर्व्यवहार के विरोध में चल रहे आंदोलन का साथ नहीं दिया और जब रांची प्रेस क्लब के अध्यक्ष राजेश सिंह समेत कई अन्य अधिकारियों ने उनसे सहयोग मांगा, उन्होंने पत्रकारों को सहयोग देने की अपेक्षा जिला प्रशासन के साथ क्रिकेट खेलने में ज्यादा दिलचस्पी दिखाई।

रांची प्रेस क्लब के अल्पकाल के समय में ये पहली निलंबंन की घोषणा है, जिसके शिकार पीटीआई संवाददाता इंदुकांत दीक्षित हुए। इंदुकांत दीक्षित को रांची प्रेस क्लब की सदस्यता से निलंबन का दबाव रांची प्रेस क्लब के उपर उसी दिन से प्रारंभ हो गया था, जब इंदुकांत दीक्षित ने पत्रकारों की बातें न मानकर, जिला प्रशासन के साथ क्रिकेट खेलने में दिलचस्पी दिखा दी थी, उसी दिन करीब-करीब रांची एवं अन्य जिलों के पत्रकारों ने इंदुकांत दीक्षित के इस व्यवहार की कड़ी निन्दा की थी तथा रांची प्रेस क्लब से इन्हें शीघ्रातिशीघ्र हटाने की मांग कर दी थी।

रांची प्रेस क्लब की आज की एजीएम मीटिंग में काफी गहमागहमी तथा हंगामा होने की संभावना शायद रांची प्रेस क्लब के अधिकारियों को था, शायद यहीं कारण था कि रांची प्रेस क्लब के पदाधिकारियों ने सदस्यों की बातें सुनने के पूर्व ही अध्यक्षीय भाषण तक संपन्न करा दिया, जबकि आम तौर पर अध्यक्षीय भाषण अंत में होते हैं, पर रांची प्रेस क्लब में ये शायद नई परंपरा की शुरुआत कर दी गई। जिसका विरोध कई सदस्यों ने खुलकर किया, जिसे रांची प्रेस क्लब के अधिकारियों ने नजरदांज कर दिया।

रांची प्रेस क्लब के अधिकारी कभी-कभी अपना धैर्य खो रहे थे

रांची प्रेस क्लब के एजीएम मीटिंग में शामिल कई सदस्यों ने इस बात को लेकर टिप्पणी की, कि बहुत दिनों के बाद प्रेस क्लब के अधिकारियों की एक साथ दर्शन हो रहे है, क्योंकि ये तो अपनी ही सामान्य मीटिंग में नहीं आते, अपना कोरम तक इनका पुरा नहीं होता, एजीएम में शामिल सुशील कुमार सिंह ने कई गंभीर सवाल दागे, जिसका सही जवाब रांची प्रेस क्लब के अधिकारियों के पास नहीं था, पर वे सुशील कुमार सिंह के प्रश्नों का उत्तर देने में कोई कोताही नहीं बरत रहे थे, एक सवाल था कि जब एजीएम की मीटिंग में आडिटर की नियुक्ति होनी है तो फिर रांची प्रेस क्लब के अधिकारियों ने बिना एजीएम की मीटिंग के ऑडिटर कैसे रख लिया।

एजीएम में शामिल कई सदस्यों ने सीसीएल के खिलाफ निंदा प्रस्ताव पारित करने का दबाव बनाया, जिसे रांची प्रेस क्लब के अधिकारियों ने सहमति जताई। कई रांची प्रेस क्लब के अधिकारियों के चेहरे पर तमतमाहट साफ दिख रही थी, प्रश्नों का सुनने का धैर्य समाप्त होता दिख रहा था, कई के चेहरे पर अधिकारी होने का घमंड साफ दिख रहा था, शायद यहीं कारण था कि उनका घमंड पल-पल छलक भी जा रहा था, जिसे कतई सही नहीं ठहराया जा सकता, आप अधिकारी है, एजीएम मीटिंग बुलाई हैं तो सदस्यों के प्रश्नों को ध्यान पुर्वक सुनें और उसका उचित जवाब दें।

शर्मनाक, पत्रकारों पर हुए लाठी चार्ज की अब तक प्राथमिकी दर्ज नहीं

रांची प्रेस क्लब की एजीएम मीटिंग में पहली बार पता चला कि 15 नवम्बर को पत्रकारों के उपर हुई लाठी चार्ज की घटना का अब तक प्राथमिकी दर्ज नही हुआ हैं, इससे बड़ा घोर आश्चर्य कुछ हो ही नहीं सकता, यानी जो समाचार रांची से दिल्ली के राष्ट्रीय चैनलों तक प्रसारित हो गया, उस खबर की अभी तक प्राथमिकी नहीं हुई, न तो पिटाई खाये और फिलहाल इलाज करा रहे किसी पत्रकार और छायाकार ने अपनी ओर से प्राथमिकी दर्ज कराई और न ही रांची प्रेस क्लब के अधिकारियों ने अपनी ओर से प्राथमिकी दर्ज करवाने में दिलचस्पी दिखाई, जबकि सच्चाई यह भी है कि रांची प्रेस क्लब का एक अधिशासी सदस्य पिंटू दूबे में भी लाठी चार्ज में चोटिल हुआ था यानी पुरा मामला गोलगंड हो गया, ऐसे हैं हमारे पत्रकार और छायाकार, जो अपनी लड़ाई लड़ने के लिए प्राथमिकी दर्ज कराने में भी भय खाते हैं। इससे बड़ा शर्मनाक और क्या हो सकता है?

रांची प्रेस क्लब के कैंटीन पर उठे सवाल

एजीएम मीटिंग में विपिन सिंह एवं संजीव मिश्र समेत कई सदस्यों ने रांची प्रेस क्लब में चल रहे कैंटीन का मुद्दा उठाया, सदस्यों का कहना था कि कैंटीन में हो रहे खर्च में भारी गड़बड़ियां है, भ्रष्टाचार है, जिस पर रांची प्रेस क्लब के अधिकारियों का कहना था कि जिन भी सदस्यों को इसमें गड़बड़ियां दिखाई पड़ती है, वे रांची प्रेस क्लब आकर किसी भी समय आय-व्यय का लेखा-जोखा देख सकते है, इसमें कही कोई गड़बड़ियां नहीं हैं। कुछ सदस्यों का कहना था कि एजीएम मीटिंग में आज भी कोरम पुरा नहीं हुआ है, पर प्रेस क्लब के अधिकारियों का कहना था ऐसा नहीं है, कोरम पुरा हैं अगर कोरम पुरा नहीं भी हैं, तो बॉइलॉज में इस बात का भी जिक्र है कि जितने सदस्य उपस्थित हो, उन्हें ही कोरम मानकर, सहमति ली जा सकती है।

रांची प्रेस क्लब का भविष्य सुखद

रांची प्रेस क्लब की आज की एजीएम मीटिंग कई बातों का संकेत दे गई, अगर अब सदस्य मर्यादा तोड़ेंगे और अपने पत्रकार मित्रों के प्रति प्रेम और सहृदयता नहीं दिखायेंगे तो उनके खिलाफ अब कड़ा ऐक्शन भी लिया जायेगा। इस एजीएम मीटिंग में रांची प्रेस क्लब के उन अधिकारियों को भी एक प्रकार से मैसेज चला गया कि अगली बार वे हार के लिए तैयार रहे या खुद न चुनाव लड़ने का फैसला ले लें, क्योंकि उन सभी की रिपोर्ट कार्ड एजीएम में शामिल सभी सदस्यों के पास है कि कौन नियमित रुप से आता है और कौन प्रेस क्लब के सदस्यों को धोखे में रख रहा है, आज की मीटिंग ने यह भी संदेश दे दिया कि रांची प्रेस क्लब का भविष्य उज्जवल है, आनेवाले समय में और गंभीर युवा पत्रकारों की टीम इससे जुड़ेंगी और इसके सम्मान को बढ़ाने में कोई कसर नहीं छोड़ेगी।

Krishna Bihari Mishra

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