राजनीति

बंगाल में शुरु हुआ पोस्टकार्ड युद्ध, पोस्टकार्ड में खूब छप रहे जयश्रीराम, टीएमसी ने लिया जय हिन्द, जय बांग्ला का सहारा

बंगाल में भाजपा को लोकसभा चुनाव में मिली अप्रत्याशित सफलता ने भाजपाइयों के हौसले बुलंद कर दिये हैं, पूरे बंगाल में जयश्रीराम की गूंज दिखाई पड़ रही हैं, भाजपा नेताओं ने ममता बनर्जी को दस लाख जयश्रीराम लिखा पोस्टकार्ड भेजने की तैयारी कर ली है, उधर ममता बनर्जी की पार्टी तृणमूल कांग्रेस ने भी करीब 20 लाख जयहिन्द, जय बांग्ला लिखा पोस्टकार्ड नरेन्द्र मोदी और अमित शाह को भेजने का फैसला कर लिया है।

दरअसल दोनों पार्टियां जो फिलहाल जयश्रीराम, जय हिन्द, जय बांग्ला लिखे पोस्टकार्ड युद्ध में कूद पड़े हैं, इन सब से इनदोनों का कोई मतलब नहीं हैं, इनका मेन मोटिव है, इसके सहारे एक दूसरे को बंगाल में होनेवाले विधानसभा चुनाव में परास्त करना, धूल चटाना। भाजपा को लगता है कि जैसे लोकसभा चुनाव में भाजपा को अप्रत्याशित सफलता मिली है, ठीक उसी प्रकार विधानसभा चुनाव में भी अप्रत्याशित सफलता मिलेगी।

इसलिए जयश्रीराम के नारे को वह भूलना नहीं चाहती, इधर टीएमसी को लगता है कि कहीं उसका जड़ ही नहीं उखड़ जाये, इसलिए भाजपा के नारे का काट निकालने में लगी है, जयश्रीराम का नारा वह बोल नहीं सकती, क्योंकि उसे लगता है कि भाजपा ने एक तरह से उसे पेंटेट करा लिया है, जयश्रीराम का नाम भाजपा के साथ जुड़ा हैं, इसलिए वह जय हिन्द और जय बांग्ला को चुन ली है।

इधर भाजपा नेताओं का कहना है कि टीएमसी जयहिन्द बोले या जय बांग्ला बोले, उससे उन्हें कोई एलर्जी ही नहीं, क्योंकि वे भी उतने ही श्रद्धा से जयहिन्द और जय बांग्ला बोलते है, इस कारण टीएमसी जिन उद्देश्यों को लेकर यह पोस्टकार्ड युद्ध में शामिल हो रही थी, उसका उसे कोई माइलेज मिलता नहीं दिख रहा, पर भाजपा के पोस्टकार्ड युद्ध और जयश्रीराम के नारे ने भाजपा की बंगाल में मजबूती दिला दी और अगर यह सिलसिला चलता रहा तो हो सकता है कि बंगाल विधानसभा के चुनाव में परिस्थितियां ही बदल जाये।

हालांकि आज ईद के मौके पर तृणमूल कांग्रेस नेत्री व बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने मुस्लिमों से अपील कर दी कि उन्हें यहां डरने की कोई जरुरत नहीं। उन्होंने सभी धर्मों के लोगों को एक साथ मिलकर रहने की सलाह दी, उन्होंने एक बात बहुत ही अच्छी कही कि हिन्दू का मतलब त्याग, मुस्लिमों का मतलब ईमान, ईसाई का मतलब प्रेम और सिक्खों का मतलब बलिदान होता है, इसे कभी भी नहीं भूलना चाहिए और यह सब अगर मिल जाये तो एक प्यारा हिन्दुस्तान दिखाई देता हैं, उन्होने सभी से यह भी कहा कि मुद्दई लाख बुरा चाहे तो क्या होता है, वही होता है, जो मंजूरे खुदा होता है।