धर्म के नाम पर मत बांटिएं, राजभवन के समक्ष राष्ट्रीय ईसाई महासंघ का धरना

ईसाई मिशनरियों को बदनाम करने की साजिश, भूमि अधिग्रहण संशोधन, ईसाई आदिवासी को जाति प्रमाण पत्र से वंचित करने के विरुद्ध और सरना कोड लागू करने की मांग को लेकर राष्ट्रीय ईसाई महासंघ के तत्वावधान में सैकड़ों आदिवासियों ने राजभवन के समक्ष एक दिवसीय धरना दिया।

ईसाई मिशनरियों को बदनाम करने की साजिश, भूमि अधिग्रहण संशोधन, ईसाई आदिवासी को जाति प्रमाण पत्र से वंचित करने के विरुद्ध और सरना कोड लागू करने की मांग को लेकर राष्ट्रीय ईसाई महासंघ के तत्वावधान में सैकड़ों आदिवासियों ने राजभवन के समक्ष एक दिवसीय धरना दिया।

हम बताते चले कि इन दिनों ईसाई मिशनरियों के साख पर प्रश्चचिह्न लगा हैं, जैसे गोड्डा में एक पादरी पर लगे यौन शोषण का मामला हो, या कोचांग मामले में एक पादरी पर दुष्कर्मियों द्वारा महिलाओं को न बचाने का मामला हो या मिशनरीज ऑफ चैरिटी से बच्चा बेचने का मामला, उधर केरल में भी कुछ पादरियों पर इसी प्रकार के यौन शोषण के मामले चल रहे हैं, जिसको लेकर पूरे ईसाई समाज में गहमागहमी हैं, कुछ लोगों को लगता है कि यह एक सुनियोजित साजिश के तहत ऐसा किया जा रहा हैं, और भाजपा वाले इसे मुद्दा बनाकर आम जनता के बीच इसकी साख को गिराने का काम कर रहे हैं, जबकि ईसाई मिशनरियां हर जगह अपनी सेवा के लिए जानी जाती हैं।

इन लोगों का ये भी कहना था कि एक व्यक्ति दोषी हो सकता है, पर उसके लिए सारी की सारी मिशनरियों को दोषी ठहराना किसी भी प्रकार से सही नहीं ठहराया जा सकता, जिसका विरोध होना ही चाहिए, आज इसी बात को लेकर राष्ट्रीय ईसाई महासंघ ने राजभवन के समक्ष अपना विरोध दर्ज कराया तथा ईसाई मिशनरियों को बेवजह बदनाम करने की योजना पर अविलम्ब रोक लगाने की मांग की। हम बता दे कि इधर कई सामाजिक संगठनों और राजनीतिक संगठनों ने भी ईसाई मिशनरियों को बदनाम करने की भाजपा की योजना की कड़ी आलोचना की है, तथा भाजपा को इस प्रकार की हथकंडे न अपनाने की सलाह भी दी गई, तथा धर्म के नाम पर समाज को तोड़ने की चल रही प्लानिंग की कड़ी आलोचना की गई।

Krishna Bihari Mishra

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हमारे विचार से, तथा समाचार के सामान्य नैतिक मूल्यों के अनुसार भी, प्रत्येक व्यक्ति को उसके इलाके में क्या-क्या घटना घट रही हैं, उसे जानने का हक हैं और उन तक उनके इस हक को पहुंचाने का दायित्व पत्रकारों/समाचार पत्रों का हैं, पर जब ये भी काम पत्रकार/समाचार पत्र बंद कर दें तो जनता को भी पूरा हक है कि ऐसे अखबारों/पत्रकारों का सामाजिक बहिष्कार करें।

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