ओडिशा के कलाकारों द्वारा जमशेदपुर में लगाई गई एकाम्रम 2023 को लोग उनकी बेहतर प्रदर्शनी के लिए लंबे समय तक रखेंगे याद

पिछले दिनों जमशेदपुर के होटल रामाडा में एक शानदार कार्यक्रम देखने को मिला। यहां उड़ीसा के कलाकारों की पेटिंग्स प्रदर्शनी एकाम्रम का आयोजन हुआ था। जिसमें मिसेज डेजी ईरानी, पूर्व टाटा स्टील अधिकारी शक्ति शर्मा और अन्य गणमान्य लोगों ने इस प्रदर्शनी का उद्घाटन कर यहां के लोगों के बीच एक अच्छी प्रदर्शनी रखी, जो यहां के लोगों में चर्चा का विषय बना रहा।

बताया जाता है कि इस प्रदर्शनी को 30 आर्टिस्टों के एक ग्रुप TOGETHER (टुगेदर) होटल रामाडा के साथ मिलकर आयोजित कर रहे थे। जिसका नेतृत्व आर्टिस्ट मानस रंजन जेना द्वारा किया जा रहा था। इन कलाकारों के द्वारा की गई पेंटिंग्स यहां के लोगों के ध्यान स्वतः अपनी ओर खींच रही थी। कार्यक्रम में शामिल लोगों की मान्यता थी कि वर्तमान भुवनेश्वर प्राचीन एकाम्रम है। माना जाता है कि मां दुर्गा ने यहीं पर महिषासुर राक्षस का वध किया था जिसके बाद इस जगह का नाम एकाम्रम पड़ा और यही आगे चलकर भुवनेश्वर कहा जाने लगा।

इस आयोजन को लेकर टाटा स्टील की पूर्व अधिकारी शक्ति शर्मा का कहना था कि इस प्रदर्शनी से कलाकारों को एक्सपोजर मिलेगा। उनका यह भी कहना था कि एक कलाकार के लिए उसकी कला की पहचान ही सबसे बड़ी बात है। जब प्रदर्शनी देखने आये लोग जब इनका उत्साह बढ़ाएंगे तो इन कलाकारों को आत्मीयता का बोध होगा और वे अपनी कला को और बेहतर करने की कोशिश करेंगे।

मिसेज डेजी ईरानी का कहना था कि इस प्रदर्शनी का आयोजन आर्टिस्टों का उत्साह बढ़ाने के लिए ही किया गया। उनके अनुसार सारी पेंटिंग्स अनूठी थी जो कुछ न कुछ संदेश दे रही थी, कुछ तो पेटिंग्स जीवंत थी। यह प्रदर्शनी तीन दिनों तक चली। पेटिंग्स के कद्रदानों का समूह यहां आकर न सिर्फ पेटिंग्स देखकर कलाकारों का उत्साह बढ़ा रहा था बल्कि कइयों ने इसे खरीदा भी, हालांकि आर्टिस्ट मानस रंजन जेना का कहना कि लोगों का आना ही उनके लिए सबसे ज्यादा सम्मानजनक बात थी।

प्रदर्शनी में कुल 30 आर्टिस्ट भाग ले रहे थे, जिनमें कई राष्ट्रीय स्तर के मशहूर कलाकार थे। उसके साथ ही युवा कलाकार भी जमशेदपुर पहुंचे थे। जिन्होंने हाल ही में आर्ट एंड क्राफ्ट की अपनी पढ़ाई पूरी की थी। इस प्रदर्शनी में राष्ट्रीय स्तर के जिन आर्टिस्टों ने भाग लिया, उनमें मानस रंजन जेना, नरेन्द्र मल्लिक, चंद्रमणि बिश्नोई, आशीष शरण प्रमुख थे।