रघुवर की सभा में लोग बुलाये और हेमन्त की बदलाव यात्रा में लोग खुद आते हैं, ये बड़ा फर्क है, हेमन्त-रघुवर में

राज्य के मुख्यमंत्री रघुवर दास झारखण्ड में कही भी जाते हैं, तो वहां के प्रशासनिक अधिकारियों पर सबसे बड़ा बोझ होता हैं, मुख्यमंत्री की सभा में भीड़ जुटाना। वे इसके लिए महीनों पहले से माथापच्ची करते हैं, उपायुक्त नीचे के पदाधिकारियों को लोगों को लाने के लिए वाहन, खाने-पीने की व्यवस्था, विशेष लोगों के लिए ठहरने की व्यवस्था पहले से करना शुरु कर देते हैं, पर नेता प्रतिपक्ष की सभा या वर्तमान में चल रही बदलाव यात्रा के लिए भीड़ कैसे लाई जाय,

राज्य के मुख्यमंत्री रघुवर दास झारखण्ड में कही भी जाते हैं, तो वहां के प्रशासनिक अधिकारियों पर सबसे बड़ा बोझ होता हैं, मुख्यमंत्री की सभा में भीड़ जुटाना। वे इसके लिए महीनों पहले से माथापच्ची करते हैं, उपायुक्त नीचे के पदाधिकारियों को लोगों को लाने के लिए वाहन, खाने-पीने की व्यवस्था, विशेष लोगों के लिए ठहरने की व्यवस्था पहले से करना शुरु कर देते हैं, पर नेता प्रतिपक्ष की सभा या वर्तमान में चल रही बदलाव यात्रा के लिए भीड़ कैसे लाई जाय, इसका प्रबंध करने की आवश्यकता झामुमो को नहीं पड़ती, लोग खुद ब खुद आते हैं, नेता प्रतिपक्ष हेमन्त की सुनते हैं और सपनों को लेकर चल देते हैं।

इधर देख रहा हूं कि बदलाव यात्रा में उमड़ रही भीड़ स्पष्ट कर रही हैं कि राज्य में वर्तमान सरकार के खिलाफ लोगों में कितना गुस्सा हैं जो इस भीड़ में प्रकट होती है। ज्यादातर जगहों पर हेमन्त, आम जनता की ही भाषा में बात रखते हैं, जिससे लोगों को लगता है कि उनका नेता, उनकी ही भाषा में बात कर रहा हैं। जिस दिन वे साहेबगंज से निकले, उन्होंने युवाओं से वायदे किये, कि वे घबराये नहीं, उनकी सरकार सत्ता में आते ही वह काम पहले करेगी जो युवाओं से संबंधित हैं, वे रोजगार मुहैया करायेंगे और जब तक रोजगार मुहैया नहीं होती, उन्हें बेरोजगारी भत्ता दिया जायेगा।

बदलाव यात्रा के क्रम में जब उनका कार्यक्रम दुमका में होता हैं तो दुमका में बदलाव यात्रा में शामिल लोगों का हुजूम देखते बनता है, बीच-बीच में हेमन्त सोरेन जिन्दाबाद, झारखण्ड मुक्ति मोर्चा जिन्दाबाद का नारा लोगों में जोश भरता रहता है, वहीं आम जनता के बीच पनपे जोश से मंच स्थित झामुमो के बड़े-बड़े नेताओं को लगता है कि आनेवाला समय उन्हीं का है। हेमन्त सोरेन अपने भाषण में कहते है कि चिन्ता नहीं करें, उनका वादा है कि उनकी सरकार आते ही, जरुरतमंदों को तीन लाख रुपये आवास बनाने के लिए मिलेगा, झारखण्डी लोग कर्ज में रहे, उन्हें बर्दाश्त नहीं, सभी को अपने बलबूते पर सुविधाओं से सुसज्जित घर हो, झामुमो ऐसा सुनिश्चित करेगी।

दुमका में ही वे युवाओं से आह्वान करते है कि वे खुद को कमजोर न समझे, संघर्ष करने के लिए तैयार रहे और राज्य में अपने सपने कैसे पूरे हो, इसके लिए तैयारी करें, राज्य में अपनी सरकार बनाये, झामुमो की सरकार बनाये। वे बदलाव यात्रा के दौरान, 19 अक्टूबर को रांची आने का निमंत्रण देना नहीं भूलते, वे कहते है कि रांची आकर राज्य सरकार को बताइये कि आपको वे पसंद नहीं, राज्य में तीर-धनुष का शासन चाहिए। हेमन्त सोरेन कहते है कि उनके शासन में आते ही, उसके दूसरे दिन महिलाओं को नौकरी में पुनः 50 प्रतिशत आरक्षण बहाल करेंगे, क्योंकि वर्तमान सरकार ने राज्य की महिलाओं का उसका हक छीना है।

जामताड़ा पहुंचते ही, वे जनसभा में कहते है कि वर्तमान सरकार बहुरुपिया सरकार है, वर्तमान में चारा फेंको कार्यक्रम चला रही है, जबकि इस सरकार के शासनकाल में एक दर्जन से ज्यादा किसान भाई-बहन कर्ज में दबकर आत्महत्या कर लिये। बड़ी-बड़ी कंपनियों को पानी देने के लिए पाइप बिछाए जा रहे हैं, पर किसानों को देने के लिए इनके पास पानी नहीं हैं। हेमन्त सवाल करते है कि 2016 से अब तक झारखण्ड से 700 करोड़ से उपर का फसल बीमा का प्रीमियम कंपनियों को दिया गया, मगर क्लेम सिर्फ 70 करोड़ ही किसानों को क्यों दिया गया? बाकी के पैसे कहां और किसके पास हैं? भाजपा को जवाब देना होगा।

गोड्डा में जबर्दस्त भीड़ उमड़ी है। गोड्डा में आम जनता को संबोधित करते हुए वे कहते है कि चिन्ता न करें, वे आप सब के सपनों का झारखण्ड बनायेंगे, जहां चूहे नहर नहीं गटक पायेंगे, झारखण्ड और झारखण्डियत को कोई छू नहीं पायेगा। गोड्डा में वे एक संवाददाता सम्मेलन भी करते हैं और राज्य में अखबारों-चैनलों द्वारा की जा रही रघुवर भक्ति पर चिन्ता जताते हैं, एक पत्रकार द्वारा प्रभात खबर में छपे एक सवाल पर, वे सीधे उक्त पत्रकार से ही यह पूछते है कि आप गलत समाचार पर हमसे सवाल कर रहे हो, पर ये सवाल क्यों नहीं पूछते कि नोटबंदी के दौरान मिले रुपये का मुख्यमंत्री के साले ने क्या किया?

उसके खिलाफ हाईकोर्ट में केस भी हुआ, उस पर सवाल क्यों नहीं करते? ऐसा नहीं कि हम नहीं जानते कि राज्य में क्या हो रहा हैं, कल का मीडिया और आज के मीडिया में काफी अंतर आया है, आज का मीडिया सत्य नहीं लिखता, वह सरकार की चाकरी करता है, जो इस राज्य की जनता के लिए दुर्भाग्य है, कल का मीडिया वॉच डॉग की भूमिका में था, और आज का मीडिया पेटडॉग बन गया।

Krishna Bihari Mishra

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