राजनीति

जनता लाइन में, पूंजीपति फायदे में, भाजपा राज में आम आदमी सबसे ज्यादा परेशान, महंगाई, बेरोजगारी और कारपोरेटपरस्ती ने देश को संकट में धकेला : विनोद पांडेय

भारतीय जनता पार्टी नेतृत्व वाली केंद्र सरकार ने पिछले 11 वर्षों में देश की आम जनता को राहत देने के बजाय लगातार संकट, महंगाई और असुरक्षा की स्थिति में धकेलने का काम किया है। आज देश का मध्यम वर्ग, किसान, मजदूर, युवा और छोटे व्यापारी सभी आर्थिक दबाव और अस्थिरता से जूझ रहे हैं, जबकि सत्ता पक्ष केवल प्रचार, इवेंट प्रबंधन और बड़े उद्योगपतियों के हित साधने में व्यस्त दिखाई देता है।

नोटबंदी के दौरान आम लोगों को घंटों बैंक की कतारों में खड़ा रहना पड़ा। कोविड काल में अस्पताल, ऑक्सीजन और दवाइयों के लिए जनता त्राहिमाम करती रही। आज भी रसोई गैस, पेट्रोल-डीज़ल, खाद्य सामग्री और रोजमर्रा की जरूरतों की बढ़ती कीमतों ने आम परिवारों का बजट बिगाड़ दिया है। अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट आने के बावजूद जनता को राहत नहीं दी गई, जबकि तेल कंपनियां रिकॉर्ड मुनाफा कमा रही हैं। यह स्पष्ट करता है कि केंद्र सरकार की प्राथमिकता जनता नहीं, बल्कि कॉर्पोरेट हित हैं।

भाजपा सरकार लगातार जनता को त्याग, बचत और राष्ट्रहित का उपदेश देती है। पेट्रोल कम खर्च करो, विदेश मत जाओ, डॉलर बचाओ। लेकिन, दूसरी ओर बड़े उद्योगपतियों के विदेशी निवेश और विशेष आर्थिक सुविधाओं पर कोई सवाल नहीं उठाया जाता। आम नागरिकों पर राष्ट्रभक्ति का बोझ डाला जाता है, जबकि सत्ता के करीब बैठे लोगों को हर प्रकार की छूट दी जाती है। यह दोहरी नीति देश के लोकतांत्रिक और सामाजिक संतुलन के लिए घातक है।

देश को एक ऐसी सरकार की आवश्यकता है जो जनता को राहत दे, रोजगार सृजित करे, महंगाई नियंत्रित करे और सामाजिक सौहार्द बनाए रखे। दुर्भाग्य से वर्तमान केंद्र सरकार ने बेरोज़गारी, आर्थिक असमानता, सामाजिक तनाव और विभाजनकारी राजनीति को बढ़ावा देने का कार्य किया है। झारखंड मुक्ति मोर्चा स्पष्ट रूप से मानता है कि लोकतंत्र में सरकार जनता के प्रति जवाबदेह होती है, न कि चुनिंदा पूंजीपतियों के प्रति। जनता अब सवाल पूछ रही है और आने वाले समय में देश की जनता अपने लोकतांत्रिक अधिकारों के माध्यम से इसका जवाब भी देगी।

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