अंधेरे में मन रहा दुर्गापूजा का त्यौहार, मां के भक्तों में रघुवर सरकार के प्रति गहरा आक्रोश

सुमित प्रसाद अपने परिवार के साथ निकले है, दुर्गा पंडालों का परिभ्रमण करने के लिए, पूरा परिवार प्रसन्न है, पर ये क्या?  घर से निकलते चार-पांच कदम चले ही थे कि बिजली गुल हो गई। अचानक अंधेरा छा गया, कुछ दिखाई ही नहीं पड़ रहा। वे और उनका परिवार सड़क के किनारे एक कोने का सहारा लिया। तभी सामने से आती मनचलों की भीड़ से उनका सामना हो गया।

सुमित प्रसाद अपने परिवार के साथ निकले है, दुर्गा पंडालों का परिभ्रमण करने के लिए, पूरा परिवार प्रसन्न है, पर ये क्या?  घर से निकलते चार-पांच कदम चले ही थे कि बिजली गुल हो गई। अचानक अंधेरा छा गया, कुछ दिखाई ही नहीं पड़ रहा। वे और उनका परिवार सड़क के किनारे एक कोने का सहारा लिया। तभी सामने से आती मनचलों की भीड़ से उनका सामना हो गया, जैसे-तैसे उन्होंने अपने और अपने परिवार का सम्मान बचाना ज्यादा जरुरी समझा, सो वे कुछ देर वहीं खड़े रहे। थोड़ी जब भीड़ कम दिखाई पड़ी तो वे आगे की ओर चले।

चेहरा तमतमाया हुआ था। बार-बार राज्य की रघुवर सरकार को वे कोसे जा रहे थे। भाई इतना बड़ा त्योहार, जब आदमी घर में नहीं रहता, अपने परिवार के साथ निकलता है, परिभ्रमण के लिए, तो ऐसे में बिजली की बेहतर व्यवस्था का इंतजाम तो सरकार को करना चाहिए, पर जैसी निकम्मी सरकार है, वैसे ही निकम्मे उसके अधिकारी, तो जो झारखण्ड का हाल है, वह सामने हैं।

कोई ऐसा दिन नहीं, जिस दिन बिजली तीन-तीन घंटे, चार-चार घंटे गायब नहीं रह रही हो, शाम के 6 बजे और रात के नौ-दस बजे तक बिजली के दर्शन नहीं, जबकि यही वह समय होता है, जब लोग अपने नन्हें-मुन्नों के साथ घर से निकलते है, घुमने के लिए। एक तो बिजली नहीं रहने के कारण चलने में परेशानी और दूसरा विद्युत सजावट न देखने का मलाल, आग में घी का काम कर रहा। सभी राज्य सरकार को कोस रहे हैं।

गांव के हालात तो इससे भी ज्यादा खराब है, राज्य के कई गांवों में तीन-तीन, चार-चार दिनों से बिजली नहीं है और राज्य सरकार 2018 तक सभी गांवों में बिजली की व्यवस्था कर देने की बात कह रही है, क्या गांवों में खंभे गाड़ने और बिजली के तार पहुंचा देने से ही समस्या का समाधान हो जाता है?

जरा चंदनकियारी की घटना देखिये। वहां के मानपुर डिवीजन में तीन दिनों से बिजली नहीं होने के कारण वहां के ग्रामीण आक्रोशित हो गये और उन्होंने वहां के एसडीओ और अन्य बिजली अधिकारियों को बंधक बनाने की कोशिश की। यह केवल एक जगह की घटना नहीं, पूरे झारखण्ड का बुरा हाल है, पर सीएम रघुवर दास के भाषण से लगता है कि सारी बिजली उस उड़ते हाथी में घुस गई है, जिस उड़ते हाथी को, उन्होंने मोमेंटम झारखण्ड के दौरान, मूर्ख सलाहकारों व मूर्ख प्रशानिक अधिकारियों के निर्देश पर बनवाया था। जिस कारण उनकी फजीहत आम से लेकर खास लोग कर चुके हैं, पर सीएम रघुवर दास को इससे कोई फर्क नहीं पड़ता।

बिजली की इस दुर्दशा और राज्य की जनता को हो रही दिक्कतों पर एक व्यंग्यकार ने बड़ी अच्छी ही टिप्पणी की, कि रघुवर विरोधी बेकार ही रघुवर दास के खिलाफ आग उगल रहे हैं, मैं तो कहता हूं कि जितना दिन रघुवर दास झारखण्ड की सत्ता पर काबिज रहेंगे, उतने ही वेग से 2019 के चुनाव में यहां की विपक्षी दल सत्ता पर काबिज होगी। व्यंग्यकार ये भी कहते है कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और अमित शाह को भगवान सद्बुद्धि दे कि वे रघुवर दास को यहां की सत्ता से न हटाएं क्योंकि बढ़ते जनाक्रोश और घटती जनसुविधाओं से ही यहां के विपक्ष का भला होगा।

अब नवरात्र के एक दिन ही शेष बचे है, इधर लग नहीं रहा कि राज्य में बिजली की स्थिति इतनी जल्दी सुधरेगी, क्योंकि राज्य के सभी प्रशासनिक अधिकारी अपने परिवारों के साथ नवरात्र की मस्ती में डूबे है, सीएम जमशेदपुर में अपने परिवार के साथ समय बिता रहे है, जनता भाड़ में जाये, जनता को दिक्कत हो रही हैं तो उससे राज्य के सीएम रघुवर दास को क्या मतलब?

Krishna Bihari Mishra

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