कांग्रेस और विपक्ष ध्यान दें, जनता को मोदी की आलोचना से मतलब नहीं, विकल्प से मतलब हैं…

केवल नरेन्द्र मोदी का खिलाफत करने से ही काम नहीं चलेगा, नरेन्द्र मोदी से बेहतर बनने की कोशिश भी करनी होगी, तब जाकर जनता में कहीं पैठ बनेगी, उसके बाद ही जनता विचार करेगी कि क्या विपक्ष का यह व्यक्ति सचमुच नरेन्द्र मोदी का विकल्प है या ऐसे ही गला फाड़कर नेता बनने की कोशिश कर रहा है? सच्चाई यह है कि फिलहाल देश में विपक्ष कहीं नजर हीं नहीं आ रहा है, जो एक-दो विपक्ष है भी, तो वे क्षेत्रीय राजनीति में इस प्रकार से उलझे है

केवल नरेन्द्र मोदी का खिलाफत करने से ही काम नहीं चलेगा, नरेन्द्र मोदी से बेहतर बनने की कोशिश भी करनी होगी, तब जाकर जनता में कहीं पैठ बनेगी, उसके बाद ही जनता विचार करेगी कि क्या विपक्ष का यह व्यक्ति सचमुच नरेन्द्र मोदी का विकल्प है या ऐसे ही गला फाड़कर नेता बनने की कोशिश कर रहा है? सच्चाई यह है कि फिलहाल देश में विपक्ष कहीं नजर हीं नहीं आ रहा है, जो एक-दो विपक्ष है भी, तो वे क्षेत्रीय राजनीति में इस प्रकार से उलझे है कि उन्हें राष्ट्रीय राजनीति के लिए समय ही नहीं है, ऐसे भी वे शायद नरेन्द्र मोदी को एक तरह से वाक् ओवर दे चुके है।

मोदी की लोकप्रियता से घबराई ममता ने भाजपा छोड़ो आंदोलन की घोषणा कर डाली

हाल ही में ममता बनर्जी ने कोलकाता में रैली की और उस रैली में उमड़े जनसमूह से उत्साहित, ममता बनर्जी ने बयान दिया कि वे भाजपा को हटाने के लिए किसी भी नेता से हाथ मिलाने को तैयार है। उन्होंने तो भाजपा भारत छोडों का नारा भी दे दिया है। भाजपा भारत छोड़ों का नारा उन्होंने क्यों दिया? ये बंगाल की सारी जनता जान चुकी है,  क्योंकि बंगाल में उन्हें खतरा न माकपा से है और न ही अन्य वामपंथी संगठनों से। आनेवाले समय में तृणमूल को सबसे बड़ा खतरा भाजपा से हैं। ऐसे भी बंगाल में भाजपा को सत्ता का स्वाद चखाने का काम स्वयं ममता बनर्जी ने किया था, जब उन्होंने अटल बिहारी वाजपेयी के शासनकाल में भाजपा से हाथ मिलाया। आज स्थिति ऐसी है कि भाजपा पूरे बंगाल में तृणमूल को करारी टक्कर दे रही है और रही बात कोलकाता में जनसमूह उमड़ने की, तो साफ बात है कि किसी की भी सरकार रहेगी और वह कोई भी रैली करेगी तो भीड़ उमड़ेंगा, भीड़ कैसे और क्यों लाई जाती है? भारत के सारे राज्यों की जनता जानती है?  ममता बनर्जी को यह नहीं भूलना चाहिए कि बंगाल के ही अति सम्मानीय, कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और कई प्रमुख मंत्रालयों को संभाल चुके तथा पूर्व राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी ने समय-समय पर प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की खुलकर प्रशंसा की है। प्रणब मुखर्जी का प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी का प्रशंसा करना कोई सामान्य घटना नहीं है।  ये बहुत बड़ी बात है, क्योंकि उनकी धर्मनिरपेक्षता पर कोई सवाल नहीं खड़ा कर सकता। राष्ट्रपति रहते हुए अपने अंतिम भाषण में उन्होंने जिस प्रकार से बिना राग लपेट के यह बात कही कि “मैं हर कदम पर मोदी के परामर्श व सहयोग से लाभान्वित हुआ हूं, वह पूरे उत्साह व कर्मठता से देश में परिवर्तन लाने का कार्य कर रहे है” ये कोई सामान्य बात नहीं।

बिहार और यूपी में मोदी का विपक्ष के पास कोई विकल्प नहीं

बिहार में लालू प्रसाद यादव का परिवार प्रेम, पत्नी प्रेम, पुत्र-पुत्री प्रेम, चारा घोटाला के बाद, भूमि घोटाला, अकूत संपतियों का मिलना, भ्रष्टाचार का रिकार्ड तोड़ना बताता है कि बिहार के लालू प्रसाद यादव के प्रति बिहार का एक खास वर्ग ही सिर्फ जातीयता के कारण उन्हें अपना नेता मानता है, जबकि अन्य जगहों पर इनको कोई पुछता नहीं, यहीं हाल उत्तर प्रदेश में मुलायम सिंह यादव का है। बसपा के मायावती का तिलिस्म टूट चुका है, जबकि बिहार में ही नीतीश कुमार की लोकप्रियता लालू प्रसाद यादव के साथ संबंध रखने के कारण दिन-प्रतिदिन गिरती जा रही है, चाहे वे इस बात को स्वीकारे अथवा न स्वीकारें और अब बात कांग्रेस के राहुल गांधी की, जनता के सामने इनकी छवि पप्पू की है। सोशल साइट में नजर डाले, तो युवाओं के ये नेता कम नजर आते है, जबकि जो इनकी उम्र है, उसके आधार पर इन्हें युवाओं का नेता होना चाहिए था, क्योंकि ऐसे भी फिलहाल देश में युवाओं की जनसंख्या सर्वाधिक है, पर इनकी सोच और संवाद ने इन्हें कहीं का नहीं छोड़ा….

राहुल गांधी नरेन्द्र मोदी के आगे कहीं नहीं टिकते

जब आप प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी को टक्कर देने की बात करते हो, तो जरा सोचो, उनके बारे में पता लगाओं, उनकी दिनचर्या देखो, वे देश को कितना समय देते है, यह देखो, क्या किया और क्या नहीं किया? उसकी तथ्यात्मक रिपोर्ट देश की जनता के समक्ष रखो, तब जाकर देश की जनता आपको अपना नेता या मोदी का विकल्प मानेगी, केवल कह देने से नहीं।

बेहतर लोकतंत्र के लिए सुंदर और स्वस्थ विपक्ष और उसके नेता का होना आवश्यक

आज की जो स्थिति है, उस स्थिति में नरेन्द्र मोदी विपक्ष के नेताओं पर सबसे भारी है। हाल ही में पूर्व से लेकर पश्चिम और उत्तर से लेकर दक्षिण तक भाजपा की जो पैठ उन्होंने बढ़ाई, भाजपा के प्रति लोगों का विश्वास बढ़ाया, वो ऐसे ही नहीं बढ़ गया। आज की युवा पीढ़ी स्वीकारती है कि नरेन्द्र मोदी के आने से विश्व में भारत का मान बढ़ा है। जो चीन हमें आंख दिखाता था, आज उस चीन की हालत हमने खराब की है, भूटान जैसा छोटा देश हम पर विश्वास कर रहा है और हमारे साथ है। यहीं नहीं डोकलाम पर पूरे विश्व का समर्थन भारत को मिला है। जीएसटी पर देश के सारे राज्य एक साथ हुए है, बांगलादेश से जो हमारा जमीन विवाद चला आ रहा था, उसे नरेन्द्र मोदी ने सदा के लिए समाप्त कराया है। बिना अवकाश के देश के प्रति निष्ठा और समर्पण का भाव आज किस नेता में है। जो चैनल कल तक गुजरात दंगे को लेकर हरदम उन्हें नीचा दिखाने की कोशिश करते थे, उनके हालत खराब है, पर राहुल गांधी जी आप क्या कर रहे हैं? आप तो जब देश में महत्वपूर्ण घटनाएं घटती है तो देश की जनता को खबर मिलती है कि आप अपने नानी से मिलने, इटली गये है। जब डोकलाम में हमारी सेना के जवान, जब चीन से आर-पार के मूड में हैं तो चुपके से आप चीन के राजदूत से मिलते है, पहले इस मिलने की घटना को छूपाते है और बाद में जब प्रुफ सबके सामने होते है तो आप कहते है कि मिले तो क्या हो गया? हद हो गयी, जिस नेता के पास संस्कार और चरित्र न हो, वो भारत का नेतृत्व कैसे करेगा?  इसलिए सबसे पहले स्वयं को सुधारिये, जनता को दिखलाइये कि आप नरेन्द्र मोदी का विकल्प हो सकते है, तब जाकर जनता आपके समक्ष, आपके साथ आयेगी, क्योंकि देश में एकपक्षीय शासन निरंकुशता को जन्म देता है, इसलिए बेहतर लोकतंत्र के लिए सुंदर और स्वस्थ विपक्ष और उसके नेता का होना आवश्यक है।

Krishna Bihari Mishra

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