परमहंस योगानन्द लिखित पुस्तक ‘एक योगी की आत्मकथा’ ने मेरी जिंदगी ही बदल डाली – रजनीकांत

दक्षिण भारत के सुप्रसिद्ध सुपर स्टार और हिन्दी फिल्मों में भी अपनी गहरी पकड़ रखनेवाले सुप्रसिद्ध अभिनेता रजनीकांत का कहना है कि उनके जीवन में एक पुस्तक ने ऐसी उधम मचाई कि उनके जीवन को ही पूरी तरह से पलट कर रख दिया, वो पुस्तक थी “परमहंस योगानन्द द्वारा लिखित पुस्तक – एक योगी की आत्मकथा”। उनका कहना है कि 1978 में इन्होंने पहली बार इस पुस्तक को खरीदा और करीब 25 वर्षों तक वे इस पुस्तक के सम्पर्क में रहे,

दक्षिण भारत के सुप्रसिद्ध सुपर स्टार और हिन्दी फिल्मों में भी अपनी गहरी पकड़ रखनेवाले सुप्रसिद्ध अभिनेता रजनीकांत का कहना है कि उनके जीवन में एक पुस्तक ने ऐसी उधम मचाई कि उनके जीवन को ही पूरी तरह से पलट कर रख दिया, वो पुस्तक थी “परमहंस योगानन्द द्वारा लिखित पुस्तक – एक योगी की आत्मकथा”। उनका कहना है कि 1978 में इन्होंने पहली बार इस पुस्तक को खरीदा और करीब 25 वर्षों तक वे इस पुस्तक के सम्पर्क में रहे, जिसकी वजह से उनकी जिंदगी ही बदल गई।

रजनीकांत का कहना है कि “परमहंस योगानन्द द्वारा लिखित पुस्तक – एक योगी की आत्मकथा” में ऐसे-ऐसे शब्द हैं तथा इस पुस्तक में ऐसे-ऐसे भाव और सार छुपे हैं, जिसकी परिकल्पना नहीं की जा सकती, जिसका वर्णन नही किया जा सकता, उसे सिर्फ महसूस किया जा सकता है। रजनीकांत ने कहा कि जब वे पुस्तक पढ़ने लगे, और जैसे-जैसे इसमें रुचि बढ़ती गई, वे योगदा सत्संग सोसाइटी के सम्पर्क में आये, उनका रांची भी आना हुआ, क्रिया योग के बारे में जाना, प्राणायाम को समझा और फिर उनका पूरा हृदय अद्भुत ईश्वरीय प्रेम से भर उठा, उसके बाद उनके जीवन में गजब के जादूई परिवर्तन हो गये।

रजनीकांत का कहना है कि “परमहंस योगानन्द द्वारा लिखित पुस्तक – एक योगी की आत्मकथा” में परमहंस योगानन्द जी ने बड़े ही सुंदर ढंग से इस बात की जिक्र किया है कि कैसे हमारे हिमालय की कंदराओं में रहनेवाले महान गुरु महावतार बाबा जी ने क्रियायोग के गुढ़ रहस्यों से लाहिड़ी महाशय का परिचय कराया, फिर लाहिड़ी महाशय ने अपने शिष्य युक्तेश्वरजी को और युक्तेश्वर जी के बाद यही क्रियायोग परमहंस योगानन्द जी को प्राप्त हुआ और परमहंस योगानन्द जी ने इस महानतम् क्रिया योग को जन-जन तक सुलभ कराया, ताकि हम सब भी इस परम आनन्द को प्राप्त कर सकें।

रजनीकांत ने कहा है कि यह क्रियायोग पूर्व में हमारे देश के सिद्ध महात्माओं, ऋषियों, महान संन्यासियों तक ही सुलभ था, पर महावतार बाबा जी चाहते थे कि ये सर्वजन के लिए सुलभ हो, इसलिए उन्होंने इसके लिए लाहिड़ी महाशय को, लाहिड़ी महाशय ने युक्तेश्वरजी को और युक्तेश्वर जी ने अपने परम प्रिय गुरुदेव परमहंस योगानन्द को चुना, जिसके कारण यह क्रियायोग आज सर्वजन के लिए सुलभ है, और उसनें योगदा सत्संग सोसाइटी प्रमुख भूमिका निभा रही है।

रजनीकांत का कहना है कि परमहंस योगानन्द जी द्वारा लिखित यह पुस्तक विश्व के किसी भी भाषाओं में सर्वाधिक बिकनेवाली पुस्तकों में शामिल है, आज विश्व के बहुत सारे लोग इस पुस्तक के माध्यम से अपने जीवन को आलोकित कर रहे हैं, रजनीकांत ने लोगों से कहा कि वे भी परमहंस योगानन्द द्वारा लिखित पुस्तक एक योगी की आत्मकथा को पढ़े, आजकल यह पुस्तक ऑडियों के रुप में भी उपलब्ध है, उसे सुने तथा स्वयं को आध्यात्मिकता से जोड़कर, जीवन को सही दिशा दें, इस कार्य में देश में फैले योगदा सत्संग सोसाइटी की विभिन्न शाखाएं आपकी मदद करने को तैयार है।

Krishna Bihari Mishra

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