पारा टीचरों, स्थापना दिवस के दिन पिटाओ, बिना मानदेय होली मनाओ और अब चुनाव में BJP का साथ दो

पारा टीचरों, स्थापना दिवस के दिन पिटाओ, बिना मानदेय होली मनाओ और अब चुनाव में BJP का साथ दो, रही बात समस्या की, तो हम सब ठीक कर देंगे। भाई, इसे कहते हैं नेता। नेता पहले पिटवाता है। बिना मानदेय/वेतन के काम करवाता है, पर्व-त्योहारों में भी मानदेय/वेतन के लिए तरसवा देता है, और जब चुनाव आता हैं तो जिन्हें पहले पिटवाया, मरने पर मजबूर किया, उन्हें अपने आवास बुलवाकर, उनकी सारी मांगों को सहानुभूति पूर्वक विचार करने का आश्वासन दे डालता हैं।

पारा टीचरों, स्थापना दिवस के दिन पिटाओ, बिना मानदेय होली मनाओ और अब चुनाव में BJP का साथ दो, रही बात समस्या की, तो हम सब ठीक कर देंगे। भाई, इसे कहते हैं नेता। नेता पहले पिटवाता है। बिना मानदेय/वेतन के काम करवाता है, पर्व-त्योहारों में भी मानदेय/वेतन के लिए तरसवा देता है, और जब चुनाव आता हैं तो जिन्हें पहले पिटवाया, मरने पर मजबूर किया, उन्हें अपने आवास बुलवाकर, उनकी सारी मांगों को सहानुभूति पूर्वक विचार करने का आश्वासन दे डालता हैं।

वह भी तब जबकि भूखों मरनेवाला जानता है कि अभी चुनाव हैं, कुछ नहीं होनेवाला और जो कुछ होगा, वह भी चुनाव के बाद, और जब चुनाव संपन्न हो जायेगा, तो फिर जो अभी बड़े ही प्रेम से अपने आवास पर बुलवाकर गोल-गोल बातें कर रहा हैं, वहीं फिर अपने आवास पर उन्हें रोकने के लिए चौकीदारों की जमात बिठा देगा और कहेगा कि उन्हें पांच-सौ मीटर दूर ही रोक दो, क्योंकि इससे शांति-व्यवस्था को खतरा उत्पन्न हो जायेगा।

हम बात कर रहे हैं राज्य के पारा शिक्षकों की, जिन्हें पिछले पांच महीनों से मानदेय नहीं मिला है। जिन पारा शिक्षकों को राज्य स्थापना दिवस के दिन पुलिसकर्मियों द्वारा जमकर पिटवाया गया, जिसकी मार से कई पारा शिक्षक काल-कलवित हो गये, कई पारा-शिक्षकों के घर भूखों मरने का संकट है, कई तो आत्महत्या करने तथा कई तो एक दिन भीख मांगने के लिए अवकाश देने की भी अपने वरीय अधिकारियों से मांग कर चुके हैं।

पर इन पारा शिक्षकों की इन समस्याओं को दूर करने की हिम्मत राज्य के मुख्यमंत्री रघुवर दास ने नहीं दिखाई, लेकिन जैसे ही लोकसभा चुनाव आया, अपने उम्मीदवारों को हार की चिन्ता मुख्यमंत्री रघुवर दास को सताने लगी, तब इन्होंने अपने आवास पर पारा शिक्षकों के एक प्रतिनिधिमंडल को बुलाया, जमकर बात-चीत की, उन्हें भरोसा दिलाया कि, सारी समस्याओं को निदान हो जायेगा, चिन्ता न करें, मैं हूं न।

अब बात यहां ये आती है कि क्या सीएम रघुवर दास के इन बातों पर पारा शिक्षकों का दल यह भूल जायेगा कि उनके पारा शिक्षकों की राज्य स्थापना दिवस के दिन इन्हीं की सरकार ने पिटवाया, उस पिटाई से कई पारा शिक्षक काल-कलवित हो गये, आज भी कई पारा-शिक्षक भीख मांगने को मजबूर हैं, बिना मानदेय के होली मनाई, पांच महीने से आज भी मानदेय नहीं मिला, कई घरों में चूल्हा-चौका नहीं जल रहा।

हमें तो नहीं लगता कि कोई पारा शिक्षक भूल पायेगा, पर जो पारा शिक्षक आज मुख्यमंत्री आवास, मुख्यमंत्री रघुवर दास से मिलने गये थे, वे इतने प्रसन्न थे कि उनका चेहरा बता रहा था कि उन्होंने साक्षात् भगवान का दर्शन कर लिया हो, इसका प्रमाण देखना हो, तो इसी में एक पारा टीचरों को सीएम से मिलते दिखाया गया है, जरा देख लीजिये, असलियत पता चल जायेगा।

इधर जब विद्रोही24.कॉम ने राज्य के पारा शिक्षक संघ के संरक्षक एवं अनुबंध कर्मचारी संघ के अध्यक्ष विक्रांत ज्योति से इस संबंध में बात की, तब उनका कहना था कि पारा टीचरों पर जो मुख्यमंत्री रघुवर दास ने अत्याचार किया है, उस अत्याचार को भला हम पारा शिक्षक कैसे भूल सकते हैं, आज जब लोकसभा चुनाव सर पर हैं, तो मुख्यमंत्री रघुवर दास को पारा टीचर याद आ रहे हैं, ये पारा टीचर क्यों याद आ रहे हैं, हमलोग अच्छी तरह समझते हैं।

पारा टीचरों का समूह इस बात को खूब समझता है कि वर्तमान सरकार ने उनके साथ कितना बड़ा अन्याय किया है, लोकतंत्र में लोकसभा चुनाव हो या विधानसभा चुनाव, इसीलिये तो आते है कि ऐसी सरकार को सबक सिखाया जाये, जो जनहित की बात नहीं करती, भला हम उन पारा टीचरों को कैसे भूल जाये, जिन्होंने इस सरकार के अत्याचार के कारण दम तोड़ दिया, जिनके परिवार आज भी खून के आंसू बहा रहे हैं। अगर मुख्यमंत्री रघुवर दास को पारा टीचरों की इतनी ही चिन्ता हैं तो अपने व्यवहार में सुधार लाएं, कुछ करके दिखाएं, अरे सबसे पहले मानदेय ही दिला दें, पर ये सब उनसे होगा ही नहीं।

Krishna Bihari Mishra

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