सेलिब्रेटिज के नाम पर केवल अरबाज, भारी बदइंतजामी और बिना दर्शक के ही फिल्म फेस्टिवल संपन्न

झारखण्ड में चल रही विभिन्न योजनाओं की तरह रांची में आयोजित तीन दिवसीय दूसरा झारखण्ड इंटरनेशनल फिल्म फेस्टिवल (जीफा) भी भारी हंगामें, भारी विरोध, भारी विवाद एवं एक व्यक्ति-विशेष के अहं, बिना दर्शकों एवं भारी अव्यवस्था की भेंट चढ़ गया, हम आपको बता दें कि पहला झारखण्ड इंटरनेशनल फिल्म फेस्टिवल भी इसी तरह की घटनाओं के साथ संपन्न हुआ था,

झारखण्ड में चल रही विभिन्न योजनाओं की तरह रांची में आयोजित तीन दिवसीय दूसरा झारखण्ड इंटरनेशनल फिल्म फेस्टिवल (जीफा) भी भारी हंगामें, भारी विरोध, भारी विवाद एवं एक व्यक्ति-विशेष के अहं, बिना दर्शकों एवं भारी अव्यवस्था की भेंट चढ़ गया, हम आपको बता दें कि पहला झारखण्ड इंटरनेशनल फिल्म फेस्टिवल भी इसी तरह की घटनाओं के साथ संपन्न हुआ था, फिर भी राज्य सरकार ने उक्त घटना से कोई सीख नहीं ली और ऐसे व्यक्ति के हाथों में दारोमदार सौंप दिया, जिसने इस दूसरे इंटरनेशनल फिल्म फेस्टिवल का भी कबाड़ा बना दिया और राज्य की इज्जत का फलूदा बन गया।

आज राज्य के कई अखबारों ने इस समाचार को प्रमुख स्थान दिया है, तथा सभी ने अपने समाचारों में आयोजकों के मनमानियों तथा यहां फैली अव्यवस्था पर चोट किया है, बताया जा रहा है कि फिल्म फेस्टिवल के अंतिम दिन मीडियाकर्मियों से बदसलुकी भी की गई। फिल्म फेस्टिवल में आये कई कलाकारों ने इसके लिए ऋषि प्रकाश मिश्रा को जिम्मेदार ठहराया है तथा राज्य सरकार से कहा है कि ऐसे आयोजनों से ऋषि प्रकाश मिश्रा जैसे लोगों को दूर रखें तथा इस प्रकार के आयोजन को स्वयं अपने संरक्षण में आयोजित कराये।

भारी अव्यवस्था के कारण तथा दर्शकों द्वारा इस फिल्म फेस्टिवल को पूरी तरह से नकार दिये जाने के कारण ही सुप्रसिद्ध फिल्म अभिनेता के भाई अरबाज खान पहुंचे तो  जरुर, पर वे शुरु से आखिरी तक नाराज दीखे और चलते बने, लेकिन जीफा के लोगों का कहना है कि ऐसा कुछ भी नहीं है।

बताया जाता है कि ऋषि प्रकाश मिश्रा के नेतृत्व में चला यह फिल्म फेस्टिवल शुरु से ही विवादों में रहा। इस फिल्म फेस्टिवल में, न तो मुख्यमंत्री रघुवर दास ने रुचि दिखाई, और न ही राज्य के दर्शकों ने। इसी बीच सेलिब्रेटी क्रिकेट के दौरान कहा गया था कि राज्य के सभी भारतीय प्रशासनिक सेवा के अधिकारी भाग लेंगे, पर इस सेलिब्रिटी क्रिकेट में गिनती के पांच ही आइएएस दिखाई पड़ें और आइपीएस तो एक भी नहीं थे, रही बात दर्शकों की, तो वे न के बराबर थे, जबकि आम तौर पर जहां फिल्मी सेलिब्रेटिज होते हैं, वहां दर्शकों की मारा-मारी होती है।

कल जब अवार्ड सेरेमनी चल रहा था तब एक फिल्म निर्माता-निर्देशक लाल विजय शाहदेव ने क्रोधित होकर कहा कि दरअसल यह फिल्म फेस्टिवल वन मैन शो बनकर रह गया, फिल्म की स्क्रीनिंग व अवार्ड सेलेक्शन के लिए कोई कमेटी ही नहीं थी, सिर्फ चेयरमैन ने पैसे लिए और पुरस्कार बांट दिये। इधर दो घंटे देर से शुरु हुए समापन समारोह में, लोग बताते है कि शायद ही ऐसा कोई हो जिसे सम्मानित नहीं किया गया हो, पुरस्कारों को रेवड़ियों की तरह बांटने की कोशिश की गई, ऐसे में इस प्रकार के पुरस्कार का कोई महत्व नहीं रह जाता।

ज्ञातव्य है कि झारखण्ड इंटरनेशनल फिल्म फेस्टिवल अवार्ड्स (जीफा) पहली बार 25-27 मई 2018 को आयोजित हुआ था, उस दौरान भी जमकर हंगामा हुआ था, उस दौरान आयोजकों ने कार्यक्रम के दौरान फीमेल वॉलेन्टियर्स के साथ गाली-गलौज किया था, जिसको देखते हुए सारे वॉलेन्टियर्स धरने पर बैठ गये थे, उस दौरान भी आयोजकों ने ये कहा था कि प्रियंका चोपड़ा, आलिया भट्ट जैसी सेलिब्रेटिज आयेंगी पर इनमें से कोई दिखाई नहीं दिया, आम तौर पर ऐसे आयोजन कहीं भी होते हैं तो वार्षिक होते हैं, पर मात्र छः-आठ महीने के अंतराल पर दूसरा आयोजन दाल में काले की लोकोक्ति को पुष्ट कर रहा है।

रांची में आयोजित दूसरा झारखण्ड इंटरनेशनल फिल्म फेस्टिवल लंबे समय तक आयोजकों की बदइंतजामी, दर्शकों की नाराजगी तथा भारी हंगामें के लिए जाना जायेगा, जिसके कारण देश-विदेश से आये कलाकारों को आखिरकार निराश होकर लौटना पड़ा। लोग बताते है कि फिल्म फेस्टिवल मे पूरे दिन कुछ न कुछ कार्यक्रम होते रहे, लेकिन इस दौरान स्टेडियम की कुर्सियां खाली ही खाली दिखाई पड़ी, कुछ फिल्मों के दौरान थोड़ी बहुत कुर्सियां थोड़ी भरी भी थी, तो उन सारी कुर्सियों पर वे स्कूल स्टूडेंट्स विद्यमान थे, जिन्हें आयोजकों ने फ्री पासे बांटे थे, जबकि आम नागरिकों का इस प्रकार के आयोजन से कब का मोहभंग हो चुका था।

कभी अमित खरे ने भी इस आयोजन के बारे में कहा था कि केन्द्रीय सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय झारखण्ड अंतरराष्ट्रीय फिल्म फेस्टिवल 2019 में सहयोग करेगा, क्योंकि यहां फिल्म निर्माण की संभावनाएं है, इसलिए केन्द्र सरकार की तरफ से फेस्टिवल को सहयोग करने का फैसला लिया गया है, अब ऐसे हालात में जहां इस प्रकार की बदइंतजामी तथा एक व्यक्ति की हठधर्मिता ने पूरे राज्य के सम्मान पर बट्टा लगा दिया, ऐसे में अब अमित खरे ही बेहतर बता सकते है कि इस प्रकार के आयोजन से झारखण्ड को उन्होंने क्या दिया या क्या दिलवाया?

Krishna Bihari Mishra

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