जिस दिन सरस्वती को आप समझ लेंगे, आपकी जिंदगी संवर जायेगी, जिन्दगी आनन्द से भर जायेगा

आज वसंत पंचमी है। सरस्वती के प्राकट्योत्सव का दिन। हर्ष व उल्लास का दिन। जीवन में रंग भरने का दिन। प्रकृति के अंदर छूपे प्रेम व कलाओं को नजदीक से जानने का दिन। स्वयं को आनन्द में डूबो देने का दिन। आप आनन्द में कब होते हैं, जब आप आनन्द को जान लेते हैं, जब तक आनन्द को जानेंगे नहीं, आप आनन्द में गोता नहीं लगा सकते और ये आनन्द कौन देगा?, किसके माध्यम से हम तक पहुंचेगा?,

आज वसंत पंचमी है। सरस्वती के प्राकट्योत्सव का दिन। हर्ष उल्लास का दिन। जीवन में रंग भरने का दिन। प्रकृति के अंदर छूपे प्रेम कलाओं को नजदीक से जानने का दिन। स्वयं को आनन्द में डूबो देने का दिन। आप आनन्द में कब होते हैं, जब आप आनन्द को जान लेते हैं, जब तक आनन्द को जानेंगे नहीं, आप आनन्द में गोता नहीं लगा सकते और ये आनन्द कौन देगा?, किसके माध्यम से हम तक पहुंचेगा?, उसे जानने और समझने का दिन हैं, वसंत पंचमी यानी सरस्वती के प्राकट्योत्सव का दिन।

बहुत दिनों के बाद, आज सारे बच्चे हमारे पास थे। सभी सरस्वती पूजा मनाना चाह रहे थे। कुछ बड़े थे, कुछ बच्चे थे। जो बड़े थे, कभी बचपन में सरस्वती पूजा धूमधाम से मनाते थे,पर जब आज बड़े हो गये थे, तो उन्हें लग रहा था कि अब क्या? ज्ञान की देवी की उन्हें अब जरुरत नहीं, अब तो उन्हें धन की देवी लक्ष्मी की जरुरत हैं, पर उन्हें नहीं पता था कि बिना ज्ञान के धन का सदुपयोग कभी हो ही नहीं सकता। ज्ञान अथवा सरस्वती जीवन में आनन्द के लिए बहुत ही जरुरी हैं और बिना आनन्द के जीवन नीरस हो जाता है, फिर जीवन, जीवन नहीं रहता।

ऐसे भी जो लोग दुर्गासप्तशती का पाठ करते हैं, उन्हें पता है कि पूरा पाठ तीन चरित्रों में बंटा है, प्रथम चरित्र, मध्यम चरित्र और उत्तर चरित्र। प्रथम चरित्र में महाकाली, मध्यम चरित्र में महालक्ष्मी तथा उत्तर चरित्र में महासरस्वती निहित हैं, इसलिए सरस्वती की महत्ता को कोई भी नकार नहीं सका। प्राचीन वैदिक परम्परा हो या निराला का समय, सभी ने सरस्वती को जाना है, समझा है, और उनकी ज्ञान शक्ति के आगे सर झूकाया है।

आप शक्ति प्राप्त कर सकते हैं, पर शक्ति का सदुपयोग बिना ज्ञान के संभव नहीं, आप धन प्राप्त कर सकते हैं, पर बिना ज्ञान के आप धन का भी सदुपयोग नहीं कर सकते, इसलिए ज्ञान बुद्धि की अधिष्ठात्री हर समय में प्रासंगिक रही हैं, कहा भी गया है कि बुद्धिर्यस्य बलं तस्य, जिसके पास बुद्धि है, उसके पास बल हैं, और जिसके पास बुद्धि नहीं, बल होने के बावजूद वह बलहीन है।

सरस्वती की पूजा आप नाना प्रकार से कर सकते हैं, प्रतिदिन करें तो और अच्छा पर उनके प्राकट्योत्सव के दिन की बात ही कुछ अलग हैं, आप उनके पास सहज भाव से जाये, और प्रसन्न होकर, उनकी आराधना करें, सरस्वती बहुत ही सरल और सहज हैं, वो बड़ी शीघ्रता से प्रसन्न हो जाती हैं, और ज्ञान के परम आनन्द से सभी को सींचती हैं।

सरस्वती की पूजा, आप सनातन पद्धति से करें या वैदिक तरीके से, दोनों अद्भुत फल को प्रदान करती हैं, पूरे प्रकृति में वीणा की तार से झंकृत अपने तरंगों से शब्दों का निर्माण करनेवाली सरस्वती को किसी भी हालत में नजरंदाज करें, क्योंकि जिसके वश में सरस्वती हुई, उसे धन और शक्ति दोनों प्राप्त  हो गई और जिस पर सरस्वती की कृपा नहीं हुई, वो जीवन के परम आनन्द, रस को प्राप्त करने से वंचित रहा।

ऐसा नहीं कि आधुनिक युग में सरस्वती की महत्ता नहीं, बस सरस्वती को मन से पहचानने की जरुरत हैं, ज्यादातर लोग ज्यादा पढ़ लिख जाने के कारण, सरस्वती को नजरदांज कर देते हैं और यहीं से उनकी विद्याज्ञान का ह्रास होना शुरु हो जाता है, याद रखिये पढ़ने का मतलब, अपनी परम्पराओं, संस्कृतियों का तिलांजलि देना नहीं, बल्कि अपनी परम्पराओं संस्कृतियों को समृद्धि प्रदान करना है, भारत की हमारी ये अमूल्य परम्परा ही, हमारी विरासत है।

Krishna Bihari Mishra

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लीजिये बंगाल के तर्ज पर, अब भाजपा शासित राज्य झारखण्ड में भी सरस्वती पूजा पर रोक

Mon Feb 11 , 2019
लीजिये कल तक बंगाल में सरस्वती पूजा पर रोक को मुद्दा बनानेवाली भाजपा, क्या झारखण्ड में भी इसे मुद्दा बनायेगी, अपने गिरेबां में झांकेगी, या केवल इसी तरह दूसरों पर अंगूलियां उठाती रहेगी। ताजा मामला धनबाद का है, जहां पिछले 63 सालों से जिस एसएसएलएनटी महिला महाविद्यालय में सरस्वती पूजा मनाई जा रही थी, उस पर इस साल रोक लगा दी गई, जिसके कारण महाविद्यालय में इस बार सरस्वती पूजा नहीं मनाई गई।

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