हिन्दी पत्रकारिता दिवस पर उन सारे पत्रकारों को बधाई, जो निरन्तर हिन्दी पत्रकारिता की साख को गिराने में लगे हैं

भाई, मैं तो धन्य हूं कि उस समय भी पत्रकारिता कर रहा हूं, जब पत्रकारिता अपने चाटुकारिता के स्वर्णिम युग में हैं। मैं आज हिन्दी पत्रकारिता दिवस के अवसर पर उन सारे हिन्दी पत्रकारों को धन्यवाद देता हूं, दिल से बधाई देता हूं कि उन्होंने बड़ी मेहनत करके इस चाटुकारिता को एक धर्म का रुप प्रदान कर, स्वयं तो इसमें स्नान किया ही, और लोगों को भी इसमें स्नान करने को प्रेरित किया और जो इस पेश को अपनाना चाहते हैं,

भाई, मैं तो धन्य हूं कि उस समय भी पत्रकारिता कर रहा हूं, जब पत्रकारिता अपने चाटुकारिता के स्वर्णिम युग में हैं। मैं आज हिन्दी पत्रकारिता दिवस के अवसर पर उन सारे हिन्दी पत्रकारों को धन्यवाद देता हूं, दिल से बधाई देता हूं कि उन्होंने बड़ी मेहनत करके इस चाटुकारिता को एक धर्म का रुप प्रदान कर, स्वयं तो इसमें स्नान किया ही, और लोगों को भी इसमें स्नान करने को प्रेरित किया और जो इस पेश को अपनाना चाहते हैं, उन्हें भी अपने जैसा बनाने में कोई कसर नहीं छोड़ रखी।

अब तो हिन्दी पत्रकारिता में ऐसे-ऐसे लोग भी जुड़े हैं, जिन्होंने एक नया अध्याय रचा है, राजनीतिज्ञों के चरणकमल को पखार कर संसद की शोभा ही नहीं बढ़ाई, बल्कि मंत्री पद पाया, कोई राज्यसभा का संचालन तक करने लगा, तो कोई यौन शोषण का रिकार्ड भी अपने हिस्से में कर लिया, इसलिए आज हिन्दी पत्रकारिता दिवस पर उन सारे लोगों को बधाई, जिन्होंने नये-नये रिकार्ड बनाने में अपने जीवन के स्वर्णिम काल को झोंक दिया, तथा वर्तमान कारपोरेट युग में अपने मालिकों के लिए सर्वस्व लूटाया तो लूटाया ही, उनके मित्र राजनीतिज्ञों के लिए भी कोई कसर नहीं छोड़ी।

अभिनन्दन उन पत्रकारों का भी जिन्होंने कभी धनबाद के गांधी सेवा सदन में हिन्दी पत्रकारिता को एक नई ऊंचाई दी। गांधी सेवा सदन में मुर्गा कटवाया, मुर्गा बनवाया, मुर्गा खिलवाया, जाम से जाम टकराये, सिगरेट के धूएं के छल्ले उड़वाये और जिस पत्रकार ने इसका विरोध किया, उसकी इज्जत लूटने और उसे नौकरी से निकलवाने में कोई कसर नहीं छोड़ी। अभिनन्दन तो पटना में बैठे एक दाढ़ीवाले खुद को जयप्रकाश का अनुयायी बतानेवाला एक दक्षिण भारत के चैनल में कार्य कर रहे संपादक का भी, जिसने उस वक्त गांधी सेवा सदन में मुर्गा खानेवाले इन पत्रकारों के सम्मान को बचाने के लिए कम मेहनत नहीं की थी।

अभिनन्दन उन पत्रकारों का भी, जो एक आइएएस द्वारा यह कहे जाने पर कि आपके और माननीय मुख्यमंत्री जी के बीच में तो पति-पत्नी के संबंध होते है, और उसके बावजूद भी कोई सामूहिक स्तर पर विरोध दर्ज नहीं कराता, उलटे जो एक पत्रकार इसका विरोध करता हैं तो सभी उसी से उलझने लगते हैं। बधाई ऐसे लोगों को भी, जिन्हें मुख्यमंत्री का पत्नी बनना पसन्द हैं, पर मुख्यमंत्री के प्रधान सचिव के उस बयान की आलोचना करना, वे धर्म नहीं समझते, सचमुच ऐसे लोगों ने ही तो, हिन्दी पत्रकारिता को एक नई ऊंचाई दी हैं।

अभिनन्दन ऐसे हिन्दी पत्रकारों का भी, जो भाजपा नेताओं के लोकसभा में सफलता अर्जित करने पर मिठाइयां बांटते, सांसद के मुंह में रसगुल्ले घुसाते हैं और इस खुशी में नाचते-गाते भी हैं, मोदी-मोदी चिल्लाते हैं, तथा अपने सोशल साइट पर मोदी का गुणगान करते नहीं थकते तथा अपने विरोधियों के लिए आपत्तिजनक शब्द का प्रयोग करते नहीं थकते।

अभिनन्दन और बधाई उन हिन्दी पत्रकारों की भी जो मंत्रियों के लिए लॉबिंग करते हैं, जो कारपोरेट जगत के लिए लाइजनिंग का काम करते हैं, जो नेताओं व अधिकारियों के साथ सेल्फी लेकर फेसबुक साइट पर डालकर, इतने प्रसन्न होते है, जैसे लगता हो कि उन्हें भगवान की प्राप्ति हो गई हो, अभिनन्दन उन पत्रकारों को भी जो सत्ता और सरकार के साथ मिलकर गोवा के पवित्र सागर तट पर एक साथ स्नान करते हैं।

भाई ये नये युग की पत्रकारिता हैं, हिन्दी की पत्रकारिता हैं, इसमें तो ये सब होता ही रहता हैं, इसी से तो पता चलता है कि हम कितने आगे बढ़े, इसलिए हिन्दी पत्रकारिता को आगे बढ़ाने के लिए नेताओं-अधिकारियों के चरणोदक पीये, उनके हित में ही अपना हित समझे, ताकि देश आपके इस कृत्य से सही में लाभान्वित हो, और आप इसके द्वारा स्वयं को धनकुबेर बना सकें तथा दुनिया की सैर कर सकें, नाना-प्रकार के सुखों को भोग सकें।

Krishna Bihari Mishra

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