एक ओर AIPF तो दुसरी ओर मुस्लिम समुदाय के लोगों ने न्यूजीलैंड में हुए हादसे पर जताई चिन्ता

न्यूजीलैंड में कल हुए आंतकी नस्लीय नरसंहार को लेकर रांची में मुस्लिम समुदाय के लोगों ने गहरा आक्रोश प्रकट किया, प्रदर्शन किया। ये अपने साथ विभिन्न प्रकार की तख्तियां भी लिये हुए थे, जिस पर आतंकी घटनाओं को रोक लगाने संबंधी पूरे विश्व के देशों के लोगों से वे गुहार भी लगा रहे थे।

इन प्रदर्शनकारियों का कहना था कि यूएनओ नस्लीय भेदभाव को लेकर कार्रवाई करें, भारत सरकार अपनी चुप्पी तोड़े, भारत में भी जो नस्लीय हिंसा फैलाते हैं, उन पर कड़ी कार्रवाई की जाये, जो भी लोग सोशल मीडिया के माध्यम से जातीय अथवा नस्लीय या सांप्रदायिक हिंसा फैलाते हैं, उन पर कड़ी कानूनी कार्रवाई की जाय।

इनका कहना था कि आखिर नस्लीय-नफरत कब खत्म होगा, आखिर सांप्रदायिक खूनी खेल कब बंद होगा, आखिर इन्सानियत का खून कब तक बहता रहेगा, आखिर अल्पसंख्यकों को सुरक्षा कौन दिलायेगा? ये सारे सवाल इन प्रदर्शनकारियों के तख्तियों पर मौजूद थे। प्रदर्शनकारी इन तख्तियों को लेकर हाथ में काली पट्टी बांधकर, मौन प्रदर्शन कर रहे थे। इनका मौन प्रदर्शन रांची के एकरा मस्जिद चौक के पास मेन रोड में हुआ।

जिसमें वरिष्ठ पत्रकार बशीर अहमद, मास्टर शैयान हक, नदीम खान, मो. शाहिद अय्यूबी, असलम इब्राहिम, साजिद उमर, तनवीर अहमद, इमरान रजा अंसारी, मो. सैफ, अरशद कुरैशी, सरवर खान, जमील अख्तर, मो.बब्बर, नदीम एकबाल, एजाज गद्दी, नवाब चिश्ती, रमजान रजा कुरैशी, रजा मुजीब, मो.सहाबुल मानी, मो. तनवीर, मो.सोनू, मो.  दानिश, मो. शाहिद, मो. इस्लाम, अन्नू अंसारी, मो. रईस, गुड्डू खान, मो. शादाब, मो. मेराज, मो. कल्लू आदि उपस्थित थे।

दूसरी ओर आल इंडिया पीपुल्स फोरम झारखण्ड ने न्यूजीलैंड की मस्जिद में हुई बेगुनाहों की हत्या की कड़ी निन्दा की हैं, तथा कहा है कि इस घटना ने यह बता दिया कि वैश्विक स्तर पर मानव समाज के समक्ष सबसे बड़ी  चुनौती क्या है? जो आज भी पूरी दुनिया में अपने वर्चस्व स्थापित करने की अमानवीय हरकतें कर रही है, इसके पहले भी आस्ट्रेलिया समेत कई देशों में भारतीय समुदाय के लोगों पर नस्लवादी हमले हो चुके हैं।

फोरम ने कहा कि यह विडम्बना है कि इस साक्षात् सुनियोजित संगठित नस्लीय आतंकवाद को रोकने का एजेंडा आजतक ट्रम्प और भारत के प्रधानमंत्री समेत फ्रांस-जर्मनी किसी बड़े देश ने प्रमुखता से नहीं उठाया। फोरम ने कहा कि न्यूजीलैंड में हुआ नस्लीय संहार कांड महज किसी व्यक्ति के सिरफिरेपन से नहीं हुआ है, बल्कि यह एक संगठित और संस्थाबद्ध मनोवृत्ति है, जिसका जवाब वैश्विक अमन और एकताबद्ध होकर देना होगा।