मोमेंटम झारखण्ड के उड़ते हाथी की हालत खराब, विद्युत आपूर्ति चरमराने से व्यवसायी गुस्से में

झारखण्ड स्मॉल इण्डस्ट्रीज एसोसिएशन से जुड़े व्यवसायी गुस्से में हैं। गुस्से का कारण पूरे राज्य में विद्युत व्यवस्था का चरमरा जाना है, व्यवसायियों का कहना है कि राज्य सरकार असक्षम जेबीवीएनएल से मुक्ति दिलाएं तथा कुशल विद्युत वितरण व्यवस्था को बहाल करें। झारखण्ड स्मॉल इण्डस्ट्रीज एसोसिएशन का ये सांकेतिक प्रदर्शन स्पष्ट रुप से बता देता है कि रघुवर सरकार द्वारा पिछले वर्ष चलाये गये मोमेंटम झारखण्ड का क्या हाल है?

झारखण्ड स्मॉल इण्डस्ट्रीज एसोसिएशन से जुड़े व्यवसायी गुस्से में हैं। गुस्से का कारण पूरे राज्य में विद्युत व्यवस्था का चरमरा जाना है, व्यवसायियों का कहना है कि राज्य सरकार असक्षम जेबीवीएनएल से मुक्ति दिलाएं तथा कुशल विद्युत वितरण व्यवस्था को बहाल करें। झारखण्ड स्मॉल इण्डस्ट्रीज एसोसिएशन का ये सांकेतिक प्रदर्शन स्पष्ट रुप से बता देता है कि रघुवर सरकार द्वारा पिछले वर्ष चलाये गये मोमेंटम झारखण्ड का क्या हाल है? और उसका उड़ता हाथी कैसे विद्युत आपूर्ति ठप हो जाने के कारण धड़ाम से नीचे गिर पड़ा हैं।

आश्चर्य इस बात की भी है कि इनका ये प्रदर्शन उस स्थान से प्रारम्भ हुआ है, जहां उड़ता हाथी, इसके ब्रांड एंबेस्डर के रुप में प्रयुक्त हुए महेन्द्र सिंह धौनी तथा सीएम रघुवर दास का बड़ा सा होर्डिंग भी मौजूद है, जो दिखाने के लिए काफी है कि राज्य का उद्योग जगत किस बदतर स्थिति में है तथा राज्य सरकार की उद्योग नीति कैसे दम तोड़ने को मजबूर है।

इन व्यवसायियों ने मोराबादी मैदान पहुंचकर गांधी की प्रतिमा के पास बैठक कर एक मीटिंग भी की तथा राज्य सरकार के क्रियाकलापों की कड़ी आलोचना की। इनका कहना था कि राज्य सरकार उनकी मूल समस्याओं पर ध्यान ही नहीं दे रही, नतीजतन उनके उद्योगों पर इसका सीधा असर पड़ रहा है। आश्चर्य इस बात की है कि अपनी ब्रांडिंग के लिए करोड़ों रुपये खर्च करनेवाली सरकार के हाथों से विद्युत विभाग ही निकलता जा रहा हैं, हम आपको बता दे कि ऊर्जा विभाग स्वयं मुख्यमंत्री के पास हैं, तब राज्य का ये हाल है, यहां के उद्योग जगत का ये हाल है, अगर दूसरा कोई रहता तो क्या होता? इसे समझने की आवश्यकता है।

व्यवसायियों का कहना था कि राज्य में जितने भी नेता है, चाहे वह सांसद हो या विधायक, मंत्री हो या मेयर, पर किसी को भी उद्योग धंधे पर ध्यान नहीं हैं, न उन्हें छोटे-छोटे व्यवसायियों की समस्या पर ध्यान हैं, लेकिन मोमेंटम झारखण्ड के नाम पर करोड़ो लूटने व लूटवाने में गहरी दिलचस्पी दीख जाती है। इस राज्य का दुर्भाग्य है कि यहां नीतियां तो बहुत बन जाती है, होर्डिंग्स और उसमें नारे तो खुब लिख दिये जाते है, पर उसका क्रियान्वयन कैसे हो, इस पर ध्यान किसी का नहीं रहता, नतीजा सामने हैं, पूरे राज्य में विद्युत व्यवस्था चरमरा गई है, उद्योग धंधे ठप है, पर सरकार और सरकार के अधिकारी विभिन्न होर्डिंग्सों के माध्यम से अपने चेहरे चमकाने में व्यस्त हैं।

Krishna Bihari Mishra

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