रोक के बावजूद सरसंघचालक मोहन भागवत ने केरल के एक स्कूल में राष्ट्रीय ध्वज फहराया

15  अगस्त 1947 के पूर्व भारत में राष्ट्रीय ध्वज फहराने में कितनी दिक्कतें आती होगी, समझा जा सकता है, पर स्वतंत्र भारत में भी राष्ट्रीय ध्वज फहराने की मनाही हो जाये, यह कितना कष्टकर है, खासकर उस व्यक्ति के लिए, जिसके हृदय में निरन्तर राष्ट्र धड़कता हो। हम बात कर रहे हैं केरल की। जहां से आज अहले सुबह जानकारी मिली कि केरल के एक जिला कलक्टर ने राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सरसंघचालक मोहन भागवत को एक विद्यालय में राष्ट्रीय ध्वज फहराने से रोक लगा दी है,

15  अगस्त 1947 के पूर्व भारत में राष्ट्रीय ध्वज फहराने में कितनी दिक्कतें आती होगी, समझा जा सकता है, पर स्वतंत्र भारत में भी राष्ट्रीय ध्वज फहराने की मनाही हो जाये, यह कितना कष्टकर है, खासकर उस व्यक्ति के लिए, जिसके हृदय में निरन्तर राष्ट्र धड़कता हो। हम बात कर रहे हैं केरल की। जहां से आज अहले सुबह जानकारी मिली कि केरल के एक जिला कलक्टर ने राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सरसंघचालक मोहन भागवत को एक विद्यालय में राष्ट्रीय ध्वज फहराने से रोक लगा दी है, जबकि याद रखे, झंडा कोड के मुताबिक किसी भी भारतीय नागरिक को किसी भी विद्यालय में झंडा फहराने का अधिकार प्राप्त है।

वामपंथियों का समूह हमेशा संघ के कार्यक्रमों में बेवजह अड़ंगा लगाता हैं

चूंकि केरल में वामंपथियों की हुकूमत है, जहां पहली बार भाजपा और संघ के लोगों ने उनकी नींद हराम कर दी है, ऐसे में वे, ऐसा कोई मौका नही छोड़ना चाहते, जिससे विवाद उत्पन्न न होता हो, उन्हें लगता है कि ऐसा करने से उन्हें माइलेज मिल जायेगा, पर संघ के स्वयंसेवकों द्वारा मिल रही टक्कर, उनकी रातों की नींद हराम कर दी है, हम आपको बता दें कि संघ के स्वयंसेवकों पर इन वामपंथियों का इतना अत्याचार बढ़ा है कि इन वामपंथियों ने अब तक 17 स्वयंसेवकों की जान ले ली हैं, इसके बावजूद स्वयंसेवकों के जोश व उत्साह में कोई कमी नहीं दिखाई पड़ रहा।

मोहन भागवत ने दिखा दिया, उन्हें राष्ट्रीय ध्वज फहराने से कोई नहीं रोक सकता

वामपंथी सरकार द्वारा मोहन भागवत को झंडा फहराने पर रोक एक प्रकार की खीझ है, जिसे वे दिखाना चाहते है, पर इसके उलट आरएसएस के सरसंघचालक मोहन भागवत ने बिना किसी भय के विद्यालय में राष्ट्रीय ध्वज फहराकर बता दिया कि वे किसी वामपंथियों के इस घटियास्तर की हरकतों के आगे न तो झूकनेवाले है और न रुकनेवाले।

मोहन भागवत द्वारा केरल में राष्ट्रीय ध्वज फहराने का समाचार मिलते ही, पूरे देश के स्वयंसेवकों में हर्ष की लहर

पलक्कड़ जिला कलक्टर का कहना था कि कोई नेता सरकारी सहायता प्राप्त स्कूल में भारतीय ध्वज नहीं फहरा सकता, उक्त स्कूल में कोई शिक्षक या निर्वाचित जनप्रतिनिधि ही राष्ट्रीय ध्वज फहरा सकता है। इधर स्कूल प्रबंधन ने जिला कलक्टर की बातों पर न ध्यान देकर, सरसंघचालक मोहन भागवत से राष्ट्रीय ध्वज फहराकर एक तरह से स्थानीय प्रशासन को चुनौती दे ही है कि वह उनके इस गलत कार्यों को मानने को बाध्य नहीं है। इधर आरएसएस के सरसंघचालक मोहन भागवत द्वारा राष्ट्रीय ध्वज फहरा दिये जाने के बाद पूरे देश के स्वयंसेवकों  में हर्ष की लहर दौड़ गई है, लेकिन जब यह समाचार आया था कि उन्हें राष्ट्रीय ध्वज फहराने से रोक दिया गया हैं तो पूरे देश के स्वयंसेवकों में मायूसी छा गई थी। इधर कई स्वयंसेवी संगठनों और राजनीतिक दलों ने केरल सरकार के इस कृत्य की कड़ी आलोचना की है।

Krishna Bihari Mishra

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वो ढोल पीटकर भी कुछ नहीं कर सकें और सुनीता ने वह कर दिखाया, जिसका अंदेशा ही न था

Tue Aug 15 , 2017
ये तीन उदाहरण बताते है कि जो लोग करना जानते है, वे ढोल नहीं पीटते, वे करके दिखा देते हैं, और जो ढोल पीटते हैं, उनका मकसद सिर्फ ढोल पीटना होता है, करना कुछ नहीं होता है। जरा देखिये एक पत्रकारों का समूह रांची से चला था, राष्ट्रीय ध्वज फहराने, जानते है कहां, कश्मीर के लाल चौक पर, नारा क्या लगा रहा था – जहां हमारा लहू गिरा है, वो कश्मीर हमारा है, पर इनलोगों से पूछिये कि क्या आपलोगों ने कश्मीर के लाल चौक पर राष्ट्रीय ध्वज फहराया।

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