राजनीति

खुद और सांसदों का वेतन बढ़वाने के बाद, अब भाजपा की सेहत का भी ख्याल रखा मोदी ने

देश के कुछ धूर्त राजनीतिक दलों को बहुत बड़ी राहत दिलाई है केन्द्र की भाजपा सरकार ने। इस भाजपा सरकार ने बड़ी ही चतुराई से खुद को भी बचा लिया है, अब सवाल उठता है कि क्या देश की जनता ने भाजपा को इसीलिए केन्द्र में सत्ता सौंपी थी, कि वह अनैतिक कार्य करते हुए, स्वयं को बचाने का प्रयास करें या दोषियों को उनके किये की सजा दिलाने के लिए सत्ता सौंपी थी, पर जब खुद ही कोई दल दोषी है, तो वो करेगा क्या, वहीं करेगा, जो उसे करना चाहिए, यानी खुद को बचाने के लिए हर प्रकार के गलत कार्य करेगा।

जरा देखिये, भाजपा सरकार के करतूत की। लोकसभा में बुधवार को विपक्षी दलों के विरोध के बीच वित्त विधेयक 2018 में जिन 21 संशोधनों को मंजूरी दी, उनमें से एक संशोधन विदेशी चंदा नियमन कानून 2010 से संबंधित था। यह कानून विदेशी कंपनियों को राजनीतिक दलों को चंदा देने से रोकता है, जन प्रतिनिधित्व कानून राजनीतिक दलो को विदेशी चंदा लेने पर रोक लगाता है, एनडीए सरकार ने पहले वित्त विधेयक 2016 के जरिये विदेशी चंदा नियमन कानून में संशोधन किया था, जिससे दलों के लिए विदेशी चंदा लेना आसान कर दिया गया, अब 1976 से ही राजनीतिक दलों को मिले चंदे की जांच की संभावना को समाप्त करने के लिए इसमें आगे और संशोधन कर दिया गया है।

इस मोदी सरकार ने विदेशी चंदा प्राप्त करने के लिए वित्त अधिनियम 2016 के जरिये विदेशी कंपनी की परिभाषा में भी बदलाव कर दिया है। यहीं नहीं पिछले सप्ताह जिस संशोधन को लोकसभा ने पारित किया, उससे पहले तक 26 सितम्बर 2010 से पहले जिन राजनीतिक दलों को विदेशी चंदा मिला, उनकी जांच की जा सकती थी। वित्त कानून 2016 में उपबंध 233 के पारित होने के बाद भाजपा और कांग्रेस दोनों ने दिल्ली  हाईकोर्ट  के फैसले के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में दायर अपील वापस ले ली थी। हाईकोर्ट ने अपने फैसले में दोनों दलों को विदेशी चंदे को लेकर कानून के उल्लंघन का दोषी पाया था, ताजा संशोधन हो जाने के कारण दोनों को बहुत बड़ी राहत मिल गई। अब सवाल उठता है कि इससे आम जनता को क्या फायदा मिला? क्या नरेन्द्र मोदी की सरकार को जनता ने इसलिए चुना था।