पाकिस्तान और चीन ही नहीं, UN तक धौंस जमानेवाला PM, श्याम रंगीला की मिमिक्री से डर गया

मिमिक्री तो भाजपा के वरिष्ठ नेता, पूर्व प्रधानमंत्री, भारत रत्न अटल बिहारी वाजपेयी की भी हुई है। मिमिक्री तो लालू प्रसाद यादव की भी होती है। मिमिक्री तो उसी शख्स की होती है, जिनका व्यक्तित्व औरों से हटकर होता हैं, जिनके बारे में लोग ज्यादा से ज्यादा सुनना, जानना व समझना चाहते है।  ये मिमिक्री सकारात्मक और नकारात्मक दोनों तरफ से होता है, जो उनके चाहनेवाले होते है, वे सकारात्मक पक्ष चुनते है और जो उनके विरोधी होते है…

कमाल हो गया, देश का प्रधान सेवक पाकिस्तान और चीन ही नहीं, बल्कि संयुक्त राष्ट्र तक धौंस जमा देते हैं, पर देश में एक श्याम रंगीला जैसे नवोदित कलाकार की मामूली मिमिक्री से डर जाते हैं। मिमिक्री तो भाजपा के वरिष्ठ नेता, पूर्व प्रधानमंत्री, भारत रत्न अटल बिहारी वाजपेयी की भी हुई है। मिमिक्री तो लालू प्रसाद यादव की भी होती है। मिमिक्री तो उसी शख्स की होती है, जिनका व्यक्तित्व औरों से हटकर होता हैं, जिनके बारे में लोग ज्यादा से ज्यादा सुनना, जानना व समझना चाहते है।  ये मिमिक्री सकारात्मक और नकारात्मक दोनों तरफ से होता है, जो उनके चाहनेवाले होते है, वे सकारात्मक पक्ष चुनते है और जो उनके विरोधी होते है, वे नकारात्मक पक्ष को चुनते है, पर आम जनता को न तो सकारात्मक और न ही नकारात्मक से मतलब होता है, वे तो इसमें सिर्फ अपना मनोरंजन देख रहे होते है, क्योंकि वे जानते है कि जो मिमिक्री कर रहा हैं, वह सिर्फ आनन्द व खुशियां देना चाहता है, वह उन्हें गुदगुदाना चाहता है, ताकि इस बोझिल जिंदगी में थोड़ी हंसी का आगमन हो जाये, पर इस गुदगुदाने और हंसी के पुट में भी तलवार लटक जाये तो भाई समझ लीजिये कि अब जनता से उसे जीने का अधिकार भी छीन लिया जा रहा है।

https://youtu.be/Rfyy-0GSeKM

दरअसल, ये हमें लिखना इसलिए पड़ रहा है कि श्यामा रंगीला कामेडियन ने सर्वप्रथम प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की मिमिक्री की, जो स्टार प्लस पर प्रसारित होनेवाला था, जिस पर रोक लगा दी गई। बाद में राहुल गांधी पर उसने मिमिक्री की, उस पर भी रोक लगा दी गई, जबकि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी हो या राहुल गांधी इनकी मिमिक्री में कुछ भी ऐसा नहीं था, जिसे आपत्तिजनक कहा जा सकता हैं।

पूर्व में जब भी किसी व्यक्ति की मिमिक्री की जाती थी, तो वह प्रसन्न होता था, उसे लगता था कि उसके व्यक्तित्व के बारे में लोग जानने की कोशिश कर रहे हैं, दिलचस्पी ले रहे है, तभी तो मिमिक्री हो रही है, पर आज ऐसा नहीं है, आज वैसे लोग, जिनकी मिमिक्री हो रही है, वे डरने लगे है। शायद उन्हें लगता है कि उनकी मिमिक्री से उनकी असलियत जनता के बीच पहुंचने लगेगी और उससे आसन्न चुनावों में उन्हें हार का सामना करना पड़ सकता है और ये डर उन्हीं को होता है, जो जनता से झूठ बोला करते हैं, जो जनता को अपनी जूमलेबाजी में लपेटने का प्रयास करते हैं, जो भाषणबाजी में पीएचडी किये होते हैं और जमीन पर उनका काम कुछ भी नहीं दीख रहा होता हैं, जिनकी भाषण सुन सुनकर निराशा की दौर में जनता को कॉमा में जाने का भय सता रहा होता हैं।

श्याम रंगीला की मिमिक्री ने सत्ता और विपक्ष के महान व्यक्तित्वों पर ऐसा प्रहार किया है कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और राहुल गांधी की धड़कनें तेज हो गई है, उन्हें लगता कि कहीं ऐसा नही कि इसकी मिमिक्री आनेवाले गुजरात और हिमाचल के विधानसभा चुनाव में हार का दर्शन न करा दें। जरा सोचिये, जहां का प्रधानमंत्री एक मिमिक्री से डर जाये, जहां का विपक्ष एक मामूली मिमिक्री से डर जाये, भला वो राज्य व देश की सेवा क्या करेगा?

कमाल की बात है, जिन दलों से देश में लाल बहादुर शास्त्री, इन्दिरा गांधी और अटल बिहारी वाजपेयी जैसे नेता प्रधानमंत्री के रुप में मिले हो, वहां एक मामूली मिमिक्री से डरनेवाला प्रधानमंत्री अब निकल रहा है, ऐसे में भाई, आप किस काम के चौकीदार, क्या आपको नहीं मालूम कि चौकीदार कभी भी डरता नहीं हैं,  क्या होगा इस देश का?

Krishna Bihari Mishra

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