मीट-भात के बहाने दरकते जनाधारों को बचाने की कोशिश में लगे भाजपा विधायक

अगले साल लोकसभा-विधानसभा के चुनाव होने हैं। भाजपाई विधायकों और भाजपा से लालच में सटे दूसरे दलों से दलबदल कर भाजपा में शामिल वर्तमान विधायकों व मंत्रियों को लगता है, आभास हो चुका है कि आनेवाले समय में जब भी कभी चुनाव होंगे, उनका वर्तमान सीट से जीतना नामुमकिन हैं, इसलिए उन्होंने वनभोज का सहारा लिया हैं।

अगले साल लोकसभा-विधानसभा के चुनाव होने हैं। भाजपाई विधायकों और भाजपा से लालच में सटे दूसरे दलों से दलबदल कर भाजपा में शामिल वर्तमान विधायकों व मंत्रियों को लगता है, आभास हो चुका है कि आनेवाले समय में जब भी कभी चुनाव होंगे, उनका वर्तमान सीट से जीतना नामुमकिन हैं, इसलिए उन्होंने वनभोज का सहारा लिया हैं।

वनभोज में आगंतुकों की संतुष्टि का विशेष ख्याल रखा जा रहा हैं, क्योंकि इनके रुठने से अपने इलाके से जीत पाना, इनका लगभग नामुमकिन हैं, जो तीन सालों तक इन्हें पुछ नहीं रहे थे, आज उनकी खुब आवभगत कर रहे हैं। मीट भात का पुरा इंतजाम किया जा रहा है और अपने विरोधियों को वे इसके द्वारा यह बताने की कोशिश कर रहे है कि उनका जनाधार आज भी कायम हैं। हाल ही में सारठ में कृषि मंत्री रणधीर कुमार सिंह द्वारा दिया गया वनभोज तथा सिंदरी इलाके में भाजपा विधायक फुलचंद मंडल द्वारा दिया गया वनभोज उसका सुंदर उदाहरण हैं।

इसी प्रकार कई विधानसभा क्षेत्रों में आजकल भाजपा विधायकों का समूह वनभोज के बहाने जमकर मीट भात परोस रहे हैं और लगे हाथों सरकार से दो-दो हाथ करने के मूड में भी हैं। कृषि मंत्री रणधीर कुमार सिंह का अपने चाहनेवालों के बीच यह कहना कि वे भाजपा को तेल लगाने नहीं जायेंगे, अब भाजपा के लोग उन्हें तेल लगाने आयेंगे, इसी की एक कड़ी है।

ज्यादातर भाजपा विधायक और मंत्री तो इस बात को लेकर नाराज है कि सीएम उनकी सुनते नहीं, जिस कारण उनके इलाके की बातें न तो सदन में और न ही सीएम आवास तक पहुंचती हैं, इस कारण उनके इलाके का विकास अवरुद्ध हो चुका है, ऐसे में हार का सामना न करना पड़े, इसे लेकर भी इन भाजपा विधायकों को वन भोज का सहारा लेना पड़ रहा हैं, स्थिति ऐसी है कि कई विधायक और मंत्री तो समय-समय पर अपने ही सरकार के विकास विरोधी कार्य को विभिन्न गोष्ठियों के माध्यम से रखकर बता दे रहे है कि आम पब्लिक के नजर में भाजपा फिलहाल कही नहीं हैं।

इधर भाजपा में मुंह देखा-देखी नेताओं का भी प्रार्दुभाव हो गया है। ऐसे-ऐसे भाजपा प्रवक्ता बन गये हैं, जिन्हें टीवी के डिबेट में रख दिया जाय तो वे एंकर तो दूर, अपने प्रतिद्वंदियों का जवाब भी नहीं दे पाते, पूर्णतः जेबी संस्था बन जाने के कारण तथा पार्टी कार्यकर्ताओं की पुछ बंद जाने के बाद, इन विधायकों ने अब वन भोज का सहारा लेना प्रारंभ किया है, तो क्या वनभोज के माध्यम से भाजपा विधायक,  2019 के विधानसभा चुनाव में अपनी जीत सुनिश्चित कर लेंगे, हमें तो ऐसा नहीं लगता।

Krishna Bihari Mishra

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