विरोधी दल के नेता की भूमिका में नजर आये “मैन ऑफ द हाउस” पूर्व नगर विकास मंत्री सी पी सिंह

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हालांकि भारतीय जनता पार्टी ने अभी तक डिसाइड नहीं किया, कि उसकी ओर से नेता प्रतिपक्ष कौन होगा?, पर जिस प्रकार से रांची के भाजपा विधायक सी पी सिंह ने आज झारखण्ड विधानसभा में अपनी भूमिका निभाई, वो बता रहा था कि नेता प्रतिपक्ष वे ही हैं, वे ही हैं, वे ही हैं। चाहे सदन को आर्डर में लाने की बात पर स्पीकर को अपना सुझाव देने की बात हो, या विधायकों को सदन के प्रति सम्मान व्यक्त करने की हिदायत की बात हो या कांग्रेसी विधायक इरफान अंसारी के बयान पर उनके अचूक प्रहार की बात हो, सीपी सिंह पूरे सदन में छाये रहे।

शायद यही कहा जाता है कि आप किसी को पद दे या न दें, अगर उसके अंदर काबिलियत है, तो वह उसे लेकर रहेगा, चाहे आप कुछ भी कर लें या उसके सामने कितनी भी बड़ी बाधा उपस्थित क्यों न कर दें। हालांकि आज सदन में पूर्व ग्रामीण विकास मंत्री एवं खूंटी के भाजपा विधायक नीलकंठ सिंह मुंडा भी सदन में मौजूद थे, जिन्हें माना जाता है कि भाजपा की ओर से नेता प्रतिपक्ष के वे भी उम्मीदवार है, पर आज वे सदन में रहने के बावजूद भी अपनी उपस्थिति उस प्रकार से नहीं दिखा सकें, जो सीपी सिंह ने दिखा दी।

इधर बाजार में यह भी खूब चर्चा है कि झाविमो के बाबू लाल मरांडी भाजपा में शामिल होने जा रहे हैं और भाजपा की ओर से नेता प्रतिपक्ष उन्हें ही बनाये जाने की संभावना है, पर इसमें कितनी सच्चाई हैं,  इस पर विद्रोही24.कॉम बोलने से परहेज करेगा, क्योंकि आज के इस राजनीतिक परिवेश में कुछ भी असंभव नहीं है, हालांकि झाविमो के नेता इधर खुब बयानबाजी कर रहे है कि बाबू लाल मरांडी भाजपा में नहीं जायेंगे, पर इन्हें यह क्यों कहना पड़ रहा हैं, ये वे ही बेहतर बता सकते हैं।

पर हम यहां चर्चा कर रहे हैं, आज सदन में हुए चर्चा की, जिसमें नेता प्रतिपक्ष की भूमिका अदा कर दी, सी पी सिंह ने। जरा देखिये, जब इरफान अंसारी राज्यपाल के अभिभाषण पर बोलने उठते हैं तो वे किस लोकोक्ति से उनकी बखिया उघेड़ते हैं। सीपी सिंह, इरफान अंसारी को निशाने पर लेते हुए बोलते है कि “घोड़ा नाल ठोकाए तो पता चलता है, अब बेंग भी नाल ठोकवाये तो क्या कहेंगे”। यही नहीं जब झामुमो के लोबिन हेम्ब्रम पूर्ववर्ती सरकार की स्थानीय नीति को लेकर विपक्ष को घेरने का प्रयास करते हैं, तो उसका भी करारा जवाब सीपी सिंह इस प्रकार देते है कि पूरा सदन देखते रह जाता है।

यानी ऐसा लग रहा था कि पूरी सरकार के हर बातों का जवाब देने का मन बनाकर सीपी सिंह घर से निकले थे, और उन्होंने अपनी दमदार उपस्थिति भी दर्ज करा दी। शायद यहीं कारण रहा कि मेरी नजर में, विद्रोही24. कॉम की नजर में सीपी सिंह मैन ऑफ द हाउस नजर आये, जिनकी बातों में शालीनता भी थी, मनोविनोद पूर्ण शब्द भी थे, तथा सदन की गरिमा का भी ख्याल था।

ऐसे भी जब ये तीनों बातें किसी में होगी तो वह निश्चय ही सदन में अपनी जोरदार उपस्थिति दर्ज करायेगा, चाहे वह किसी भी दल का ही क्यों न हो। सदन हंगामा करने की जगह नहीं, बल्कि अपनी बातों को बेहतर ढंग से जनहित में रखने की जगह हैं, ये सारे जनप्रतिनिधियों को समझ लेना चाहिए।

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