झारखंड में नक्सलवाद को बड़ा झटका: 16 हार्डकोर माओवादियों का हथियारों के साथ आत्मसमर्पण, 11 अत्याधुनिक हथियार और 1,562 गोलियां पुलिस को सौंपीं, कई बड़े हमलों व हत्याओं में रहे थे शामिल
झारखंड पुलिस को नक्सल विरोधी अभियान में अब तक की बड़ी सफलताओं में से एक सफलता हाथ लगी है। राज्य सरकार की आत्मसमर्पण एवं पुनर्वास नीति से प्रभावित होकर भाकपा (माओवादी) के 16 हार्डकोर नक्सलियों ने मंगलवार को पुलिस मुख्यालय में हथियारों के साथ आत्मसमर्पण कर दिया। आत्मसमर्पण करने वालों में संगठन के एक रीजनल कमेटी सदस्य (RCM), तीन जोनल कमेटी सदस्य (ZCM), तीन सब-जोनल कमेटी सदस्य (SZCM), छह एरिया कमेटी सदस्य (ACM) तथा तीन दस्ता सदस्य शामिल हैं।
आत्मसमर्पण करने वाले नक्सलियों ने पुलिस के समक्ष 11 अत्याधुनिक हथियार, 38 मैगजीन और 1,562 राउंड गोलियां जमा कराईं। इनमें छह इंसास राइफल, दो AK-47, एक HK-33, एक यूएस कार्बाइन तथा एक एम-16 राइफल शामिल हैं। पुलिस मुख्यालय के अनुसार यह आत्मसमर्पण “ऑपरेशन नवजीवन-2” के तहत हुआ है। झारखंड पुलिस, सीआरपीएफ, कोबरा एवं झारखंड जगुआर द्वारा लगातार चलाए जा रहे संयुक्त अभियानों और राज्य सरकार की पुनर्वास नीति के कारण नक्सली संगठन लगातार कमजोर हो रहा है।
इसी अभियान के तहत इससे पहले 21 मई को 27 नक्सलियों ने तथा जुलाई में 20 लाख के इनामी रविंद्र गंझू और 25 लाख के इनामी अजय महतो उर्फ टाइगर की गिरफ्तारी तथा एसीएम बबिता उर्फ अनीता किस्कू के आत्मसमर्पण जैसी बड़ी सफलताएं भी मिली थीं। पुलिस के अनुसार वर्ष 2026 में अब तक 93 नक्सली गिरफ्तार, 45 नक्सलियों ने आत्मसमर्पण तथा 22 नक्सली मुठभेड़ में मारे जा चुके हैं। झारखंड पुलिस का दावा है कि पश्चिमी सिंहभूम (चाईबासा) और सारंडा क्षेत्र में माओवादी नेटवर्क अब अंतिम दौर में पहुंच चुका है।
कई चर्चित घटनाओं में थे शामिल
आत्मसमर्पण करने वाले अधिकांश नक्सली पश्चिमी सिंहभूम, लातेहार, लोहरदगा, गिरिडीह, हजारीबाग, खूंटी, बोकारो, रांची, सरायकेला-खरसावां तथा ओडिशा के सुंदरगढ़ जिले के रहने वाले हैं। इनके खिलाफ दर्जनों गंभीर आपराधिक मामले दर्ज हैं। पुलिस रिकॉर्ड के अनुसार ये नक्सली पिछले कुछ वर्षों में सुरक्षा बलों पर आईईडी विस्फोट, पुलिस एवं सीआरपीएफ पर घात लगाकर हमले, ग्रामीणों की हत्या, पुलिस मुखबिरी के आरोप में हत्याएं तथा सरकारी विकास कार्यों को बाधित करने जैसी कई घटनाओं में शामिल रहे हैं।
इनमें 2021 में टोकलो क्षेत्र में आईईडी विस्फोट में झारखंड जगुआर के जवानों की शहादत, 2022 एवं 2023 में सुरक्षा बलों पर कई बड़े हमले, 2024 में ग्रामीण की हत्या, 2025 में सिलसिलेवार आईईडी विस्फोट और मुठभेड़ों सहित अनेक चर्चित मामलों में इनकी संलिप्तता सामने आई है। लातेहार जिले में भी 2018 से 2021 के बीच हुए लैंडमाइन विस्फोट और ग्रामीणों की हत्या जैसी घटनाओं में आत्मसमर्पित नक्सलियों की भूमिका रही है।
इनामी कमांडरों ने भी छोड़ा हिंसा का रास्ता
आत्मसमर्पण करने वालों में 15 लाख रुपये तक के इनामी रीजनल और जोनल कमेटी स्तर के कमांडर भी शामिल हैं। पुलिस का कहना है कि संगठन के भीतर शोषण, लगातार सुरक्षा बलों का दबाव तथा पुनर्वास नीति से प्रभावित होकर इन नक्सलियों ने हिंसा का रास्ता छोड़ मुख्यधारा में लौटने का निर्णय लिया है। झारखंड पुलिस ने शेष सक्रिय माओवादियों से भी अपील की है कि वे हथियार छोड़कर राज्य सरकार की आत्मसमर्पण एवं पुनर्वास नीति का लाभ उठाएं और समाज की मुख्यधारा से जुड़कर सम्मानजनक जीवन व्यतीत करें।
