सुनो, सुनो, सुनो, साढ़े चार साल तक हाथी उड़ानेवाले CM रघुवर, बचे पांच महीनों में गांवों की तस्वीर बदलेंगे

हमारे राज्य के मुख्यमंत्री रघुवर दास कितने होनहार है, वे गांवों की कितनी चिन्ता करते हैं, उनके लोग तथा उनके चाहनेवाले, उनके आगे-पीछे करनेवाले तो बताते है कि बेचारे गांवों की चिन्ता के कारण ही कभी मोटा नहीं पायें, हमेशा दुबले होते चले गये, जरा देखिये न कल ही मुखिया संघ के प्रतिनिधियों की एक बैठक की और कह दिया कि गांवों की तस्वीर बदलेगी, जल्द ही वहां शहरों जैसी सुविधाएं उपलब्ध कराई जायेगी, तो भाई सवाल तो उठता ही है कि पांच सालों के इस शासनकाल में साढ़े चार साल तक आपकी बुद्धि कहां सोई हुई थी, जो अचानक इस चुनावी साल में जागृत हो गई।

सवाल तो यह भी है कि शहरों में आपने कौन सी सुविधाएं उपलब्ध करा दी है कि आप यही सुविधा गांवों को उपलब्ध करा देंगे। आज भी शहरों में बिजली नहीं हैं, पानी के लिए हाहाकार हैं, सड़कों का बुरा हाल हैं, स्कूलों में शिक्षक नहीं हैं, शिक्षक हैं तो उन्हें मानदेय देने के लिए आपके पास पैसे नहीं हैं, स्वास्थ्य सेवा का हाल यह है कि रांची के अलबर्ट एक्का चौक में बहुत बड़ी बिल्डिंग खड़ी कर दी और उसे ठीक से चलाने के लिए आपके पास लोग नहीं हैं, अरे भाई आप क्या बोलते है? वह बोलने के पहले सोचते भी है?

आप ईमानदारी से इसी पर श्वेत पत्र जारी करिये कि आप और आपके साथ चलनेवाले लोगों ने इन साढ़े चार सालों में कैसे अपनी माली हालत को ठीक कर, उस स्तर पर पहुंचा दिया कि वो अब काम भी नहीं करेंगे तो जिंदगी उनकी आराम से मस्ती में चलती रहेगी और जो लोग ईमानदार, कर्तव्यनिष्ठ और चरित्रवान हैं, जो आपके आगे किसी भी हालत में नतमस्तक नहीं होना चाहते, उसे आपने बर्बाद करने के लिए कोई कसर नहीं छोड़ा, आपके लोगों ने आपकी कृपा से उन्हें झूठे मुकदमे में फंसाया, फिर भी वे महाराणा प्रताप की तरह आपके खिलाफ संघर्ष कर रहे हैं।

आप ही बताइये न, आप ही हैं न, जो गांवों में खुब डोभा बनाने का काम किये थे, कहीं बोलते थे कि साढ़े छः लाख डोभा बना दिया, कहीं बोलते थे पांच लाख डोभा बना दिया, आपकी तत्कालीन मुख्य सचिव राजबाला वर्मा जिन पर आपकी बहुत ही कृपा रहती थी, बताती थी कि साढ़े चार लाख डोभा बन गया, आखिर वो जलसंरक्षण के लिए बना डोभा कहां गया, उसे जमीन खा गई, या आसमां निगल गया। आखिर क्यों किसानों ने आपके शासनकाल में आत्महत्या करना शुरु किया? क्यों ग्रामीण आपके शासनकाल में भूखमरी के शिकार हुए और पूरे विश्व पटल पर झारखण्ड बदनाम हुआ। कहां गया कृषि सिंगल विंडो सिस्टम, कहां गया युवाओं को रोजगार देने के लिए कौशल विकास मिशन?

आपको क्या लगता है कि यहां आप और आपके संवादों पर ध्यान देनेवाला कोई नहीं? जैसे सारे चैनल व अखबारों में काम करनेवाले संपादक स्तर के लोग आपके सामने ठुमरी गाने में लगे हैं, वैसे और लोग भी ठुमरी गायेंगे? ऐसा नहीं है? आप यह भी नहीं समझे कि जैसे केन्द्र में लोगों ने मोदी को वोट दे दिया तो आपको विधानसभा के चुनाव में आपको अपने माथे पर बिठा लेंगे, चूंकि मामला देश का था, देशस्तर पर मोदी का लोगों को विकल्प नजर नहीं आया, और यहां विधानसभा में तो विकल्प ही विकल्प है, इसलिए आपको जो करना हैं, कर लीजिये, जनता को दिवास्वप्न दिखाना हैं, दिखाते रहिये पर जब सत्य आपके सामने आयेगा तो आपकी ही नहीं, आपके साथ जो भी लोग हैं, उनकी घिग्घी बंधनी तय है, क्योंकि यहीं ध्रुव सत्य है।