पूर्व की घोषणाओं की तरह, एक और झूठ का सामना करिये, अब 2020 तक 24 घंटे गांवों में बिजली

पहला झूठ – दिसम्बर 2018 तक अगर 24 घंटे बिजली नहीं उपलब्ध करा सका, तो वोट मांगने नहीं आउंगा। दूसरा झूठ – एक अगस्त के बाद से रांची में जीरो पावर कट बिजली, नहीं तो सबको सुधार दुंगा। और लीजिये अभी पन्द्रह दिन भी नहीं हुए, स्वतंत्रता दिवस पर एक और घोषणा राज्य के मुख्यमंत्री रघुवर दास ने कर दी कि 2020 तक गांवों में 24 घंटे बिजली मिलेगी।

पहला झूठ दिसम्बर 2018 तक अगर 24 घंटे बिजली नहीं उपलब्ध करा सका, तो वोट मांगने नहीं आउंगा। दूसरा झूठ एक अगस्त के बाद से रांची में जीरो पावर कट बिजली, नहीं तो सबको सुधार दुंगा। और लीजिये अभी पन्द्रह दिन भी नहीं हुए, स्वतंत्रता दिवस पर एक और घोषणा राज्य के मुख्यमंत्री रघुवर दास ने कर दी कि 2020 तक गांवों में 24 घंटे बिजली मिलेगी। 

जबकि सच्चाई यह भी है कि राज्य की जनता ने इनको 2019 तक ही शासन/सेवा करने की जिम्मेवारी सौंपी है, पर जनाब घोषणा इस प्रकार कर रहे हैं कि अगली बार भी सत्ता में यही रहेंगे। हालांकि ये स्वतंत्रता दिवस पर कुछ भी बोल लें, पर लगातार झूठ बोलने की इनकी आदत ने, इस वक्तव्य को भी जनता के बीच भविष्य की तीसरी झूठ करार दे दिया हैं, यानी राज्य के मुख्यमंत्री रघुवर दास, जिनके पास ऊर्जा विभाग भी हैं, अपना विश्वास जनता के बीच किस प्रकार खो दिया है, ये उसका प्रमाण है।

सच्चाई यह है कि राज्य में अभी भी अभूतपूर्व बिजली संकट हैं, राज्य की जनता ही नहीं बल्कि भाजपा के कार्यकर्ता भी मुख्यमंत्री के बिजली पर लगातार बोले जा रहे झूठ से जनता के बीच अपमानित हो जाते हैं। शायद यहीं कारण है कि वे आज भी ताल ठोक कर कहते हैं कि अगर मुख्यमंत्री रघुवर दास के नेतृत्व में राज्य में भाजपा चुनाव लड़ी तो यह पार्टी 20 सीटों पर जाकर अटक जायेगी, इसलिए रघुवर दास के नेतृत्व में चुनाव, पार्टी को शर्मनाक हार दिलाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा देगी, ये बाते राष्ट्रीय नेतृत्व को समझ लेनी चाहिए।

सोशल साइट पर इधर मुख्यमंत्री के नये घोषणा को लेकर एक बार फिर लोग हतप्रभ है, वे बारबार यहीं कह रहे हैं कि पूर्व की घोषणाओं की तरह, ये भी घोषणा कही ढपोरशंखी बन जाये, क्योंकि बिजली संकट पर मुख्यमंत्री रघुवर दास की बातों को यहां के बिजली अधिकारी किस प्रकार लेते हैं, वो स्पष्ट रुप से झलक रहा है, जब राज्य के कई इलाकों में बिजली नदारद है, सोशल साइट में तो बिजली को लेकर, चर्चाएं आज भी जारी है, पर राज्य के मुख्यमंत्री को इस पर कोई फर्क नहीं पड़ता।

एक भाजपा नेता नाम नहीं छापने की शर्त पर कहते हैं कि आप जानते है कि राज्य में अधिकारियों के कामकाज करने का ढंग कैसा है, ऐसे में बेचारे मुख्यमंत्री क्या करेंगे? जब भाजपा नेता के प्रत्युत्तर में यह कहा जाता है कि जब राज्य के अधिकारियों का चालचरित्र राज्य के मुख्यमंत्री को पता है तो फिर वे किस आधार पर इस बात की घोषणा कर देते है कि फलां तारीख या फलां वर्ष तक बिजली की आपूर्ति 24 घंटे हो जायेगी, इसका मतलब है कि राज्य के अधिकारियों पर मुख्यमंत्री का नियंत्रण नहीं है, और सरकार जनता को धोखे में रख रही हैं, जो शर्मनाक है, ऐसे भी जो व्यक्ति पौने पांच साल में बिजली की स्थिति नहीं सुधार सका, आम जनता कैसे समझ लें कि बाकी बचे तीन महीने में बिजली की स्थिति सुधर जायेगी।

Krishna Bihari Mishra

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